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एक्सक्लूसिव : उत्तराखंड की पंचायतों का होगा ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स, सतत विकास के लक्ष्य के हिसाब से बनेंगी योजनाएं
Mon, 14 Dec 2020 10:25 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 14 Dec 2020 10:25 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेेश की साढ़े सात हजार से अधिक ग्राम, जिला और क्षेत्र पंचायतें अब ईज ऑफ लिविंग के लिए काम करेंगी। इसके साथ ही ग्राम पंचायतें अब स्थानीय स्तर की योजनाओं के लिए 10 साल का खाका खींचेंगी। इसके लिए पंचायत और नियोजन विभाग में एमओयू भी हो गया है।
प्रदेश में ग्राम पंचायतों ने सतत विकास के लिए काम करना शुरू कर दिया है। इसमें उसे नियोजन विभाग की मदद भी मिलेगी। संयुक्त राष्ट्र की ओर से सतत विकास के 19 लक्ष्य घोषित किए गए हैं। ये लक्ष्य बेहतर पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, काम की अवधि आदि से संबंधित हैं।
इन्हीं को आधार बनाकर अब ग्राम पंचायतें योजनाएं बनाते हुए यह भी देंखेेंगी कि उनकी योजनाओं से लोगों का जीवन कितना सुविधाजनक हो रहा है और लोगों की संतुष्टि का स्तर क्या है। इसे ही ईज ऑफ लिविंग कहा गया है और इस काम को प्रदेश की पंचायतों में लागू करने का काम शुरू हो गया है।
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नियोजन विभाग के स्तर से पंचायतों की इस मामले में मदद की जाएगी। नियोजन विभाग बताएगा कि ईज ऑफ लिविंग के लक्ष्य क्या हैं। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किस तरह से काम किया जाएगा, योजनाएं किस तरह से बनाई जाएंगी।
मास्टर प्लान बनेंगे
हाल ही में उत्तराखंड के दौरे पर आए केंद्रीय पंचायत सचिव सुनिल कुमार ने इसका खाका पंचायतों के सामने रखा था। उनका कहना था कि पंचायतों को यह अनुमान भी लगाना होगा कि अगले दस साल में संसाधनों पर दबाव कितना बढ़ जाएगा। इस अनुमान के आधार पर योजनाओं को तैयार किया जाना चाहिए। यह स्थानिक योजना होगी। ग्राम पंचायतों को अब मास्टर प्लान भी बनाना होगा।
हो गया है एमओयू
ईज ऑफ लिविंग को अमली जामा पहनाने के लिए पंचायत विभाग और नियोजन के बीच एमओयू भी हो गया है। पंचायत सचिव हरि चंद्र सेमवाल ने इसकी पुष्टि की और बताया कि नियोजन विभाग की सतत विकास के लक्ष्यों को अमलीजामा पहनाने वाली टीम इस मामले में पंचायतों की मदद करेगी।
सतत विकास के लक्ष्यों के आधार पर ग्राम पंचायतों में योजनाओं के निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है। इसमें सबसे जरूरी हिस्सा है ग्राम पंचायतों में रह रहे लोगों की संतुष्टी का स्तर। इसे ही ईज ऑफ लिविंग भी कहा जा सकता है। इसके लिए नियोजन विभाग के साथ एमओयू हो गया है।
- हरिचंद्र सेमवाल, सचिव, पंचायत
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प्रदेश में ग्राम पंचायतों ने सतत विकास के लिए काम करना शुरू कर दिया है। इसमें उसे नियोजन विभाग की मदद भी मिलेगी। संयुक्त राष्ट्र की ओर से सतत विकास के 19 लक्ष्य घोषित किए गए हैं। ये लक्ष्य बेहतर पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, काम की अवधि आदि से संबंधित हैं।
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इन्हीं को आधार बनाकर अब ग्राम पंचायतें योजनाएं बनाते हुए यह भी देंखेेंगी कि उनकी योजनाओं से लोगों का जीवन कितना सुविधाजनक हो रहा है और लोगों की संतुष्टि का स्तर क्या है। इसे ही ईज ऑफ लिविंग कहा गया है और इस काम को प्रदेश की पंचायतों में लागू करने का काम शुरू हो गया है।
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नियोजन विभाग के स्तर से पंचायतों की इस मामले में मदद की जाएगी। नियोजन विभाग बताएगा कि ईज ऑफ लिविंग के लक्ष्य क्या हैं। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किस तरह से काम किया जाएगा, योजनाएं किस तरह से बनाई जाएंगी।
मास्टर प्लान बनेंगे
हाल ही में उत्तराखंड के दौरे पर आए केंद्रीय पंचायत सचिव सुनिल कुमार ने इसका खाका पंचायतों के सामने रखा था। उनका कहना था कि पंचायतों को यह अनुमान भी लगाना होगा कि अगले दस साल में संसाधनों पर दबाव कितना बढ़ जाएगा। इस अनुमान के आधार पर योजनाओं को तैयार किया जाना चाहिए। यह स्थानिक योजना होगी। ग्राम पंचायतों को अब मास्टर प्लान भी बनाना होगा।
हो गया है एमओयू
ईज ऑफ लिविंग को अमली जामा पहनाने के लिए पंचायत विभाग और नियोजन के बीच एमओयू भी हो गया है। पंचायत सचिव हरि चंद्र सेमवाल ने इसकी पुष्टि की और बताया कि नियोजन विभाग की सतत विकास के लक्ष्यों को अमलीजामा पहनाने वाली टीम इस मामले में पंचायतों की मदद करेगी।
सतत विकास के लक्ष्यों के आधार पर ग्राम पंचायतों में योजनाओं के निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है। इसमें सबसे जरूरी हिस्सा है ग्राम पंचायतों में रह रहे लोगों की संतुष्टी का स्तर। इसे ही ईज ऑफ लिविंग भी कहा जा सकता है। इसके लिए नियोजन विभाग के साथ एमओयू हो गया है।
- हरिचंद्र सेमवाल, सचिव, पंचायत