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उत्तराखंड: सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का समय दो घंटे बढ़ाने के लिए नीति आयोग ने भेजा सुझाव

Fri, 31 Dec 2021 01:08 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 31 Dec 2021 01:08 PM IST
सार

नौ अक्तूबर को हुई बैठक में अलग अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की ओर से रोजगार, पलायन, आर्गेनिक फार्मिंग, उद्योग व उद्यानिकी के क्षेत्र को लेकर कई अहम सुझाव आए थे। शासन ने संबंधित विभागों को इन सुझावों अमल करने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

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uttarakhand news:  NITI Aayog sent suggestion to increase teaching time in government schools by two hours
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में अध्यापन का समय दो घंटे बढ़ाने का सुझाव शिक्षा विभाग को भेजा गया है। अमेरिकन इंडियन फाउंडेशन के प्रतिनिधियों की ओर से नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार की बैठक में यह सुझाव सामने लाया गया था। 

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सुझावों अमल करने के दिशा-निर्देश जारी
अब सचिव नियोजन डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने शिक्षा विभाग को यह सुझाव भेजा है। नौ अक्तूबर को हुई उस बैठक में अलग अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की ओर से रोजगार, पलायन, आर्गेनिक फार्मिंग, उद्योग व उद्यानिकी के क्षेत्र को लेकर कई अहम सुझाव आए थे। शासन ने संबंधित विभागों को इन सुझावों अमल करने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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इस बैठक में नई शिक्षा नीति के आलोक में शैक्षणिक सुधारों पर चर्चा के दौरान स्वयंसेवी संस्था की ओर से यह सुझाव दिया गया था कि स्कूलों में शिक्षण कार्य छह घंटे ही होता है। इस कारण स्कूल का सिलेबस पूरा नहीं हो पाता। साथ ही स्कूली बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए जरूरी अन्य गतिविधियां संचालित नहीं हो पातीं।
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यदि स्कूलों में पठन-पाठन का समय आठ घंटे निर्धारित हो जाए तो अध्यापन के साथ अन्य अकादमिक गतिविधियां भी हो सकेंगी। सचिव शिक्षा को भेजे गए सुझाव में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार का चीन और जापान की शिक्षा प्रणाली का तुलनात्मक अध्ययन करने का सुझाव भी शामिल है।

नीति आयोग के इन सुझावों पर भी अमल के निर्देश

कृषि सेक्टर 
राज्य के विभिन्न जिलों में सहकारिता और प्रतिस्पर्धात्मक स्वरूप को पर काम हो।
कृषि व उससे संबंधित क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए इसे एमएसएमई से जोड़ा जाए।
पलायन को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर क्लस्टर बनाकर गांवों के पुनर्वास व रोजगार के अवसर विकसित हों
फसल चक्र, नेचुल एग्रीकल्चर, आर्गेनिक फार्मिंग, मिट्टी की उर्वरता जांचने, फल एवं फूल तथा औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जाए
भोजन, दवाइयों व सौंदर्य प्रसाधन में उपयोगी सी बकथॉर्न पौध अपनाई जाएं
95 विकासखंडों के एक-एक गांव नेचुरल फार्मिंग विलेज बनें।
हाई वेल्यू क्राप्स को प्रोत्साहित किया जाए। 

उद्योग 
निजी क्षेत्र के सहयोग से इनलैंड कंटेनर डिपो बनाएं।
छोटे-छोटे सुविधायुक्त इंडस्ट्रियल एस्टेट बनाएं। 
उद्योग संघों से पीपीपी मॉडल पर कार्ययोजना तैयार कराई जाए।

शिक्षा 
राज्य में बेहतर शिक्षण संस्थान बनें।
जीबी पं विवि को प्राकृति खेती का कार्य करने के लिए एक समर्पित केंद्र तैयार हों।
अटल इनोवेशन मिशन के तहत अटल टिंकरिंग लैब्स के लिए प्रस्ताव बनाए जाएं।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार की बैठकों में विशेषज्ञों के स्तर पर जितने भी अहम सुझाव दिए गए थे, उन्हें संबंधित विभागों को भेज दिया गया है। वे इन सुझावों पर मंथन करेंगे और व्यवहारिकता के आधार पर इन पर कार्रवाई करेंगे।

- मेजर योगेंद्र यादव, अपर सचिव नियोजन
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