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देहरादून: सत्ता की चाहत पर, बदहाल सड़कों पर हिचकोले खाती जनता की फिक्र नहीं, झेलनी पड़ती है मुसीबत 

Thu, 10 Feb 2022 12:20 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 10 Feb 2022 12:20 PM IST
सार

कहने को देहरादून में सत्ता से लेकर विपक्ष तक के आला नेता रहते हैं, जिनके एक बार कहने पर असंभव काम भी संभव हो जाता है लेकिन शायद उन्हें भी सड़कों की बदहाली और जनता की तकलीफें नजर नहीं आ रही हैं।

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uttarakhand news: leader want vote but do not wanrt to work for public
देहरादून की सड़कें बदहाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी की बदहाल सड़कें देहरादून की साख पर बट्टा लगा रही हैं। यह बात शायद सड़कों के रखरखाव का जिम्मा संभालने वाले लोगों को नहीं पता है, अगर पता है तो वह जानबूझकर आंख मूंदे हुए हैं।

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कहने को दून में सत्ता से लेकर विपक्ष तक के आला नेता रहते हैं, जिनके एक बार कहने पर असंभव काम भी संभव हो जाता है लेकिन शायद उन्हें भी सड़कों की बदहाली और जनता की तकलीफें नजर नहीं आ रही हैं। गौर करने वाली बात यह है कि वर्तमान में इन्हीं सड़कों पर चलकर दिग्गज चुनाव प्रचार करके विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि लोगों को भविष्य के बड़े-बड़े सपने दिखाने वाले दिग्गजों को न तो सड़कों की यह बदहाल स्थिति दिखाई दे रही है और न ही जनता की परेशानी। इसलिए किसी भी दिग्गज के चुनावी संकल्प पत्र में बदहाल सड़कों का मुद्दा नजर नहीं आ रहा है। 
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बदहाल सड़कों से कोई फर्क नहीं पड़ता
सड़के विकास की संवाहक होती हैं और इनकी अच्छी स्थिति हर आने-जाने वाले के जेहन में शहर और यहां के प्रशासन से लेकर नेताओं की तक की छवि को चमकाती हैं। लगता है कि इस बात से या तो जिम्मेदार वाकिफ नहीं है और अगर हैं तो उन्हें बदहाल सड़कों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। क्योंकि वह तो चार पहिया वाहन और बंद शीशों के भीतर बिना धूल का गुबार झेलते हुए गंतव्य को पहुंच जाते हैं। परेशान तो जनता होती है। दून में कैंट क्षेत्र हो या नगर निगम का शहरी क्षेत्र जगह-जगह सड़कों की हालत बद से बदतर है। यहां तक मुख्यमंत्री आवास और राजभवन जाने वाली सड़क की स्थिति भी ठीक नहीं है।  
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वर्तमान में राजधानी की सड़कों को कहीं स्मार्ट सिटी तो कई पेयजल, सीवर लाइनों के लिए खोदा गया है। कई जगह बारिश के कारण सड़कों पर बड़े और गहरे गड्ढे बने हुए तो कहीं सड़क उखड़ी हुई है। आम जनता को इन सड़कों पर कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कैंट देहरादून क्षेत्र में ही कैंट थाने से लेकर गुच्चूपानी चौक तक की सड़क की हालत देखिए। कहने के लिए यह वीआईपी सड़क है, क्योंकि इस पर आम से लेकर खास तक सभी सफर करते हैं। बल्लूपुर चौक से यह सड़क राज्य अतिथि गृह, मुख्यमंत्री आवास, राजभवन को जोड़ती है साथ ही इस सड़क से रोजाना मसूरी के लिए हजारों पर्यटक गुजरते हैं। सेना का अस्पताल भी इसी सड़क पर स्थित है, जहां हर दिन सैकड़ों की संख्या में सैनिक, पूर्व सैनिक और उनके परिजन इलाज कराने के लिए जाते हैं। 

 वहीं कैंट थाने से लेकर अनारवाला गुच्चूपानी चौक तक सड़क की हालत यह है कि गड्ढों में सड़क है या सड़क में गड्ढे पता नहीं चल पाता। कई जगह सड़क पर गहरे और चौड़े गड्ढे बने हैं तो कहीं जगह सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है। हैरत की बात यह है कि इस सड़क की स्थिति लंबे समय से बदहाल है, लेकिन आज तक न तो माननीयों की नजर इसकी बदहाली पर गई और न कैंट बोर्ड की। चुनाव प्रचार में जुटे अलग-अलग पार्टियों के दिग्गजों को भी शायद सड़क की बदहाली नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में उन्हें पर्यटकों और आम आदमी की परेशानी से क्या लेना देना।

कैंट बोर्ड बोला, बजट नही, राज्य सरकार से मांगी है मदद 

कैंट थाने से लेकर अनारवाला, गुच्चूपानी तक की यह सड़क कैंट बोर्ड के अंदर आती है। कैंट बोर्ड वर्तमान में बजट की कमी मार झेल रहा है। लिहाजा बजट की कमी का हवाला देकर कैंट बोर्ड ने तो सड़क बनाने से हाथ खड़े किए हुए हैं। लेकिन कैंट बोर्ड ने इस संबंध में राज्य सरकार से मदद मांगी है। लेकिन राज्य सरकार भी सड़क की इस बदहाली की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। सीईओ तनु जैन ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि वह सड़क का निर्माण कर दें, लेकिन अभी तक कोई जबाब नहीं आया है। 

फिलहाल पूरा प्रशासनिक अमला विधानसभा चुनाव में जुटा हुआ है। स्मार्ट सिटी परियोजना व पीडब्ल्यूडी के भी तमाम तमाम अधिकारियों, इंजीनियरों की ड्यूटी चुनाव में लगायी गई है। ऐसे में सड़कों की मरम्मत का काम रूका हुआ है। विधानसभा चुनाव संपन्न होने के साथ ही तमाम सड़कों की मरम्मत तेज से कराया जाएगा। जिसे लेकर स्मार्ट सिटी परियोजना व पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश भी जारी किए जा रहे हैं।
- डॉ. आर राजेश कुमार, जिलाधिकारी एवं सीईओ स्मार्ट सिटी परियोजना

यह है हकीकत 
- पर्यटक बोले, राजधानी दून की सड़केें है या फिर गांवों में गली कूंचों का खड़ंजा
- स्मार्ट सिटी परियोजना व पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की हीलाहवाली पड़ रही भारी
- अधिकारियों के चुनाव ड्यूटी में होने से निर्माण कार्यों पर लगे ब्रेक ने बढाई दिक्कत 
- विधानसभा चुनाव प्रचार कर रहे तमाम सियासी दलों के प्रत्याशियों के एजेंडे से गायब हैं टूटी सड़कें
- स्मार्ट सिटी सीईओ ने कहा, विधानसभा मतदान संपन्न होने के साथ ही तेजी से कराए जाएंगे निर्माण कार्य

स्मार्ट सिटी का धीमा काम भी बना मुसीबत 
राजधानी की कुछ सड़कें स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बिछाई गई सीवर लाइनों के चलते टूट गई हैं और उनकी मरम्मत का काम ठप पड़ा है। वहीं कई ऐसी भी सड़कें हैं जिन्हें पीडब्ल्यूडी को दुरुस्त करना है। सड़कों की मरम्मत को लेकर लगातार आवाज भी उठाई जा रही है लेकिन न तो स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारी और न ही पीडब्लयूडी अधिकारी इसे लेकर फिक्रमंद नजर आ रहे हैं।  

इन सड़कों पर भी मुसीबत भरा सफर 
ईसी रोड, सहारनपुर रोड, जीएमएस रोड, महाराजा अग्रसेन चौक से लेकर घंटा जाने वाली रोड, राजपुर रोड, हरिद्वार बाईपास, शिमला बाईपास कुछ ऐसी ही चुनिंदा सड़कें हैं जो जगह-जगह टूटी हैं और इन सड़कों पर शहरियों का चलना दुश्वार साबित हो रहा है।
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