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कर्मकार कल्याण बोर्ड : सचिव ने जिन चार कर्मचारियों की सेवा समाप्त की, अध्यक्ष ने बहाल किया

Sat, 19 Jun 2021 06:45 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 19 Jun 2021 06:45 PM IST
सार

कर्मकार बोर्ड के दफ्तर में शुक्रवार को भी माहौल गर्म ही रहा। नियत समय पर सचिव मधु नेगी चौहान पहुंच गईं। इसके कुछ देर बाद अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल भी पहुंचे।

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uttarakhand news : four employees whose service was terminated by secretary, chairman reinstated
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड भवन सन्निर्माण एवं कर्मकार कल्याण बोर्ड में सचिव मधु नेगी चौहान ने जिन चार उपनल कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की थीं, शुक्रवार को बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल ने उन्हें काम करने के निर्देश दिए। दिनभर वह कर्मचारी बोर्ड के दफ्तर में काम मिलने का इंतजार करते रहे। शाम को लौट गए।

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कर्मकार बोर्ड के दफ्तर में शुक्रवार को भी माहौल गर्म ही रहा। नियत समय पर सचिव मधु नेगी चौहान पहुंच गईं। इसके कुछ देर बाद अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल भी पहुंचे। उनके साथ वह चार कर्मचारी भी थे, जिनकी सेवाएं 14 जून को सचिव मधु चौहान ने समाप्त कर दी थीं।
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अध्यक्ष सत्याल का कहना है कि जिस दिन सेवाएं समाप्त करने का आदेश हुआ था, उसी दिन शाम को बोर्ड ने सेवाएं बहाल कर दी थीं। इसलिए वह कर्मचारी बोर्ड के ही हैं। शुक्रवार को उन्होंने कर्मचारियों को काम करने के निर्देश दिए। वह दिनभर सचिव से निर्देश मिलने का इंतजार करते रहे।
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शाम को सभी वापस लौट गए। सचिव मधु चौहान ने कहा कि चूंकि इन कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के आदेश हो चुके हैं। इनकी जगह उपनल से दूसरे कर्मचारियों को बुलाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, लिहाजा इन कर्मचारियों को काम देने का कोई मतलब नहीं है।

जिन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई थीं, बोर्ड ने उन्हें बहाल कर दिया था। आज वह काम पर आए थे, लेकिन उन्हें सचिव ने काम नहीं दिया है।
-शमशेर सिंह सत्याल, अध्यक्ष, कर्मकार बोर्ड

कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के बाद दूसरे कर्मचारियों के चयन की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। ऐसे में उन्हें काम देने का कोई औचित्य नहीं है।
- मधु नेगी चौहान, सचिव, कर्मकार बोर्ड

कई महीने के विवादों से लाखों श्रमिकों के काम लटके
कर्मकार बोर्ड से तीन लाख से अधिक श्रमिक जुड़े हैं, उनके कल्याण की योजनाएं राजनीतिक विवादों के बीच अटक गई हैं। उन्हें न तो समय से कोई राहत मिल पा रही है और न ही किसी योजना का लाभ। दरअसल, कर्मकार बोर्ड में पंजीकृत श्रमिकों को बोर्ड की ओर से औजारों से लेकर तमाम तरह की वित्तीय मदद दी जाती है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के कार्यकाल में अध्यक्ष व सचिव बदलने के बाद ऑडिट और फिर जांच को लेकर बोर्ड विवादों में रहा।

38 कर्मचारियों को नियम विरुद्ध बताते हुए हटा दिया गया। फिर सीएम बदले तो विवाद फिर शुरू हो गए। सचिव को बदल दिया गया। नई सचिव और अध्यक्ष के बीच पैदा हुए टकराव, कर्मचारियों की कमी, दफ्तर को शिफ्ट करने के चक्कर में बोर्ड के सभी काम अटक गए हैं। न तो समय से मृत्यु आदि पर राहत राशि दी जा रही है और न ही अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं।


तीन लाख से ज्यादा श्रमिकों को अब विवाद थमने और राहत मिलने का इंतजार है। बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से कामकाज निश्चित तौर पर प्रभावित हुआ है। वहीं, सचिव का कहना है कि अव्यवस्थाओं और कर्मचारियों की कमी की वजह से कामकाज प्रभावित हो रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही हालात सामान्य होंगे।

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