उत्तराखंड: रात में फिल्म देखी, फिर सुबह उठ नहीं सकीं इंदिरा, आकस्मिक निधन से हर कोई स्तब्ध
नेता प्रतिपक्ष और उत्तराखंड कांग्रेस की वरिष्ठ नेता डॉ. इंदिरा हृदयेश का हार्ट अटैक से निधन हो गया है। आज सुबह उन्हें गंभीर हालत में दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
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उत्तराखंड की नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के आकस्मिक निधन से सब स्तब्ध हैं। उनके बेटे सुमित हृदयेश ने बताया कि उनकी मां ने रात चार बजे तक अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की फिल्म देखी थी। चार बजे उन्हें उल्टी हुई। बाद में उन्होंने अपने केयर टेकर से कहा कि वह ठीक हैं। सुबह जल्दी उठा देना। फिर वह उठ नहीं सकी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
उत्तराखंड : कांग्रेस को बड़ा झटका, नहीं रहीं कांग्रेस की कद्दावर नेता डॉ. इंदिरा हृदयेश
सुमित हृदयेश ने बताया कि करीब पांच घंटे माता जी प्रदेश प्रभारी के साथ बातें करतीं रहीं। उन्होंने डिनर भी देर से किया था। उनके केयर टेकर ने सुबह करीब साढ़े दस बजे उन्हें उठाने की कोशिश की लेकिन वह उठ नहीं सकी। इसके बाद मां जी के पीआरओ अभिनव का फोन उनके पास आया कि वह कोई रिस्पांस नहीं कर रही हैं।
सुमित ने बताया कि वह गुरुग्राम में थे। उनके मझले भाई सौरभ को जैसे ही पता चला तो वह उत्तराखंड भवन पहुंच गए। सुमित ने बताया कि इसके बाद उत्तराखंड भवन के व्यवस्था अधिकारी रंजन मिश्रा का उन्हें फोन आया कि माता जी नहीं रहीं।
ऐसी कद्दावर नेता थीं इंदिरा
22 दिन में बिजली के 500 पोल मंगवा लिए
बात 2004 की है जब डॉ. इंदिरा हृदयेश के पास संसदीय कार्यमंत्री के अलावा लोनिवि समेत महत्वपूर्ण विभाग थे। पूर्व पालिकाध्यक्ष हेमंत बगड़वाल बताते हैं कि हल्द्वानी में जनता दरबार में लोगों ने बिजली के पोलों की मांग की। तब उन्होंने अधिकारियों को 500 पोलों की व्यवस्था करने के लिए कहा। अधिकारी के बड़ी संख्या में पोल देने की असमर्थता जताने पर उन्होंने उसी समय देहरादून एमडी को फोन कर 22 दिन में पोल हल्द्वानी पहुंचाने के आदेश दिए। आईएएस भी उनकी कार्यशैली देख ज्यादा बात करने से कतराते थे।
शीला दीक्षित को बुलाया घर
डॉ. इंदिरा हृदयेश के अंदर अपनत्व की भावना भी थीं, इसीलिए प्रदेश ही नहीं, देश का कोई भी नेता हल्द्वानी आता तो इंदिरा दीदी से जरूर मिलता। दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने से पहले जब शीला दीक्षित हल्द्वानी आईं तो इंदिरा हृदयेश ने पूर्व पालिकाध्यक्ष हेमंत बगड़वाल को उन्हें लेने काठगोदाम भेजा था। परिवार के सभी सदस्य इंदिरा जी से प्यार करते थे, इसीलिए डरते भी थे। उनके हल्द्वानी में होने पर परिवार साथ बैठकर भोजन करता था। यह उनका आदेश भी था।
पर्यावरण प्रेमी भी थीं इंदिरा
2002 से 2007 के कांग्रेस कार्यकाल में लोनिवि और संसदीय कार्यमंत्री रहीं डॉ. इंदिरा ह्रदयेश ने विदेशी यात्रा के अनुभव के आधार पर 2004 में नैनीताल रोड के दोनों किनारे इतने पेड़ लगाए कि आज यह सड़क पेड़-पौधों के चलते सबसे सुंदर बन गई है।