उत्तराखंड: लॉकडाउन के बाद शुरू किया स्वरोजगार, अब मेट्रो सिटी तक ऑनलाइन पहुंच रहा ‘पहाड़ी टेस्ट’
- कोटद्वार से बिक्री शुरू करने के बाद चमोली में दिया जा रहा विस्तार
- टिहरी के युवक ने स्वरोजगार शुरू कर 15 युवकों को भी दिया रोजगार
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लॉकडाउन के बाद स्वरोजगार शुरू करते हुए टिहरी के युवक ने पहाड़ी उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री शुरू की है। इसके लिए उसने ‘पहाड़ी टेस्ट’ पोर्टल बनाया है। पौड़ी के कोटद्वार क्षेत्र से शुरू किए काम को अब चमोली जिले में विस्तार दिया जा रहा है। उन्होंने खुद तो स्वरोजगार शुरू किया ही साथ ही 15 युवकों को भी रोजगार दिया है।
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टिहरी के चंबा निवासी शिशुपाल रावत ने श्रीनगर गढ़वाल विवि से एमबीए टूरिज्म से पढ़ाई की है। करीब 10 साल तक विभिन्न कंपनियों में काम किया। लॉकडाउन शुरू होने से पहले फरवरी में वह घर आ गए थे, लेकिन अब उन्होंने मई माह से कोटद्वार से अपना काम शुरू कर दिया है। वह हर तरह के पहाड़ी उत्पादों को ऑनलाइन ही दिल्ली और मुंबई शहरों में बेच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी उत्पादों में गहत, राजमा, सुंटा (लोभया), उड़द, जख्या, कोदा (मंडवा), झंगोरा, भट/सोयाबीन, भंगजीरा, चौसा, पहाड़ी आलू आदि शामिल है जिसकी ऑनलाइन डिमांड बढ़ रही है। उन्होंने इसकी शुरुआत कोटद्वार से लगे जयहरीखाल और आसपास के ब्लॉकों से की।
अब इस काम को चमोली जिले में विस्तार देने के लिए वह इन दिनों गोपेश्वर और आसपास के काश्तकारों तक पहुंच बना रहे हैं। इस समय उनके साथ कोटद्वार, दिल्ली और मुंबई आदि जगहों से करीब 15 युवक जुड़े हैं, जिनके जरिए वह गांव-गांव से उत्पाद एकत्रित करके लोगों तक पहुंचा रहे हैं। ऋषिकेश में इसके लिए गोदाम भी बनाया जा रहा है।
हफ्ते में 200 किलो तक बेच रहे पहाड़ी उत्पाद
शिशुपाल रावत ने बताया कि पहाड़ी उत्पादों की बड़े शहरों में भारी डिमांड है। वह इस समय हर हफ्ते करीब 200 किलो तक पहाड़ी उत्पाद ऑनलाइन बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी ज्यादा काश्तकारों तक पहुंच नहीं बनी है, जिस कारण वह मांग के अनुरूप उत्पाद एकत्रित नहीं कर पा रहे हैं।
होलसेल की डिमांड है, लेकिन अभी रिटेल में सामान बेच रहे हैं। वह ग्रामीण महिलाओं को नमक सहित अन्य सामग्री पीसने के लिए देते हैं। सिलबट्टे पर पीसने के बाद पैसे देकर उनसे वह नमक ले लेते हैं। यह काम कोटद्वार क्षेत्र में चल रहा है। यह नमक भी शहरों में बिक रहा है।
‘पहाड़ी मार्ट’ पोर्टल पर चल रहा काम
शिशुपाल इंडिया मार्ट की तर्ज पर ‘पहाड़ी मार्ट’ के नाम से भी एक पोर्टल बना रहे हैं। इससे उनको कोई लाभ नहीं होगा, लेकिन किसान अपना उत्पाद सीधे ग्राहक तक बेच सकेंगे। पोर्टल इसमें जरिया बनेगा।
15 से 20 हजार दे रहे वेतन
शिशुपाल के अनुसार उन्होंने करीब चार लाख रुपये के बजट से काम शुरू किया, जिसमें रिसर्च वर्क भी शामिल था। इसी से शुरू में तनख्वाह भी दी। अब सामान बेचकर वेतन सहित अन्य छोटे मोटे खर्चे निकल जाते हैं। ऑनलाइन सामान बेचकर प्रतिमाह लगभग 02 लाख की आमदमी हो रही है। इस काम में 15 युवक जुड़े हैं। उन्हें औसतन 10 से 15 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है।