उत्तराखंड: शानदार बहुमत की दुर्गति की मिसाल, प्रदेश में नहीं बन पाई स्थिर सरकार
2002 से 2007 तक एनडी तिवारी सरकार के कार्यकाल को छोड़ कर किसी भी दल की सरकार का मुख्यमंत्री पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया।
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उत्तराखंड राज्य की कुंडली में ग्रहों की कुछ ऐसी चाल है कि यहां राजनीति अस्थिरता थमने का नाम नहीं लेती। राज्य गठन से लेकर अब तक यह राज्य राजनीतिक अस्थिरता का उदाहरण रहा है।
इसे राज्य का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि 2002 से 2007 तक एनडी तिवारी सरकार के कार्यकाल को छोड़ कर किसी भी दल की सरकार का मुख्यमंत्री पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। सत्तारूढ़ भाजपा के पास शानदार बहुमत होने के बाद राजनीतिक अस्थिरता से नहीं दे बच पाए। सवा चार के भीतर राज्य को तीसरा मुख्यमंत्री को मिला है।
उत्तराखंड : पुष्कर सिंह धामी बनेंगे नए सीएम, रविवार को शपथ लेंगे राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता ने भाजपा को शानदार बहुमत के साथ सत्तासीन किया था। प्रदेश की कुल 70 विधानसभा सीटों से भाजपा ने 57 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा के पास सरकार चलाने के लिए बहुमत की कोई कमी नहीं थी।
इसके बावजूद भी उत्तराखंड को स्थिर सरकार नहीं मिल पाई है। चार साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री पद से हटा कर तीरथ सिंह रावत को सत्ता की कमान सौंपी गई। लेकिन 115 दिन तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद तीरथ ने पद से इस्तीफा दिया। अब पुष्कर सिंह धामी नए मुख्यमंत्री होंगे। वे 11 वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।
20 सालों में 11 मुख्यमंत्री बने
राज्य गठन के 20 सालों में भाजपा व कांग्रेस सरकारों में 11 मुख्यमंत्री बने हैं। 2002 से 2007 तक एनडी तिवारी सरकार ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है। इसके बाद किसी भी दल की सरकार में मुख्यमंत्री कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। बहुमत के बाद भी राज्य की राजनीति अस्थिरता का नाम नहीं ले रही है।
भाजपा ने साधा क्षेत्रीय व जातीय संतुलन
भाजपा ने युवा चेहरे पुष्कर सिंह धामी को सत्ता की कमान सौंपकर क्षेत्रीय व जातीय संतुलन साधा है। धामी कुमाऊं मंडल के ऊधमसिंह नगर जिले की खटीमा विस सीट से दो बार के विधायक हैं। अब गढ़वाल मंडल के हरिद्वार जिले से मदन कौशिक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं और कुमाऊं से धामी मुख्यमंत्री होंगे। सियासी जानकारों का कहना है कि भाजपा ने यह प्रयोग इस उम्मीद से किया है कि अब सत्ता में कम भागीदारी से बना असंतोष कुमाऊं में कम हो सकेगा।