मॉक ड्रिल: कहीं भूकंप, तो कहीं रासायनिक गैसों के रिसाव से लोगों की जान पर बना खतरा
- भूकंप से ट्रिगर होगी आपदा, जहरीली गैस के रिसाव और आग की घटनाओं से जूझना होगा
- मॉक ड्रिल में देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के करीब 40 उद्योग होेंगे शामिल
विस्तार
उत्तराखंड के तीन जिलों देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में आज भोपाल गैस कांड जैसी आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और गृह मंत्रालय की ओर से मॉक ड्रिल की गई। इस दौरान सभी विभागों की सतर्कता देखी गई।
जानकारी के अनुसार, देहरादून में सुबह 7.7 तीव्रता का भूकंप आया। जिसके कारण सेलाकुई की रासायनिक फैक्ट्री में काफी नुकसान हुआ। इसकी सूचना मिलते ही वहां आपदा प्रबंधन की टीम पहुंची और राहत-बचाव कार्य किया।
वहीं, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर की सिडकुल फैक्ट्री में भी नुकसान हुआ। टाटा और सनसेरा कंपनी में रसायनिक पदार्थों से घायल व्यक्तियों को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया।
सेटेलाइट फोन ऑफिस में रखने के लिए नहीं
आपदा प्रबंधन के तहत हुई मॉक ड्रिल से प्रदेश के अधिकारियों को बहुत कुछ सीखने को भी मिला। पहला पाठ प्रदेश के आपदा प्रबंधन तंत्र ने संचार व्यवस्था को चुस्त रखने का पढ़ा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सलाहकार जेपी दत्ता के मुताबिक सेटेलाइट फोन ऑफिस में रखने के लिए नहीं हैं। अधिकारी फोन अपने पास रखे और इमरजेंसी मेें इसका उपयोग करें।
सचिवालय में मीडिया से मुखातिब जेपी दत्ता ने कहा कि मॉक ड्रिल में संचार को लेकर समस्याएं सामने आईं। अधिकारियों को बताया गया कि किसी बड़ी आपदा के आने पर अधिकारी आदेश का इंतजार न करें, बल्कि अपनी तरफ से पूर्व निर्धारित दायित्व के तहत तुरंत सक्रिय हों।
पुलिस के वायरलेस नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाए। हेम रेडियो नेटवर्क को भी इसमें शामिल किया जाए। दत्ता के मुताबिक जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन तंत्र और उद्योगों के बीच संचार को और अधिक मजबूत करने की जरूरत भी महसूस हुई है। उद्योग अपना वायरलेस नेटवर्क रखते हैं। इनको अन्य नेटवर्क से जोड़ा जाना चाहिए।
अस्पताल और अन्य संस्थाएं भी रहें तैयार
दत्ता के मुताबिक ड्रिल के दौरान अधिकारियों से कहा गया है कि अस्पतालों को भी तैयार रखें। अस्पतालों को पता हो कि आपस पास के क्षेत्र में कौन से उद्योग कौन से रसायनों का इस्तेमाल कर रहे हैं और उन रसायनों से प्रभावित व्यक्ति का उपचार किस तरह का होगा।
बिना गैस मास्क के पहुंच कर बढ़ाया जोखिम
आपदा के दौरान कई राहत और बचाव कर्मी बिना गैस मास्क के ही घटना स्थल पर पहुंच गए। प्राधिकरण ने कर्मियों से स्पष्ट कहा कि आपदा में बचाव की बजाय खुद शिकार होने से बचें। हादसे केे हिसाब से खुद को सुरक्षित भी रखें।
गैर सरकारी संगठनों से मदद लेने का भी निर्देश
अधिकारियों से एनजीओ और स्थानीय स्तर पर सक्रिय अन्य संस्थाओं से भी मदद लेने को कहा गया। दत्ता के मुताबिक इन संगठनों के पास संसाधन होते हैं और इन्हें पता होता है कि कहां पर किस तरह से बेहतर मदद की जा सकती है।
मॉक ड्रिल में रुद्रप्रयाग के पास था भूकंप का केंद्र, 7.7 थी क्षमता
देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले के हल्द्वानी में सुबह 10.30 पर भूकंप महसूस किया गया। इन चारों जिलों में 40 स्थानों पर भोपाल गैस कांड की तरह का रसायनिक हादसा सामने आया। राज्य का आपातकालीन केंद्र सक्रिय हुआ। फिर भी कई स्थानों पर संबंधित पक्षों को 20 से लेकर 40 मिनट तक की देरी हुई।
सीएम ने भी लिया जायजा
दोपहर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी सचिवालय स्थित इमरजेंसी सेंटर में पहुंचे। सीएम ने यहां अधिकारियों से बात की और आपदा की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को बेहतर तरीके से काम को अंजाम देने के लिए बधाई दी और मुस्तैदी से काम करने को कहा।