उत्तराखंड: सूर्यधार झील परियोजना की लागत 14 करोड़ कैसे बढ़ी, होगी जांच
- निर्माण कार्य कर निरीक्षण कर सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने दिए आदेश
- निर्माण कार्य पर 41 करोड़ की धनराशि हो चुकी है खर्च
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ड्रीम प्रोजेक्ट सूर्यधार झील परियोजना की लागत एक ही साल में लगभग 14 करोड़ रुपये बढ़ गई है। परियोजना की लागत कैसे बढ़ी इसकी जांच का आदेश सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने दिया है। विभाग के प्रमुख अभियंता राकेश मोहन मामले की जांच करेंगे।
बृहस्पतिवार को सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने जाखन नदी पर निर्माणाधीन सूर्यधार झील के बैराज कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने परियोजना की लागत बढ़ाने पर नाराजगी जताते हुए जांच करने के आदेश दिए हैं। 50.24 करोड़ की लागत वाले इस परियोजना की अब लागत बढ़ा कर 64.12 करोड़ की गई है।
अब तक निर्माण कार्य पर 41 करोड़ की धनराशि खर्च हो चुकी है। महाराज ने कहा कि परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और प्लानिंग सही ढंग से नहीं बनाई गई। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद बैराज की लंबाई और चौथाई बढ़ाने की बात की जा रही है। जिससे जाहिर है कि डीपीआर बनाने में अधिकारियों की लापरवाही रही है।
सूर्यधार झील मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट
सूर्यधार झील मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है। सीएम ने स्वयं ही इस परियोजना को कम लागत में बनाने की घोषणा की है। जबकि मुख्यमंत्री कोई घोषणा करते हैं तो अधिकारियों को इसे कम लागत पर बनाना चाहिए। लेकिन एक साल में परियोजना की लागत को बढ़ा दिया गया है। इसकी लागत कैसे बढ़ी, मामले की पूरी जांच होगी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी और गुणवत्ता के निर्देश दिए।
18 गांवों के लोगों को मिलेगा पीने का पानी
सूर्यधार झील निर्माण से आसपास के 18 गांवों की 35 हजार आबादी को पीने का पानी मिलेगा। झील से दो क्यूसेक पानी पेयजल के लिए दिया जाएगा। वहीं, 12500 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
सूर्यधार झील बनने पर पर्यटकों को घूमने के लिए एक नया स्थान मिलेगा। बैराज के आसपास के क्षेत्रों को पर्यटन की दृष्टि से सौंदर्यीकरण किया जाएगा। बैराज के दोनों तरफ टेरेस और ग्लास हाउस, काटेज का निर्माण किया जाएगा। जिससे यहां आने वाले पर्यटक कुछ पल सुकून के बिता सकेंगे।