फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand High court stop Government order for five hectares Forest Area

पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्र वाले वनों को वन श्रेणी से बाहर रखने के आदेश पर  हाईकोर्ट की रोक

Fri, 28 Feb 2020 08:09 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 28 Feb 2020 08:09 PM IST
विज्ञापन
Uttarakhand High court stop Government order for five hectares Forest Area

उत्तराखंड में पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्र में फैले वनों को वन श्रेणी से बाहर रखे जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। वरिष्ठ न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 

विज्ञापन


प्रो. अजय रावत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने 19 फरवरी 2020 को एक नया आदेश जारी किया है, इसमें 5 हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाले वनों को वनों की श्रेणी से बाहर रखा गया है। इससे पूर्व भी सरकार ने 10 हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाले वनों को वन श्रेणी में नहीं माना था लेकिन सरकार ने आदेश में संशोधन कर 10 हेक्टयेर को 5 हेक्टेयर कर दिया। 
विज्ञापन


याचिकाकर्ता का कहना था कि फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट 1980 के तहत प्रदेश में 71 प्रतिशत वन क्षेत्र घोषित किया गया है। इसमें वनों की श्रेणी को विभाजित किया गया है लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जिन्हें किसी भी श्रेणी के तहत नहीं रखा गया है। याचिका में संबंधित क्षेत्रों को भी वन क्षेत्र की श्रेणी में शामिल किए जाने की मांग करते हुए कहा गया कि इनके दोहन और कटान पर रोक लगाई जा सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


 याचिकाकर्ता की ओर से कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के अपने आदेश में गोडा वर्मन बनाम केंद्र सरकार में कहा है कि किसी भी वन क्षेत्र को वन श्रेणी में रखा जाएगा। उसका मालिक कोई भी हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वनों का अर्थ क्षेत्रफल और घनत्व से नहीं है।

जहां भी 5 प्रतिशत क्षेत्र में पेड़ पौधे हैं, उनका घनत्व 10 प्रतिशत है तो उन्हें वनों की श्रेणी में रखा गया है। सरकार के इस आदेश पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार ने कहा है कि प्रदेश सरकार वनों की परिभाषा न बदले। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है।

हाईकोर्ट ने एसएसपी नैनीताल को दिए यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश

हाईकोर्ट ने वीआईपी दौरे के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से समय से पूर्व यातायात व्यवस्था रोकने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद एसएसपी नैनीताल को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कम समय के लिए यातायात को बाधित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।


हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. चंद्रशेखर जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि वीआईपी दौरे के दौरान पुलिस तथा प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था को कई घंटे बाधित किया जाता है। इसकी वजह से कई जरूरी कार्य प्रभावित हो जाते हैं। याचिका में कहा गया कि घंटों यातायात रोका जाना गलत है। याचिकाकर्ता की ओर से प्रार्थना की गई कि वह वीआईपी दौरे को ध्यान में रखते हुए कम से कम समय के लिए यातायात व्यवस्था को बाधित किया जाए। 


सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि देश में वीआईपी सेवा प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री को दी जाती है। उनकी सुरक्षा को देखते हुए दौरे के दौरान कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था को बाधित किया जाता है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कम समय के लिए यातायात व्यवस्था को बाधित करने के निर्देश देते हुए जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed