उत्तराखंड हाईकोर्ट: बीएएमएस के विद्यार्थियो को फीस मामले में राहत, दून विवि में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्ति को चुनौती
नैनीताल हाईकोर्ट ने आयुर्वेदिक कॉलेज की ओर से फीस में बढ़ोतरी किए जाने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद वहां अध्ययन विद्यार्थियों को राहत देते हुए फीस रेगुलेशन कमेटी की ओर से निर्धारित की गई फीस पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने विद्यार्थियों से कहा है कि तब तक वे 50 हजार रुपये के हिसाब से फीस जमा करें। आदेश के क्रम में संबंधित संस्थानों की ओर से फीस वापसी तथा और फीस लेने की कवायद की जाएगी।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज देहरादून के छात्र अदिल खान और अन्य तथा देवभूमि आयुर्वेदिक कॉलेज के छात्रों की ओर से इस मामले में याचिका दायर कर कहा था कि संबंधित आयुर्वेदिक संस्थानों की ओर से जारी शासनादेश के क्रम में विद्यार्थियों की फीस 80 हजार से बढ़ाकर 2.15 लाख रुपये कर दी है।
पूर्व में हाईकोर्ट ने रेगुलेशन कमेटी से फीस निर्धारण को कहा था। रेगुलेशन कमेटी ने 2019-20, 20-21 व 21-22 के लिए 2006 के एक्ट के तहत 2.15 लाख रुपये फीस निर्धारित की थी। कॉलेज प्रशासन की ओर से इसे पीछे से किए जाने के दबाव में कमेटी ने इसे 2017-18 से कर दिया। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने विद्यार्थियों को राहत देते हुए 50 हजार रुपये फीस जमा करने को कहा है।
दून विवि में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्ति को चुनौती
हाईकोर्ट ने दून विश्वविद्यालय में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त एमएस मन्दरवान के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दून विश्वविद्यालय प्रशासन, यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अगस्त की तिथि नियत की है।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति रवि मलिमथ एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार उक्रांद नेता और आरटीआई क्लब देहरादून के शांति प्रसाद भट्ट ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि दून विश्वविद्यालय में एमएस मन्दरवान की नियुक्ति 2010 में सहायक कुलसचिव के पद पर प्रतिनियुक्ति पर हुई थी लेकिन 2013 में उन्हें डिप्टी रजिस्ट्रार पद पर पदोन्नति दे दी गई और 2017 से वह कार्यवाहक कुलसचिव हैं।
याचिकाकर्ता ने जब सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मन्दरवान के शैक्षिक योग्यता की जानकारी मांगी तो वे इस पद के योग्य नहीं पाए गए। यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार कार्यवाहक कुलसचिव प्रोफेसर स्तर का व्यक्ति हो सकता है, जबकि मन्दरवान की प्रतिनियुक्ति क्लर्क पद से हुई है।
याचिका में कहा गया कि उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दून विवि प्रशासन और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अगस्त की तिथि नियत की।