फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand High Court gave instructions to government to build electric crematorium in all bodies of the stat

Uttarakhand: हाईकोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश, प्रदेश के सभी निकायों में विद्युत शवदाह गृह बनाएं

Thu, 25 Aug 2022 09:39 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 25 Aug 2022 09:39 PM IST
सार

ज्वालापुर हरिद्वार निवासी ईश्वर चंद्र वर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की कर कहा था कि कोरोना के समय हरिद्वार में शवदाह करने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रहीं थीं।

विज्ञापन
Uttarakhand High Court gave instructions to government to build electric crematorium in all bodies of the stat
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : PTI

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने राज्य सरकार को प्रदेश के सभी नगर निकायों में छह महीने के भीतर विद्युत शवदाह गृह बनाने के निर्देश दिए हैं। इसकी प्रगति रिपोर्ट हर माह कोर्ट में पेश करने के लिए भी कहा है। कोरोना से संबंधित विभिन्न समस्याओं को लेकर दायर की गईं जनहित याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को एक साथ सुनवाई करते हुए अदालत ने यह व्यवस्था दी। इसी के साथ लगभग 20 जनहित याचिकाओं का अंतिम रूप से निपटारा कर दिया गया है। 

विज्ञापन


ज्वालापुर हरिद्वार निवासी ईश्वर चंद्र वर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की कर कहा था कि कोरोना के समय हरिद्वार में शवदाह करने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रहीं थीं। श्मशान घाटों में शवों को अधजला छोड़ा जा रहा था। हरिद्वार के खड़खड़ी में यूपी सरकार ने 25 साल पहले शवदाह के लिए विद्युत शवदाह गृह लगाया था, उत्तराखंड सरकार ने अभी तक इसका संचालन नहीं किया है। दाह संस्कार सेवा समिति के कार्यकर्ता दुर्गेश पंजवानी का कहना था कि लकड़ी से दाह संस्कार करने में 2500 से लेकर 3000 रुपये तक का खर्चा आता है।
विज्ञापन


लकड़ियां नहीं मिलने पर कई लोग शव को नदी में बहा देते हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। यदि विद्युत शवदाह गृह संचालित किया जाता है तो एक शवदाह में मात्र पांच सौ रुपये खर्च आएगा और मात्र एक घंटे का समय लगेगा। लकड़ी से शवदाह करने में तीन से साढ़े तीन घंटे का समय लगता है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से प्रार्थना की थी कि प्रदेश की सभी नगरपालिकाओं में एक विद्युत शवदाह गृह बनाया जाए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

ये प्रमुख जनहित याचिकाएं हुईं निस्तारित

सुभाष तनेजा की ओर से दायर जनहित याचिका : इसमें कोविड के दौरान महिला पुलिस कर्मियों, गर्भवती और पांच वर्ष के कम उम्र के बच्चों वाली महिला कर्मियों से केवल कार्यालय का कार्य लिए जाने की प्रार्थना की थी। 


इन री-वैक्सीनेशन ऑफ वन रावत की याचिका:  इसमें कहा गया था कि वनरावत जनजाति का टीकाकरण किया जाना चाहिए। इस संबंध में सरकार की ओर से कहा गया कि वन रावत जनजाति की कुल जनसंख्या 68 के सापेक्ष वैक्सीनेशन के लिए अर्ह 37 व्यक्तियों को कोविड 19 टीके की पहली डोज लगाई जा चुकी है। भारत सरकार की गाइडलाइन के तहत इन सभी व्यक्तियों को दूसरी डोज निर्धारित समय में लगाई जाएगी। कोर्ट ने इस जनहित याचिका को भी निस्तारित कर दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed