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अफसर के लिए राजभवन से बैर कर बैठी उत्तराखंड सरकार

Tue, 22 Dec 2015 11:56 AM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 22 Dec 2015 11:56 AM IST
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uttarakhand government taken side of an officer.

उत्तराखंड सरकार ने एक छोटे अफसर के लिए राजभवन से बैर मोल ले लिया है। आयुर्वेद विवि के कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा को हटाने के लिए शासन व राजभवन के बीच खतोकिताबत का दौर जारी है।

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गलत नियुक्ति को लेकर मिश्रा राजभवन की आंख में खटक रहे है और शासन उन्हें बेहिसाब ओहदों से नवाजने पर तुला है। खास बात यह है कि 08.11.2013 को तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने मिश्रा की नियुक्ति निरस्त कर तीन महीने में नया पैनल बनाने के आदेश दिए, दो वर्ष बीत गए, लेकिन तीन महीने का समय आज तक पूरा नहीं हुआ।
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मृत्युंजय मिश्रा का भी अपना रसूख है, शासन ने एक्ट की अनदेखी करते हुए उन्हें जुलाई 2013 में कुलसचिव बना दिया और उनकी योग्यता पूरी करने के लिए सात महीने बाद विवि एक्ट में संशोधन किया। राजभवन का यही तर्क है, जिस दिन मिश्रा की नियुक्ति हुई, उस दिन वह पात्र नहीं थे।
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फाइल चालू हुई तो नवम्बर 2013 में तत्कालीन सीएम ने मिश्रा की नियुक्ति निरस्त कर नियमानुसार पैनल तैयार करने के आदेश दिए। इसी फाइल पर प्रमुख सचिव एस रामास्वामी ने लिखा कि संबंधित कुलपति ने मिश्रा की सत्यानिष्ठा प्रमाणित की है और उन्हें उत्कृष्ट श्रेणी का माना है।

विभागीय मंत्री ने भी सिफारिश की तो इसी दिन सीएम ने तीन माह की मोहलत दी और पैनल बनाने को कहा, लेकिन इस दिशा में कोई प्रयास करने के बजाय फाइल को ऊपर नीचे घुमाया जा रहा है। सरकार ना तो पुराने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के आदेश से सहमत है और ना ही महामहिम के एतराज से भयभीत है।

ऐसे बचाया जा रहा है मिश्रा को
नया पैनल बनाने की फाइल विगत 07 अक्तूबर 2015 को शुरू हुई। 08 अक्तूबर को फाइल कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को भेजी गई, मंत्री ने करीब एक महीना 12 दिन बाद 20 नवम्बर 2015 को फाइल सीएम को भेजी। सीएम ने फाइल को वार्ता लिखकर उसी दिन शासन को लौटा दिया। उसके बाद अभी तक कोई हलचल नहीं है।

तारीखों के आइने में विवाद की दास्तां
:- 08.11.2013 को तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने मिश्रा की नियुक्ति निरस्त कर समुचित प्रक्रिया केतहत तीन महीने में नया कुलसचिव नियुक्त होने तक मिश्रा को कामचलाऊ तौर पर रखने पर सहमति दी।
:- 09.06.2015 को राज्यपाल ने सीएम को पत्र लिख आयुर्वेद विवि एक्ट 2009 के अनुसार मिश्रा की नियुक्ति नहीं होने का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

:- जवाब नहीं मिलने पर राज्यपाल के सचिव ने 16.07.2015 को पुन: पत्र शासन को महामहिम के पत्र की याद दिलाते हुए जवाब मांगा।
:- 25.07.2015 को सीएम ने राज्यपाल को पत्र भेजकर मामले को समवर्ती सूची का बताते हुए मिश्रा की नियुक्ति को सही ठहराया।
:- 22.08.2015 के बाद 29.09.2015 को राज्यपाल के सचिव ने शासन को पत्र भेज कर कहा कि मिश्रा की नियुक्ति एक्ट में संशोधन से सात माह पहले की गई, इसलिए अवैध है।

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