Uttarakhand Election 2022: अतीत के आईने से, 1991 में बतौर योगी आदित्यनाथ ने किया था जमकर प्रचार
तब योगी आदित्यनाथ ने लैंसडौन विधानसभा सीट के विभिन्न हिस्सों में घूम-घूमकर भाजपा उम्मीदवार मोहन सिंह रावत के लिए वोट मांगे थे, हालांकि भाजपा को इस सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा था।
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भाजपा ने उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव के लिए अपने जिन स्टार प्रचारकों के नाम जाहिर किए हैं, उनमें एक प्रमुख नाम शामिल है योगी आदित्यनाथ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रमुख चेहरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूदा परिस्थितियों में उत्तराखंड के लिए कितना समय दे पाएंगे, यह सवाल अपनी जगह है।
मगर अतीत के आईने से निकलकर एक दिलचस्प घटना सामने है। वरिष्ठ पत्रकार विपिन बनियाल बताते हैं कि योगी आदित्यनाथ ने लैंसडौन विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार मोहन सिंह रावत को जिताने के लिए दिन-रात एक कर दिया था। हालांकि तब कोई नहीं जानता था कि एबीवीपी का एक सामान्य कार्यकर्ता अजय बिष्ट आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बन जाएगा।
Uttarakhand Election 2022: यूपी और बिहार की तरह अब उत्तराखंड में भी 'का बा' का शोर
भाजपा का एक ऐसा नेता बन जाएगा, जिसमें पूरी पार्टी अपनी भविष्य की संभावनाओं को भी देखने लगेगी। तब योगी आदित्यनाथ ने लैंसडौन विधानसभा सीट के विभिन्न हिस्सों में घूम-घूमकर भाजपा उम्मीदवार मोहन सिंह रावत के लिए वोट मांगे थे, हालांकि भाजपा को इस सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा था।
यह वर्ष 1991 था, जबकि लोकसभा के साथ ही उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव भी हो रहा था। पूरे माहौल में रामलहर का असर साफ महसूस किया जा रहा था। अविभाजित उत्तर प्रदेश में रहते हुए उत्तराखंड के हिस्से में तब सिर्फ 19 सीटें थीं। इनमें से एक सीट थी, लैंसडौन। हालांकि लैंसडौन विधानसभा सीट आज भी अस्तित्व में है, लेकिन तब इसका क्षेत्रफल काफी फैला हुआ था, जिसमें कोटद्वार और यमकेश्वर के क्षेत्र भी शामिल थे।
कुछ दिन पहले ही एबीवीपी से जुडे़ थे अजय बिष्ट
भाजपा ने तब लैंसडौन सीट के लिए मोहन सिंह रावत पर दांव लगाया। भाजपा के लिए प्रचार शुरू हुआ, तो संघ के सभी आनुषंगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी योगदान देना शुरू कर दिया।
यमकेश्वर से आकर कोटद्वार राजकीय महाविद्यालय में बीएससी की पढ़ाई करने वाले अजय बिष्ट तब कुछ दिन पहले ही एबीवीपी से जुडे़ थे। राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष विनोद रावत ने अजय बिष्ट को एबीवीपी से जोड़ा था। उस वक्त अजय बिष्ट कोटद्वार के गाड़ीघाट क्षेत्र में किराये के कमरे में रहा करते थे, जो कि विनोद रावत के घर से एकदम नजदीक था।
विनोद रावत बताते हैं कि अजय बिष्ट अक्सर उनके पास आकर बैठा करते थे। आरएसएस के साहित्य, पांचजन्य, ऑर्गनाइजर पत्र-पत्रिकाओं में काफी दिलचस्पी रखते थे। पढ़ने में काफी अच्छे और मेहनती थे। छात्र संगठन एबीवीपी से उन्हें जोड़ा गया, तो वह इसके सारे कार्यक्रमोें में रूचि लेने लगे थे। चुनाव में भी भाजपा के लिए खूब प्रचार किया।
लैंसडौन विधानसभा सीट पर भाजपा के टिकट के लिए बहुत जोर आजमाइश हुई थी। भाजपा नेता दिनेश चंद्र बलोधी भी टिकट की दौड़ में थे, लेकिन टिकट मोहन सिंह रावत को मिला, तो कोटद्वार में गोखले मार्ग स्थित पार्टी कार्यालय पर बलोधी समर्थक लोग पहुंच गए। यह लोग टिकट वितरण का विरोध करने लगे। विनोद रावत के अनुसार तब अजय बिष्ट इन लोगों से भिड़ गए थे।
उनका कहना था कि पार्टी ने जिसे टिकट दे दिया है, उसके साथ ही सभी को खड़ा होना चाहिए। रावत के मुताबिक-अजय बिष्ट ने न सिर्फ कोटद्वार नहीं, बल्कि अपने गृह क्षेत्र यमकेश्वर में भी कई-कई दिन तक भाजपा के लिए प्रचार किया था। फोकस लैंसडौन सीट पर मोहन सिंह रावत को जिताने पर था। गढ़वाल लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार भुवन चंद्र खंडूरी के लिए भी अजय बिष्ट ने वोट मांगे थे। इस चुनाव में कांग्रेस के भारत सिंह रावत ने जीत हासिल की थी, हालांकि गढ़वाल लोकसभा सीट पर भाजपा के भुवन चंद्र खंडूरी जीत गए थे।