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उत्तराखंड आपदा: हर मोर्चे पर देवदूत बनकर उतरे जवान, बचाई एक हजार लोगों की जान

Wed, 27 Oct 2021 10:56 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 27 Oct 2021 10:56 PM IST
सार

Uttarakhand Disaster: 17 अक्तूबर की शाम को मौसम का मिजाज बिगड़ने व राज्य में आपदा आने की संभावना की सूचना सेना को मिल गई थी। राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन ने भी सेना से समन्वय किया।

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Uttarakhand Disaster: Indian Army Soldiers save 1000 people Life during Flood
उत्तराखंड में आपदा के दौरान लोगों को पानी से निकालते जवान - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में बीती 18 व 19 अक्तूबर को आई आपदा में सेना के जवान देवदूत बनकर लोगों के बीच पहुंचे। इस दौरान सेना के जवानों ने प्रभावित इलाकों में करीब एक हजार लोगों की जान बचाई है। यही नहीं पिंडारी व सुंदरढूंगा ग्लेशियर में लापता हुए ट्रैकरों को सकुशल लाने के लिए रेस्क्यू अभियान भी चलाया। 

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यह जानकारी बुधवार को उत्तराखंड सब एरिया मुख्यालय के कर्नल (जनरल स्टाफ) समीर शर्मा ने मीडियाकर्मियों को दी। बताया कि बतौर नोडल आफिसर खुद उन्होंने भी आपदा प्रभावित इलाकों में मोर्चा संभाला था। कर्नल जीएस ने बताया कि 17 अक्तूबर की शाम को मौसम का मिजाज बिगड़ने व राज्य में आपदा आने की संभावना की सूचना सेना को मिल गई थी। राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन ने भी सेना से समन्वय किया। इसके बाद गढ़वाल व कुमाऊं मंडल में अलग-अलग स्थानों पर तैनात सेना की ब्रिगेड को अलर्ट मोड पर रखा गया। नैनीताल, रामगढ़, टनकपुर, ऊधमसिंहनगर आदि जगह आपदा का असर अधिक रहा।
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धारचूला स्थित पंचशूल ब्रिगेड व चौबटिया में तैनात सैन्य टुकड़ी को तत्काल प्रभाव से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मदद के लिए रवाना किया गया। अधिकांश स्थानों पर सड़कें पूरी तरह तबाह हो चुकी थी। पैदल चलने को भी रास्ता नहीं था। फिर भी जवानों ने हिम्मत नहीं हारी और प्रभावित इलाकों में पहुंचकर दिन- रात राहत व बचाव कार्य में जुटे रहे। गुलमर्ग स्थित हाई एल्टीट्यूट इंस्टीट्यूट से भी सेना की एक टीम बुलाई गई थी। एसडीआरएफ, पुलिस व स्थानीय प्रशासन से निरंतर समन्वय बनाकर फंसे हुए लोगों व पर्यटकों को सकुशल निकाला गया। जवानों ने इस दौरान कम से कम एक हजार लोगों की जान बचाई है। प्रभावित इलाकों में मेडिकल व भोजन की व्यवस्था भी सेना द्वारा की गई थी। सब एरिया के जनरल आफिसर कमांडिंग मेजर जनरल एस खत्री ने भी राहत व बचाव कार्य में जुटी रहे सेना के जवानों द्वारा किए गए कार्य की सराहना की है।

सीएसडी कैंटीनों की प्रक्रिया में बदलाव

सेना द्वारा संचालित की जाने वाली सीएसडी कैंटीनों में आने वाले दिनों में काफी बदलाव होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि सीएसडी कार्डधारक सैनिकों, पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों की सहूलियत के लिए डिजिटल प्लेटफार्म को प्रयुक्त करने पर जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में कार्डधारक वेबसाइट पर अपने सामान (ग्रोसरी) की अग्रिम बुकिंग कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में उन्हें सीएसडी कैंटीन में अधिक समय इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा भी उपलब्ध है। आगामी समय में सामान की ऑनलाइन बुकिंग के साथ ही सामान की होम डिलीवरी के फार्मूले पर भी काम किया जा रहा है।

आपदा में मरने वाला का आंकड़ा 77 पहुंचा
आपदा में मरने वाले लोगों का आंकड़ा 77 पहुंच गया है। हालांकि धरातल पर यह इससे कहीं अधिक बताया जा रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार आपदाग्रस्त जिलों में नैनीताल में सर्वाधिक 35 लोगों की मौत हुई है, जबकि पांच घायल हैं। अल्मोड़ा में छह मौतें, दो घायल, चंपावत में 11 मौतें, चार घायल, बागेश्वर में चार मौतें, यूएस नगर में दो मौतें, तीन घायल, पौड़ी में तीन मौतें, दो घायल, पिथौरागढ़ में तीन मौतें, दो घायल, चमोली में एक मौत, चार घायल और उत्तरकाशी में दस लोगों की मौत, जबकि दो लोग घायल हुए हैं।

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