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उत्तराखंडः करोड़ों की धांधली पर विभागों ने साधी चुप्पी, सरकारी खजाने को लगाई चपत

Fri, 22 Nov 2019 10:22 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 22 Nov 2019 10:22 AM IST
सार

  • देहरादून जिले में तीन विभागों ने लगाया था तीन करोड़ से ज्यादा का चूना 

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uttarakhand departments keep silent silence on fraud of crores
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

स्टांप शुल्क की वसूली में धांधली कर सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाने वाले सरकारी विभाग चुप्पी साधकर बैठ गए हैं। सरकार इन विभागों को गलती सुधारने का अल्टीमेटम दे चुकी है, लेकिन एक भी मामले में स्टांप शुल्क की वसूली नहीं हो पाई। जिले के तीन बड़े विभागों ने ही मानक से कम स्टांप शुल्क वसूलकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान किया था।

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मौजूदा वर्ष की शुरूआत में वित्तीय वर्ष 2017-18 की अवधि के स्टांप शुल्क वसूली के दस्तावेजों का निरीक्षण किया गया था। दस विभागों में किए गए इस निरीक्षण में विभागों का बड़ा खेल सामने आया। कई विभाग तो ऐसे निकले जहां 11 महीनों की अनुबंध के आधार पर ही सालों से दुकानों का आवंटन किया जा रहा था।
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जबकि, एक साल से ज्यादा अवधि के किसी भी भवन या निर्माण को लीज पर लेने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इस तरह करोड़ों रुपये की चपत सरकार को लगी। बीते जुलाई माह में इस संबंध में सरकार ने शासनादेश भी जारी कर दिया कि किसी भी लीज, ठेके आदि में निर्धारित सीमा में ही स्टांप ड्यूटी वसूलकर उसका रजिस्ट्रेशन कराया जाए।
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जबकि, वर्ष 2017-18 में वसूले गए कम स्टांप शुल्क के अंतर को लोगों से संपर्क कर वसूल किया जाए। विभागीय सूत्रों की मानें तो अभी तक किसी भी विभाग ने कोई वसूली नहीं की है। इस मामले में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व बीर सिंह बुदियाल ने बताया कि विभागाध्यक्षों से कहा गया था कि वे ड्यूटी के अंतर को वसूल करें। इस मामले में अब फॉलोअप किया जाएगा। 

ये हैं कुछ उदाहरण:

10 रुपये स्टांप पर दे दिया पट्टा, 50 लाख की चपत

कहानी खान अधिकारी कार्यालय की है। जांच हुई तो पता चला कि यहां एक पट्टे को अनंतकाल के लिए केवल 10 रुपये स्टांप पर ही दे दिया गया। जबकि, इस पट्टे का बाजारी मूल्य के आधार पर स्टांप शुल्क वसूला जाना था। इसी तरह के खेल इस विभाग में पकड़े गए, जिनमें 50,35052 रुपये का नुकसान राजस्व को पहुंचाया गया। 

एमडीडीए ने पार्किंग ठेके में दिया 21 लाख का झटका 

एमडीडीए ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में शहर में पार्किंग के ठेके दिए। कई ठेके बिना स्टांप के दिए गए और कई के लिए निर्धारित दर से बेहद कम स्टांप शुल्क वसूला गया। जबकि, एक साल से ज्यादा के ठेके में दो फीसदी स्टांप शुल्क वसूला जाना था। इस तरह एमडीडीए ने 21,81880 रुपये का चूना लगाया। 


बैंक गारंटी में हुआ खेल, 71 लाख का राजस्व नुकसान 

आबकारी विभाग में देसी विदेशी मदिरा की दुकानों के आवंटन में बड़े मूल्यों की बैंक गारंटी ली गई। लेकिन, स्टांप शुल्क नहीं लिया गया। जबकि, बैंक गारंटी पर .5 फीसदी (आधा प्रतिशत) स्टांप शुल्क लिया जाना था। इस तरह विभाग ने 71, 75475 रुपये का राजस्व नुकसान किया।

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