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दो पक्षों की लड़ाई में उत्तराखंड के क्रिकेटरों का नुकसान, जानिए कैसे

Tue, 19 Sep 2017 01:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून  
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून   Updated Tue, 19 Sep 2017 01:04 PM IST
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uttarakhand cricketers are helpless cause of two association fights
cricket

उत्तराखंड में एसोसिएशनों की लड़ाई में क्रिकेटरों का नुकसान हो रहा है। प्रदेश में काम कर रही दोनों प्रमुख एसोसिएशन एक मंच पर आने को तैयार नहीं हैं। दोनों एसोसिएशन खुद को असली और दूसरे को नकली बताकर नकार रही है। राज्य गठन के कुछ साल बाद से शुरू हुई यह लड़ाई आज भी बदस्तूर जारी है। दोनों एसोसिएशन क्रिकेट और क्रिकेटरों का भला करने का दावा करती है लेकिन पर्दे के पीछे का सच कुछ और है। 

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मान्यता प्राप्त एसोसिएशन को मिलने वाले अधिकारी, मेंबरशिप, वोटिंग राइट्स और कमाई को लेकर असली लड़ाई हो रही है। इस लड़ाई में राजनीतिक मोहरों का इस्तेमाल भी खुले तौर पर होता रहा है। दोनों एसोसिएशन लगातार आयोजनों से जुड़ी रही है, जिससे बड़ी संख्या में खिलाड़ी भी निकले हैं। लेकिन आपस में समन्वय न होने के कारण यहां से निकलने वाले खिलाड़ियों को अपने बेहतर भविष्य के लिए राज्य छोड़ने को मजबूर होना पड़ता है। 
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सीएयू के सचिव पीसी वर्मा का कहना है कि मान्यता का कोई कायदा-कानून होता है या नहीं। कोर्ट में दो लोग झगड़ रहे हैं तो क्या जज फैसला नहीं देगा। हम खिलाड़ियों के हित में सब कुछ करने को तैयार हैं। हम लगातार बातचीत भी कर रहे हैं लेकिन दूसरी एसोसिएशन सुनने को ही तैयार नहीं है। 2009 में बीसीसीआई ने दोनों प्रमुख एसोसिएशन से एक होने को कहा। तब भी हमने पहल की लेकिन कुछ नहीं हुआ। यूनाइटेड क्रिकेट एकेडमी और उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन को हमने अपनी एसोसिएशन से मर्ज किया है। हम खिलाड़ियों को लगातार खेलने के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। 
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उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव चंद्रकांत आर्य कहते हैं कि उत्तराखंड को 2008 में छत्तीसगढ़ और बिहार के साथ मान्यता मिलनी थी। तब कुछ राजनेताओं ने अपने स्वार्थ के चलते मान्यता नहीं होने दी। 2009 में मुंबई में अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इस पर चर्चा हुई। हमारी 13 जिलों की इकाईयां हैं, जिसमें 28 से 30 इवेंट्स आयोजित हो चुके हैं। हमने यूपीसीए से नहीं बीसीसीआई से मान्यता मांगी है। हम किसी से बातचीत नहीं करेंगे। हम नियमों से काम कर रहे हैं, दूसरी एसोसिएशन की तरह नहीं जहां बाप अध्यक्ष और बेटा व रिश्तेदार सचिव हो। हम राज्य में सबसे पुरानी बॉडी हैं, जो काम कर रही है। 

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