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सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की पत्नी ने सोशल एक्टिविस्ट पर किया केस, क्या है पूरा मामला जानिए...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 21 Jul 2018 09:46 AM IST
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सोशल एक्टिविस्ट सुुभाष शर्मा
- फोटो : file photo
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उत्तरा प्रकरण के बाद सीएम विरोधियों के निशाने पर आईं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की पत्नी सुनीता रावत ने शुक्रवार को पूर्व भाजपा नेता सुभाष शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
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शर्मा ने सोशल मीडिया और कई अन्य माध्यमों पर दावा किया था कि सुनीता को यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के रहमोकरम पर टीचर की नौकरी मिली थी। उनके शैक्षणिक दस्तावेज भी फर्जी हैं। शिकायत पर डालनवाला थाने की पुलिस ने शर्मा के खिलाफ कूटरचना, अपमानित करने और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर, मामले की जांच शुरू कर दी है।
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मुख्यमंत्री की पत्नी सुनीता रावत अजबपुर कलां प्राथमिक विद्यालय में अध्यापिका हैं। एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि सुनीता रावत बृहस्पतिवार देर रात करीब ग्यारह बजे डालनवाला थाने पहुंची थीं। उन्होंने यहां सुभाष शर्मा के खिलाफ लिखित तहरीर दी। तहरीर के मुताबिक सुनीता का आरोप है कि सुभाष शर्मा नामक एक व्यक्ति उनकी शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठा रहा है। वह इसके लिए कभी पत्रकार वार्ता कर रहा है तो कभी फेसबुक व अन्य सोशल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से इसका दुष्प्रचार कर रहा है। इसके लिए उसने एक बार 30 जून को और एक बार 18 जुलाई को पत्रकार वार्ता कर उनके बारे में यह दुष्प्रचार किया। सुनीता का कहना है कि सुभाष शर्मा उन्हें इंटरमीडिएट भी नहीं बता रहा है।
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साथ ही कह रहा है कि सुनीता को 1992 में नौकरी उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के दबाव में दी गई थी। इन सब बातों की कवरेज विभिन्न समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने की। इससे उनकी ख्याति को नुकसान पहुंचा है। साथ ही उनके सहयोगियों के बीच उनकी छवि को भी धक्का लगा और शिक्षा विभाग में माहौल खराब हो रहा है। सुनीता के अनुसार सुभाष शर्मा की यह सब बातें निराधार और तथ्यहीन हैं। एसएसपी ने बताया कि उनकी शिकायत पर डालनवाला थाने में सुभाष शर्मा के विरुद्ध आईपीसी 469 (ख्याति को नुकसान पहुंचाने के लिए कूटरचना करना) व 504 (अपमानजनक बातें कहना) और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच इंस्पेक्टर डालनवाला राजीव रौथाण को दी गई है।
उत्तरा प्रकरण के बाद सीएम की पत्नी आईं विरोधियों के निशाने पर
उत्तरा पंत बहुगुणा
- फोटो : amar ujala
सीएम के जनता दरबार में 28 जून को उत्तरकाशी के सरकारी विद्यालय में टीचर उत्तरा बहुगुणा के स्थानान्तरण के मसले में ऐसा विवाद हुआ कि वह मीडिया की सुर्खियां बन गया। उसी वक्त विरोधियों ने सीएम की पत्नी की शिक्षा विभाग में नौकरी, सुगम में तैनाती और शैक्षणिक दस्तावेज पर जमकर सवाल उठाए। जिसका सिलसिला अब तक नहीं थमा। भाजपा से निष्काषित सुभाष शर्मा ने फर्जी और अमान्य दस्तावेज पर नौकरी कर रहे शिक्षकों की जांच कर रही एसआईटी से भी इस बाबत शिकायत की थी। सोशलमीडिया पर पोस्ट डालने के अलावा सुभाष ने प्रेस कांफ्रेंस करके सीएम की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे।
मूल शैक्षणिक प्रमाण-पत्र आने चाहिए सामने
मैंने 18 जुलाई को मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ एक शिकायत की थी। यह शिकायत डीआईजी को की, जो शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच कर रहे हैं। मैंने शिकायती पत्र में मुख्यमंत्री का कोई जिक्र नहीं किया था। मैंने लिखा था कि इस स्कूल और इस नाम की एक शिक्षिका हैं, जिनके प्रमाण पत्र संदिग्ध हैं। इनकी भी जांच करके मुझे न्याय दें। उससे घबरा कर और मुझे दबाव में लेने के लिए एफआईआर दर्ज कर दी। एफआईआर में कहीं भी नहीं लिखा है कि उनके प्रमाण पत्र असली हैं। मैंने आज आईओ रौथाण को स्वयं फोन करके कहा है कि शिकायतकर्ता के असली प्रमाण पत्र की प्रति देखकर संतुष्ट हो जाएं। असली प्रमाण पत्र के बिना जांच पूरी नहीं होगी।
- सुभाष शर्मा, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट
क्या हो सकती है सजा
आईपीसी 469 और 504-तीन साल की सजा और जुर्माना। आईटी एक्ट 66- महिलाओं के संबंध में इस तरह के दुष्प्रचार करने में आईटी एकट 2009(संशोधित) की धारा 66ए के तहत आरोप बनता है। इसमें तीन साल की सजा और दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
मूल शैक्षणिक प्रमाण-पत्र आने चाहिए सामने
मैंने 18 जुलाई को मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ एक शिकायत की थी। यह शिकायत डीआईजी को की, जो शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच कर रहे हैं। मैंने शिकायती पत्र में मुख्यमंत्री का कोई जिक्र नहीं किया था। मैंने लिखा था कि इस स्कूल और इस नाम की एक शिक्षिका हैं, जिनके प्रमाण पत्र संदिग्ध हैं। इनकी भी जांच करके मुझे न्याय दें। उससे घबरा कर और मुझे दबाव में लेने के लिए एफआईआर दर्ज कर दी। एफआईआर में कहीं भी नहीं लिखा है कि उनके प्रमाण पत्र असली हैं। मैंने आज आईओ रौथाण को स्वयं फोन करके कहा है कि शिकायतकर्ता के असली प्रमाण पत्र की प्रति देखकर संतुष्ट हो जाएं। असली प्रमाण पत्र के बिना जांच पूरी नहीं होगी।
- सुभाष शर्मा, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट
क्या हो सकती है सजा
आईपीसी 469 और 504-तीन साल की सजा और जुर्माना। आईटी एक्ट 66- महिलाओं के संबंध में इस तरह के दुष्प्रचार करने में आईटी एकट 2009(संशोधित) की धारा 66ए के तहत आरोप बनता है। इसमें तीन साल की सजा और दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।