पिता की दुकान संभाली, मां का बंटाया हाथ, बनी टॉपर
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‘पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है, सपने उन्हीं के पूरे होते हैं, जिनके सपनों में जान होती है।’ उत्तराखंड बोर्ड 12वीं की परीक्षा में 95.2 फीसदी अंक लेकर प्रदेश की टॉपर बनी अंजलि रावत ने इन लाइनों को सार्थक कर दिखाया है।
बोर्ड परीक्षा के दौरान अंजलि ने सिर्फ पिता की गैरमौजूदगी में दुकान संभाला, बल्कि बीमार मां संग घर के काम-काज में हाथ बंटाया। तमाम मुश्किलों के बावजूद कड़ी मेहनत और लगन के बूते अंजलि ने सफलता का शिखर छुआ।
मूलरूप से डोब, टिहरी गढ़वाल निवासी विक्रम रावत और लक्ष्मी देवी की बेटी अंजलि दो भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। टिहरी डैम बनने के चलते रावत परिवार पथरी, हरिद्वार आकर रहने लगे। छह वर्ष पहले परिवार मुनिकीरेती ऊपरी ढालवाला में बस गया। अंजलि ऋषिकेश स्थित जयदेव प्रसाद उमादत्त कुड़ियाल सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में पढ़ती हैं।
पिता के न रहने पर संभालती है दुकान
पिता विक्रम ढालवाला में घर के पास परचून की दुकान चलाते हैं। परिवार के गुजारे के लिए वह एक फैक्ट्री में भी काम करते हैं। अभावों के बावजूद बेटी की यह सफलता परिवार के लिए सपनों सरीखी है। लाडली की कामयाबी पर दादा अव्वल सिंह, दादी कमली देवी, नानी सोना देवी, ताऊ जसपाल फूले नहीं समा रहे हैं।
वैज्ञानिक बनने की चाहत
12वीं में प्रदेश टॉप करने वाली अंजलि रसायन विज्ञान में शोध कर वैज्ञानिक बनना चाहती हैं। उन्होंने सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ गणित की शिक्षक रूपाली रावत सेनवाल को दिया है। बताया कि सटीक समय सारणी के जरिए विषय तैयार किए। रोजाना चार से पांच घंटे पढ़ाई की।
अंजलि को पढ़ाई के साथ बैडमिंटन खेलने और कंप्यूटर पर काम करने का शौक है। प्रधानाचार्य विजयलक्ष्मी बिष्ट ने अंजलि को बधाई देते हुए बताया कि अंजलि में सीखने की ललक है, जो उसे कामयाब बना रही है।
छलक आईं माता-पिता की आंखें
अंजलि के माता-पिता ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं। गरीबी में तमाम अभावों के बावजूद बेटी के टॉप करने की खबर सुनते ही माता-पिता की आंखें छलक गई। दोनों लाडली की सफलता पर बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
अंजलि की मार्कशीट
गणित- 99
अंग्रेजी- 98
हिंदी- 97
रसायन विज्ञान- 92
भौतिक विज्ञान-90
टॉपर के टिप्स
सभी विषयों पर फोकस करें।
अनावश्यक मानसिक दबाव न लें।
स्कूल के बाद घर पर रिविजन न भूलें।
समय सारणी बनाकर तैयारी करें।
कमजोर विषयों पर ज्यादा ध्यान दिया जाए।
असमंजस की स्थिति में शिक्षकों से परामर्श लें।
क्या कहती है अंजलि
बोर्ड परीक्षा के दौरान मैंने न सिर्फ पिता की गैरमौजूदगी में दुकान संभाली, बल्कि बीमार मां के साथ घर के कामकाज में हाथ भी बंटाया। तमाम मुश्किलें आईं, परिवार की आमदनी भी सीमित है। इसके बावजूद मैंने इसका प्रभाव अपनी पढ़ाई पर नहीं पड़ने दिया। प्रतिदिन चार से पांच घंटे पढ़ाई की।
-अंजलि रावत, 12वीं टॉपर, उत्तराखंड बोर्ड