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Uttarakhand Election 2022: पिता-पुत्र व पिता-पुत्री के चुनाव पर सबकी निगाहें, उतरी हैं तीन जोड़ियां

Mon, 07 Feb 2022 09:55 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 07 Feb 2022 09:55 AM IST
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uttarakhand assembly election 2022: this election All eyes on father-son and father-daughter fight
हरीश रावत और अनुपमा रावत - फोटो : सोशल मीडिया

उत्तराखंड के चुनावी इतिहास में पहली बार पिता पुत्र और पिता पुत्री की तीन जोड़ी समर हैं। सबकी निगाहें इन तीन जोड़ियों के चुनाव पर भी लगी है। यह भी पहली बार ही है कि एक विधानसभा सीट पर पति और पत्नी एक-दूसरे के आमने-सामने हैं।

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उत्तराखंड विधानसभा का चुनाव प्रचार अब परवान चढ़ने लगा है। इसके साथ ही प्रत्याशियों के दमखम को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। इन चर्चाओं के बीच चुनाव मैदान में उतरे कुछ चेहरे भी चर्चा का केंद्र बने हैं। ये चेहरे दरअसल चुनावी समर में उतरे पिता पुत्र और पिता पुत्री हैं। 
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2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्व कैबिनेट यशपाल आर्य और उनके पुत्र ने चुनाव लड़ा था। दोनों पिता-पुत्र भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। अब सियासी हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि 2022 के विधानसभा चुनाव का परिणाम क्या रहा है? 

2022 के विधानसभा चुनाव में उतरी पिता पुत्र की पहली जोड़ी यशपाल आर्य और संजीव आर्य की ही है। यशपाल आर्य कांग्रेस के टिकट पर बाजपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके बेटे संजीव आर्य को कांग्रेस ने नैनीताल से उम्मीदवार बनाया है। दूसरी जोड़ी हरीश रावत और अनुपमा रावत की है। हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है।

हरीश रावत खुद लालकुआं से मैदान में हैं। सबकी निगाहें पिता-पुत्री के चुनाव भी लगी है। तीसरी जोड़ी दिनेश धनई और कनक धनई की है। कनक हरीश रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे दिनेश धनई के पुत्र हैं। पिता-पुत्र उत्तराखंड जन एकता पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। कनक ने ऋषिकेश तो दिनेश टिहरी से ताल ठोकी है।  

कुछ प्रत्याशियों पर राजनीतिक विरासत बचाने का दबाव

2022 के चुनावी समर में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के कुछ प्रत्याशियों पर राजनीतिक विरासत को बचाने की चुनौती है। उनके टिकट में उनके राजनीतिक परिवार का चमक की खास भूमिका रही है। इनमें पहला नाम खानपुर सीट से विधायक पति कुंवर प्रणव चैंपियन के स्थान पर प्रत्याशी बनाई गई उनकी पत्नी कुंवरानी देवयानी हैं।

दूसरा नाम कद्दावर राजनीतिज्ञ स्व. डॉ. इंदिरा हृदयेश के सुपुत्र सुमित हृदयेश का है, जो अपनी माता की पारंपरिक सीट हल्द्वानी से ताल ठोक रहे हैं। काशीपुर से उतरे भाजपा के त्रिलोक सिंह चीमा भाजपा विधायक हरभजन सिंह चीमा के बेटे हैं। वह पिता की राजनीतिक विरासत को बरकरार रखने की चुनौती के दबाव में हैं। ठीक ऐसे ही दबाव में विधायक स्वर्गीय हरबंस कपूर की पत्नी सविता कपूर भी हैं, जिन्हें पार्टी ने देहरादून कैंट से मैदान में उतारा है।

पूर्व सीएम मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी की बेटी रितु खंडूड़ी चुनाव लड़ रही हैं। यमकेश्वर से टिकट काटने के बाद पार्टी उन्हें कोटद्वार सीट से उतारा है। काशीपुर से पूर्व सांसद नरेंद्र चंद सिंह कांग्रेस के उम्मीदवार बनाए गए हैं। कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की पुत्र वधू भी अपने ससुर की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की हसरत से समर में उतरी हैं और उन्हें भी कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है।

सोमेश्वर में पति-पत्नी एक-दूसरे के खिलाफ
पति और पत्नी के एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में होने से सोमेश्वर विधानसभा के चुनाव की भी चर्चा है। इस सीट पर मधुबाला ने निर्दलीय पर्चा भरा है, जबकि उनके पति बलवंत आर्या भी चुनाव मैदान में हैं। बलवंत आर्या को समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है।

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