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विधानसभा सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक: सत्ता पक्ष ने कहा कोविड को देखते हुए सहयोग करें

Sun, 20 Dec 2020 09:35 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 20 Dec 2020 09:35 PM IST
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Uttarakhand: All party meeting before Assembly Session 2020: Speaker Prem chandra agarwal told Option for support
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड विधानसभा सत्र से पहले आयोजित हुई सर्वदलीय बैठक इस बार भी औपचारिक ही अधिक रही। विधानसभा अध्यक्ष ने पक्ष-विपक्ष से सहयोग मांगा और कहा कि कोविड को देखते हुए सभी को सदन की कार्यवाही में सहयोग करना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार जन मुद्दों पर सदन में चर्चा कराएगी तो विपक्ष पूरा सहयोग देगा।

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विधानसभा में स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में स्पीकर ने कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए पक्ष और विपक्ष सदन को चलाने में सहयोग करे। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष की ओर से पूरा सहयोग किया जाएगा। इस हिसाब से यह बैठक औपचारिक ही अधिक रही। 
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नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने बैठक के बाद कहा कि हर बार यही कहा जाता है और विपक्ष भी यही आश्वासन देता है। नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक विपक्ष ने इस बार कहा है कि सरकार जनहित के मुद्दों को उठाने दे तो विपक्ष पूरा सहयोग करेगा। 
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कहा कि सरकार की मंशा सिर्फ अनुुपूरक बजट पास कराने की है। सर्वदलीय बैठक में संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, भाजपा विधायक खजान दास, विधानसभा प्रभारी मुकेश सिंघल सहित अन्य शामिल हुए।

सत्र से ठीक पहले सत्ता पक्ष ने विपक्ष के असंतोष को हवा दी

तीन दिन के सत्र से ठीक पहले सहयोग की गुहार कर रहे सत्ता पक्ष ने विपक्ष के असंतोष को भी हवा दी। कांग्रेस विधायक कार्यमंत्रणा के बहिष्कार तक का मन बना चुके थे, लेकिन नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के नरम रुख के कारण ये विधायक मन मसोस कर रह गए। विपक्ष की आपत्ति इस बात को लेकर है कि सरकार उन तमाम मुद्दों को सदन में न उठने देने का इंतजाम कर रही है जिनके लिए विपक्ष तैयारी कर रहा है। 

पक्ष और विपक्ष के बीच यह झगड़ा अनुदान मांगों को लेकर सामने आया। भाजपा ने हाल ही में सल्ट के विधायक सुरेंद्र जीना को खोया। जीना की गैरमौजूदगी को इस बार सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष भी महसूस कर रहा है। पूर्व वित्त मंत्री प्रकाश पंत के निधन के बाद आयोजित सत्र में भी यही हुआ था। उस समय सरकार पंत के निधन के निदेश को कार्यसूची में पहले नंबर पर लेकर आई थी। इस बार कार्यसूची में निधन का निदेश तीसरे नंबर पर है और इसके बाद अनुदान मांगों का सदन में प्रस्तुतिकरण है। विपक्ष का कहना है कि इससे यह साफ हुआ कि प्रश्नकाल नहीं होगा, लेकिन सरकार का अन्य बिजनेस अपनी जगह है। 

इसी को देखते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और चकराता विधायक प्रीतम सिंह, कांग्रेस दल के उपनेता करन माहरा की ओर से कार्यमंत्रणा का बहिष्कार करने का मन भी बनाया गया था। प्रीतम सिंह ने कार्यमंत्रणा के बाद इसे स्वीकार भी किया। कहा कि सरकार परंपराओं की अनदेखी कर रही है और कार्यमंत्रणा से वे बिल्कुल असहमत हैं। 
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि पहले दिन निधन के निदेश के बाद कोई भी सरकारी कार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार अगर अनुदान मांगों को सिर्फ सदन के पटल पर रख रही है तो यह कर ही सकती है। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने भी कहा कि अनुदान मांगों पर चर्चा और मांगों को पारित करने का काम 22 को ही किया जाएगा। प्रश्नकाल नहीं होगा। 

पहले दिन नहीं आ पाएंगे कार्यस्थगन प्रस्ताव

विपक्ष की शिकायत यह भी है कि पहले दिन निधन के निदेश के कारण कार्यस्थगन के प्रस्ताव भी नहीं आ पाएंगे। दूसरे दिन अनुपूरक मांग आएंगी और पारित भी हो जाएंगी। ऐसे में विपक्ष के पास चर्चा के लिए समय ही कितना बचेगा। 22 को विपक्ष कार्यस्थगन के प्रस्ताव लेकर आएगी लेकिन उसमें भी प्रस्ताव सीमित होंगे। 

सिर्फ नौ दिन का सदन
कांग्रेस विधायक दल के उपनेता करण माहरा के मुताबिक इस वर्ष इन तीन दिनों को मिलाकर कुल नौ दिन का सत्र चल पाएगा। ऐसें में विपक्ष के पास सवाल उठाने का समय ही कहा है। एक विधानसभा के सवाल भी पूरी तरह से नहीं उठ पाएंगे। 

हर सवाल का जवाब मिलेगा
स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल के मुताबिक हर विधायक को पूरा मौका दिया जाएगा, हर सवाल का जवाब मिलेगा। सत्र तीन दिन का है और 22 को कार्यमंत्रणा की बैठक में आगे की कार्यवाही तय होगी।

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