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उत्तराखंड: 28 लाख लोगों के लिए राहत की खबर, इमरजेंसी केस में 72 घंटे बाद जमा होंगे कागजात

Sat, 12 Oct 2019 09:35 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 12 Oct 2019 09:35 AM IST
सार

  • रोगी के पहुंचते ही सूचीबद्ध अस्पताल को शुरू करना होगा इलाज
  • कर्मचारी राज्य बीमा निगम की क्षेत्रीय परिषद की बैठक में लिए गए कई अहम फैसले

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Uttarakhand 28 lakh Employees And parents big Relief For Medical Emergency in ESIC
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के तहत पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिजनों को आपात स्थिति में इलाज से पहले कोई भी अस्पताल तत्काल कागजात की डिमांड नहीं कर सकेगा। रोगी अथवा उसके परिजनों को इस औपचारिकता को पूरा करने के लिए 72 घंटे का समय मिलेगा।

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यदि कोई सूचीबद्ध अस्पताल इलाज करने में आनाकानी करेगा, तो निगम उसके बकाया भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा देगा। यह निर्णय निगम की क्षेत्रीय परिषद की सातवीं बैठक में लिया गया। इससे पंजीकृत श्रमिकों व उनके परिजनों को मिलाकर करीब 28 लाख लोगों को राहत मिलेगी।
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परिषद के अध्यक्ष श्रम मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में श्रमिक हितों से संबंधित कई अहम फैसले लिए गए। देहरादून के एक होटल में आयोजित बोर्ड बैठक में जब एक सदस्य ने यह मामला उठाया तो श्रम मंत्री ने इसका समर्थन किया।
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उन्होंने कहा कि दुर्घटना की स्थिति में जरूरी नहीं कि निगम द्वारा संचालित अस्पताल खुला हो या आसपास हो। ऐसी स्थिति में हादसे के नजदीक के सूचीबद्ध अस्पताल में तत्काल इलाज की सुविधा होनी चाहिए।

पांच कर्मचारी वाले संस्थान भी ईएसआई के दायरे में

कई बार ऐसी शिकायतें आती हैं कि अस्पताल रोगी व उसके परिजनों को कागजातों की औपचारिकता में उलझा देते हैं, जिससे इलाज में देरी के कारण रोगी की जान को खतरा हो जाता है।

उन्होंने प्रस्ताव रखा कि इमरजेंसी मामलों में सूचीबद्ध अस्पताल रोगी का तत्काल इलाज शुरू करेंगे और इसकी सूचना निगम को देने की जिम्मेदारी भी अस्पताल प्रबंधन की होगी। इसके लिए निगम को वेबसाइट या एप्लीकेशन की मदद से ऑनलाइन सूचना दी जाए।

जो अस्पताल इसमें हीलाहवाली करेंगे, उनके बकाया बिलों का तत्काल प्रभाव से भुगतान रोक दिया जाए। उनके इस प्रस्ताव को बोर्ड ने सर्वसम्मति से अनुमोदित कर दिया। उन्होंने निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस संबंध में सभी सूचीबद्ध अस्पतालों, निगम के अस्पतालों और राज्य सरकार को पत्र जारी कर सूचित कर दें। बैठक में अपर सचिव उमेश नारायण पांडे, निगम के क्षेत्रीय निदेशक मोहम्मद इरफान और बोर्ड के अन्य सदस्य उपस्थित थे। बैठक का संचालन रवि चंद्रा ने किया।

प्रदेश में वे संस्थान भी अब कर्मचारी राज्य बीमा निगम के दायरे में आ जाएंगे, जहां पांच कर्मचारी हैं। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए 10 से 20 बेड के अस्पतालों को ईएसआई के तहत सूचीबद्ध किया जाएगा। ये निर्णय भी बोर्ड बैठक में लिए गए। इसके अलावा स्वैच्छिक ईएसआई के लिए भी प्रोत्साहन देने का फैसला हुआ।

बैठक में लिए गए अहम फैसले

- कोटद्वार में राज्य कर्मचारी बीमा निगम 300 बेड का सुपर स्पेशल अस्पताल बनाएगा।
- स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम के ढांचे का पुनर्गठन होगा।
- एसएसओ, सहायक, यूडीसी, एलडीसी, एमटीएस समेत अन्य संवर्गों के पद होंगे सृजित।
- 100 बेड के अस्पताल के लिए सेलाकुई में सिडकुल से भूखंड की मांग की जाएगी।
- हरिद्वार में 100 बेड के अस्पताल का निर्माण 18 महीने में पूरा किया जाएगा।
- रुद्रपुर में रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी के मद्देनजर निगम अतिरिक्त अस्पताल खोलेगा।
- रुद्रपुर में 50 बेड का अस्पताल तीन महीने में शुरू करने का लिया गया फैसला।
- हर जिले में ईएसआई अस्पताल स्थापित करने के लिए डीएम से भूमि की मांग की जाएगी।
- अस्पताल के साथ ही पैथोलॉजी लैब की भी मिलेगी सुविधा, आउटसोर्स से रखेंगे स्टाफ।
- अस्पताल और क्लीनिक ऑनलाइन जुड़ेंगे और एप्लीकेशन के माध्यम से अपडेट जारी होगा।

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