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23 साल: तीसरी बार, न्याय की गुहार; पहले आरोप लगने पर हरक ने इस्तीफा दिया, सीबीआई जांच में हुए थे बरी

Sun, 08 Nov 2026 10:38 AM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 08 Nov 2026 10:38 AM IST
सार

उत्तराखंड की राजनीति में वर्ष 2003 में सामने आया जेनी प्रकरण राज्य के गठन के शुरुआती वर्षों का सबसे चर्चित और विवादित राजनीतिक-सामाजिक मामला रहा है।

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Uttarakhand 23 years plea for justice for third time Harak had resigned wheninitial allegations were made
हरक सिंह रावत - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उत्तराखंड की सियासत में जेनी तीसरी बार न्याय की गुहार लगाने पहुंची है। पहली बार की सीबीआई जांच में हरक को क्लीन चिट मिलने के बाद 2016 में जेनी बयान से पलट गई थी। अब सीबीआई जांच से असंतुष्ट जेनी ने फिर मामले की जांच की मांग की है।

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उत्तराखंड की राजनीति में वर्ष 2003 में सामने आया जेनी प्रकरण राज्य के गठन के शुरुआती वर्षों का सबसे चर्चित और विवादित राजनीतिक-सामाजिक मामला रहा है। 2003 में एनडी तिवारी सरकार में हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री थे। असम की रहने वाली अविवाहित युवती जेनी ने आरोप लगाया था कि उसके बच्चे के जैविक पिता हरक सिंह रावत हैं। उन्होंने ही मेरा यौन शोषण किया है। 18 जून 2003 के विपक्षी भाजपा ने इस मुद्दे को उत्तराखंड विधानसभा में जोर-शोर से उठाया। बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच हरक ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया। विधानसभा में भावुक होकर कहा था कि जब तक वे बेदाग साबित नहीं होंगे, सदन में कदम नहीं रखेंगे। उन्होंने इसे अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं और विपक्ष की सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया था।
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सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट
तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की। जुलाई 2003 में सीबीआई ने मामले में औपचारिक मुकदमा दर्ज किया। सीबीआई जांच के दौरान बच्चे और हरक सिंह रावत का डीएनए परीक्षण कराया गया। जांच रिपोर्ट में बच्चे का डीएनए हरक के डीएनए से मेल नहीं खाया। इस आधार पर अदालत और सीबीआई ने हरक को क्लीन चिट दे दी। इसके बाद मामला तब उलझ गया, जब जेनी ने अपने बयानों में बदलाव किया।

2016 में दिल्ली में दूसरी बार लगाई थी गुहार
29 जुलाई 2016 को हरक सिंह रावत के खिलाफ दुष्कर्म की प्राथमिकी दर्ज हुई। शिकायतकर्ता असम की रहने वाली महिला थी। तीन अगस्त 2016 को महिला ने अपने बयान में आरोपों से पलटते हुए हरक को क्लीन चिट दे दी। उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके सहयोगियों पर दबाव डालकर शिकायत करवाने का आरोप लगाया। बाद में पुलिस को महिला का पता गलत मिला और उसका मोबाइल बंद था। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि 2016 में शिकायतकर्ता ने खुद कहा था कि उसने 2003 में भी हरक सिंह रावत के खिलाफ शिकायत की थी। उस समय उसके बच्चे के पितृत्व का मामला उठा था। अब जेनी ने तीसरी बार न्याय की गुहार लगाई है।

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