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Unlock 5.0 in Uttarakhand : आयोजनों में 200 लोगों की अनुमति मिलने से जगी रामलीला मंचन की संभावना

Sat, 03 Oct 2020 12:18 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 03 Oct 2020 12:18 PM IST
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Unlock 5.0 Guidelines in Uttarakhand News: possibility of Ramlila manchan starts
प्रतीकात्मक तस्वीर

धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में 200 लोगों की अनुमति मिलने पर एक बार फिर से रामलीला मंचन की संभावना जगी है। हालांकि रामलीलाओं का मंचन होगा, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। इसके लिए शासन संस्कृति विभाग को अलग से एसओपी जारी करने के लिए कह सकता है। रामलीला कमेटियों को भी प्रशासन की एसओपी का इंतजार है।

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राजनीतिक दल भी रामलीला मंचन के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि अब जबकि सरकार ने सब कुछ खोल दिया है, केंद्र और राज्य की गाइडलाइन के दायरे में रामलीला के मंचन को अनुमति देने में क्या हर्ज है? उधर रामलीला कमेटियों से जुड़े लोग मंचन तो चाहते हैं लेकिन यह भी कहते हैं कि होईहे सोई जो राम रचि राखा...।   
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पर्वतीय और आदर्श रामलीला कमेटियां आयोजन की तैयारियों में जुटीं

राजधानी देहरादून में 152 साल से रामलीला का मंचन करती आ रही रामलीला कला समिति (झंडा मोहल्ला) के अध्यक्ष अरविंद गोयल का कहना है कि उनकी रामलीला में कलाकार वृंदावन से आते हैं। बाहर के कलाकार लाना सुरक्षित नहीं है। इसमें सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। ऐसे में आयोजन मुश्किल लग रहा है। रामलीला कमेटी हकीकतनगर ने भी आयोजन रद्द करने का फैसला किया है। पर्वतीय रामलीला कमेटी धर्मपुर आयोजन पर विचार कर रही है। श्री आदर्श रामलीला सभा राजपुर ने भी रामलीला का कार्यक्रम तय कर लिया है।
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ऋषिकेश: बनखंडी की रामलीला 17 से

यहां बनखंडी की रामलीला 17 अक्तूबर से शुरू होगी। श्रीरामलीला कमेटी सुभाष बनखंडी के महासचिव हरीश तिवाड़ी ने बताया कि इस बार रामलीला 17 से 25 अक्तूबर तक नौ दिन की होगी, जबकि अन्य वर्षों में रामलीला 12 से 13 दिन की होती थी। 

हरिद्वार/रुड़की : कई रामलीला समितियों को सरकारी दिशा-निर्देश की प्रतीक्षा

हरिद्वार/रुड़की। रामलीला समितियों को प्रशासन की एसओपी (दिशा निर्देश) का इंतजार है। हरिद्वार रामलीला समिति के पदाधिकारी डॉ. संदीप कपूर ने कहा कि प्रशासन की गाइडलाइन के बाद रामलीला मंचन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। वहीं, रामनगर रामलीला समिति के पदाधिकारी गुलशन बजरंगी ने बताया कि प्रशासन की एसओपी जारी होने के बाद ही रामलीला मंचन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

रुड़की में 100 वर्ष से लगातार श्री रामलीला का आयोजन कर रही श्री रामलीला बीटी गंज समिति के महासचिव सौरभ सिंघल ने कहा कि समिति अब इस परंपरा को जारी रखने की कोशिश में जुट गई है। इधर, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामी बंसल ने कहा कि अब धार्मिक कार्यों पर किसी तरह की रोक नहीं है। रामलीला समितियां अनुमति मांगती हैं तो शर्तों के तहत उन्हें अनुमति दी जाएगी।

रामलीलाएं हों पर नियम कायदे न टूटें: भाजपा

भाजपा का कहना है कि रामलीला मंचन हो तो उसमें नियम-कायदे नहीं टूटने चाहिए। सीमित संख्या में आयोजन की अनुमति दी जा सकती है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष व प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. देवेंद्र भसीन कहते हैं ‘जान है तो जहान है’। सबसे ज्यादा जरूरी लोगों का स्वास्थ्य और जीवन है। अनलॉक पांच में सरकार ने रियायतें दी हैं, लेकिन उनमें कुछ शर्तें भी शामिल हैं। हर हाल में केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन का पालन होना चाहिए।

नियमों के पालन के साथ हों रामलीलाएं : आप

आम आदमी पार्टी के प्रधएश अध्यक्ष एसएस कलेर का कहना है कि रामलीला, भगवान राम से जुड़े करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। रामलीला शुरू हो , लेकिन सरकार को जनता को पूरी सुरक्षा का विश्वास दिलाना पड़ेगा। यहां भी सोशल डिस्टेंस, सैनिटाइजेशन और तमाम उन गाइडलाइंस का अनुसरण किया जाए जो कोविड को लेकर रखे गए हैं। बाकी सरकार की जिम्मेदारी हर उस परिवार को लेकर है जो परेशान है।

दो-दो सौ का ब्लाक बनाकर कराई जाए रामलीला : हरीश रावत

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, पंजाब के प्रभारी और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि रामलीला का मंचन अवश्य होना चाहिए। मंचन में आने वाली भीड़ को रोका नहीं जा सकता। रामलीला कमेटियों को चाहिए कि दो-दो सौ के ब्लाक बनाकर लोगों को रामलीला मंचन देखने के लिए आने दिया जाए। पुलिस और रामलीला कमेटी सामाजिक दूरी का पालन कराएं। ब्लाक बनाकर ऐसा करना संभव है।

अल्मोड़ा : कर्नाटकखोला में होगी वर्चुअल रामलीला

कोरोना महामारी को देखते हुए अल्मोड़ा में कर्नाटकखोला में ही वर्चुअल रामलीला का आयोजन किया जाएगा, बाकी जगह रामलीला नहीं होगी। रावण का पुतला बनाया जाएगा, जिसे दशहरा के दिन माल रोड में टैक्सी स्टैंड के निकट जलाया जाएगा। इसमें भी आम लोगों की भागीदारी नहीं होगी। 

ऊंचापुल रामलीला के ‘दशरथ’ नासाज,  इस बार नहीं निभाएंगे किरदार

रामलीला के मंचन को अनुमति मिलने पर सस्पेंस है। लेकिन सस्पेंस हल्द्वानी के ऊंचापुल की रामलीला के दशरथ को लेकर भी है। कोरोना संक्रमण के कारण दशरथ नासाज हैं। आवाज बेशक अब भी उतनी ही खनकदार है, लेकिन संक्रमण के कारण काया कुछ कमजोर हो चुकी है। यहां जिक्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का हो रहा है।

भगत हाल ही में कोरोना से जंग जीते हैं। राजनीति में सक्रिय भी हो चुके हैं। लेकिन अब उन्हें स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाने के लिए खास एहतियात बरतनी पड़ रही है। राजनीति के साथ भगत की हल्द्वानी की रामलीला में अलग अलग चरित्र निभाने को लेकर भी ख्याति है। रामलीला से उनका अटूट रिश्ता है। वे पिछले चार दशक से लगातार रामलीला में कोई न कोई किरदार निभाते आ रहे। पिछले करीब 25 साल से वह दशरथ का चरित्र निभा रहे हैं।

श्री ग्रामीण रामलीला कमेटी से जुड़ा करीब 100 लोगों के परिवार के लिए वह आज दशरथ हैं। भगत कहते हैं, उम्र के साथ मेरे चरित्र बदलते गए। कभी मैं अंगद बना, फिर परशुराम बना और अब दशरथ का पाठ करता हूं। बढ़ती उम्र के साथ उनके चरित्र भी बदलते गए। अब वह दशरथ का पर्याय बन चुके हैं।

मगर इस बार रामलीला के आयोजन पर ही संदेह कि वह होगी कि नहीं। भगत कहते हैं, यदि आयोजन होता है तो वह शायद ही दशरथ का चरित्र निभा पाएं। इसकी वजह कोरोना है, जिसकी चपेट में वह पिछले दिनों आए। बेशक वे कोरोना से जंग जीत चुके हैं, लेकिन संवाद बोलने के लिए जितनी ताकत चाहिए, उतनी अभी नहीं है।

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