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Uniform Civil Code: उत्तराखंड में कई दशक बाद धरातल पर उतरा UCC, जानें इतिहास और कानून बनने तक का सफर
Mon, 27 Jan 2025 01:16 PM IST
अलका त्यागी
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Mon, 27 Jan 2025 01:16 PM IST
सार
समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी आज से उत्तराखंड में लागू हो गया है। यूसीसी उत्तराखंड में कई दशकों के बाद धरातल पर उतरा है। जानिए इसकी पूरी कहानी...
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यूसीसी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कई दशक बाद समान नागरिक संहिता (यूसीसी) धरातल पर उतरा है। आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में यूसीसी के पोर्टल और नियमावली का लोकार्पण किया। इसी के साथ समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया।
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समान नागरिक संहिता की कानूनी जंग लड़ने वाले अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय का कहना है कि उत्तराखंड में यह ऐतिहासिक काम है। यह देश के लिए नजीर बनेगा और संविधान निर्माता यही चाहते थे। आइए जानते हैं यूसीसी का इतिहास कैसा रहा...
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- 1962 में जनसंघ ने हिंदू मैरिज एक्ट और हिंदू उत्तराधिकार विधेयक वापस लेने की बात कही। इसके बाद जनसंघ ने 1967 के उत्तराधिकार और गोद लेने के लिए एक समान कानून की वकालत की।
- 1971 में भी वादा दोहराया। हालांकि 1977 और 1980 में इस मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई।
- -1980 में भाजपा का गठन हुआ। भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी बने। पार्टी ने 1984 में पहली बार चुनाव लड़ा, जिसमें केवल दो सीटें मिली।
- 1989 में 9वां लोकसभा चुनाव हुआ, जिसमें भाजपा ने राम मंदिर, यूनिफॉर्म सिविल कोड को अपने चुनावी घोषणा-पत्र में शामिल किया। पार्टी की सीटों की संख्या बढ़कर 85 पहुंची।
- 1991 में देश में 10वां मध्यावधि चुनाव हुआ। इस बार भाजपा को और लाभ हुआ। उसकी सीटों की संख्या बढ़कर 100 के पार हो गई। इन लोकसभा चुनावों में भाजपा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड, राम मंदिर, अनुच्छेद 370 के मुद्दों को जमकर उठाया। ये सभी मुद्दे बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में शामिल थे, मगर संख्या बल के कारण ये पूरे नहीं हो पाए थे।
- इसके बाद 1996 में भाजपा ने 13 दिन के लिए सरकार बनाई। 1998 में पार्टी ने 13 महीने सरकार चलाई। 1999 में बीजेपी ने अपने सहयोगियों के साथ बहुमत से सरकार बनाई। तब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने।
- वर्ष 2014 में पहली बार भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई और केंद्र में मोदी सरकार आई। मोदी सरकार ने पूरे जोर-शोर से अपने चुनावी वादों पर काम करना शुरू किया।
घोषणा से कानून बनने तक का सफर
- 12 फरवरी 2022 को विस चुनाव के दौरान सीएम धामी ने यूसीसी की घोषणा की।
- मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में यूसीसी लाए जाने पर फैसला।
- मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति बनी।
- समिति ने 20 लाख सुझाव ऑफलाइन और ऑनलाइन प्राप्त किए।
- 2.50 लाख लोगों से समिति ने सीधा संवाद किया।
- 02 फरवरी 2024 को विशेषज्ञ समिति ने ड्राफ्ट रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी।
- 06 फरवरी को विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश हुआ।
- 07 फरवरी को विधेयक विधानसभा से पारित हुआ।
- राजभवन ने विधेयक को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेजा।
- 11 मार्च को राष्ट्रपति ने यूसीसी विधेयक को अपनी मंजूरी दी।
- यूसीसी कानून के नियम बनाने के लिए एक समिति का गठन।
- नियमावली एवं क्रियान्वयन समिति ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों संस्करणों में आज 18 अक्तूबर 2024 को राज्य सरकार को नियमावली साैंपी।
- 20 जनवरी 2025 को नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिली।