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Dehradun News: पैथोलॉजी जांच के लिए चक्कर काटते हैं मरीज
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दो लैब होने के बावजूद उप जिला अस्पताल में दो बजे के बाद नहीं हो रही जांच
मजबूरी में लोग बाहर कराते हैं जांच
जिला अस्पताल में सरकारी और पीपीपी मोड पर दो पैथोलॉजी लैब संचालित की जा रही है। बावजूद इसके दोपहर दो बजे के बाद मरीजों की पैथोलॉजी जांच नहीं हो पा रही है। मरीजों को जांच के लिए अगले दिन आना पड़ रहा है या मजबूरी में बाहर निजी लैब से जांच करवानी पड़ रही है।
उप जिला अस्पताल में एक सरकारी और एक पीपीपी मोड पर संचालित चंदन पैथोलॉजी लैब है। अस्पताल की दैनिक ओपीडी करीब 450 से 500 है। ओपीडी में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों को देखते हुए चिकित्सकों को भी समय लग जाता है। कई बार चिकित्सक मरीजों को एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच एक साथ लिखते हैं।
अन्य जांच करवाने के बाद मरीजों का जब पैथोलॉजी जांच का नंबर आता है, तब तक दोनों लैब बंद हो जाती है। मरीज को अगले दिन जांच के लिए सैंपल देने और फिर दूसरे दिन रिपोर्ट लेने और चिकित्सक को दिखाने आना पड़ता है।
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वहीं ओपीडी की निर्धारित अवधि के अंतिम समय में भी चिकित्सक मरीजों को पैथोलॉजी जांच लिखते हैं। मरीज पैथोलॉजी लैब में जाते है तो दोपहर दो बजे के बाद उनको बाहर ताला टंगा मिलता है। इमरजेंसी में भी आने वाले मरीजों की पैथोलॉजी जांच अगले दिन होती है।
वर्जन
पैथोलॉजी में दो लैब तकनीशियन ही हैं। एक स्थाई और दूसरा संविदा पर तैनात है। मरीजों का अत्यधिक दबाव है। ऊपर से डेंगू की रैपिड जांच भी हो रही है। ऐसे में दो बजे के बाद पैथोलॉजी लैब का संचालन असंभव है। कर्मचारियों की संख्या बढ़ती है तो दो शिफ्टों में लैब संचालित की जाएगी। - डॉ. विजय कुमार, चिकित्सा अध्यीक्षक, उप जिला अस्पताल
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मजबूरी में लोग बाहर कराते हैं जांच
जिला अस्पताल में सरकारी और पीपीपी मोड पर दो पैथोलॉजी लैब संचालित की जा रही है। बावजूद इसके दोपहर दो बजे के बाद मरीजों की पैथोलॉजी जांच नहीं हो पा रही है। मरीजों को जांच के लिए अगले दिन आना पड़ रहा है या मजबूरी में बाहर निजी लैब से जांच करवानी पड़ रही है।
उप जिला अस्पताल में एक सरकारी और एक पीपीपी मोड पर संचालित चंदन पैथोलॉजी लैब है। अस्पताल की दैनिक ओपीडी करीब 450 से 500 है। ओपीडी में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों को देखते हुए चिकित्सकों को भी समय लग जाता है। कई बार चिकित्सक मरीजों को एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जांच एक साथ लिखते हैं।
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अन्य जांच करवाने के बाद मरीजों का जब पैथोलॉजी जांच का नंबर आता है, तब तक दोनों लैब बंद हो जाती है। मरीज को अगले दिन जांच के लिए सैंपल देने और फिर दूसरे दिन रिपोर्ट लेने और चिकित्सक को दिखाने आना पड़ता है।
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वहीं ओपीडी की निर्धारित अवधि के अंतिम समय में भी चिकित्सक मरीजों को पैथोलॉजी जांच लिखते हैं। मरीज पैथोलॉजी लैब में जाते है तो दोपहर दो बजे के बाद उनको बाहर ताला टंगा मिलता है। इमरजेंसी में भी आने वाले मरीजों की पैथोलॉजी जांच अगले दिन होती है।
वर्जन
पैथोलॉजी में दो लैब तकनीशियन ही हैं। एक स्थाई और दूसरा संविदा पर तैनात है। मरीजों का अत्यधिक दबाव है। ऊपर से डेंगू की रैपिड जांच भी हो रही है। ऐसे में दो बजे के बाद पैथोलॉजी लैब का संचालन असंभव है। कर्मचारियों की संख्या बढ़ती है तो दो शिफ्टों में लैब संचालित की जाएगी। - डॉ. विजय कुमार, चिकित्सा अध्यीक्षक, उप जिला अस्पताल