गहनों के खातिर महिला को बेरहमी से उतारा था मौत के घाट, कोर्ट ने दो हत्यारों को सुनाई सजा-ए-मौत
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अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायाधीश की अदालत ने लिस्वाल्टा गांव की सरोजनी देवी हत्याकांड में दो अभियुक्तों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा दी है, जबकि अन्य दो को तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है। सभी अभियुक्तों को पुलिस अभिरक्षा में पुरसाड़ी जेल भेज दिया गया है।
मंगलवार को दोपहर अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश भारत भूषण पांडेय ने अभियुक्त मुकेश थपलियाल पुत्र गीताराम थपलियाल निवासी ग्राम जयंती तहसील जखोली और सत्येश उर्फ सोनू पुत्र दिल्लू लाल, निवासी कोटली, थाना थराली जिला चमोली को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत फांसी दी। साथ ही दोनों अभियुक्तों को धारा 392, 201 के तहत भी दोषी पाते हुए 10-10 वर्ष का कारावास व पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी।
इसके अलावा न्यायाधीश ने लूटा हुआ सामान खरीदने वाले अवधेश शाह पुत्र देवेंद्र शाह एवं राजेश रस्तोगी पुत्र रमेश रस्तोगी, कर्णप्रयाग (चमोली) को भादंसं 411 के तहत दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष की कैद व पांच हजार अर्थदंड लगाया। न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जिस तरह से दोनों अभियुक्तों ने महिला की निर्दयता से हत्या की, वह जघन्य अपराध है।
इसके लिए फांसी से कम कोई सजा नहीं हो सकती। कहा घर में घुसकर हत्या कर शव को दबाते हुए लूटपाट करना मानवता को शर्मसार करने वाला है। सजा सुनाते ही चारों दोषियों को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामले में सरकार की ओर से प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुदर्शन सिंह चौधरी ने पैरवी की।
कुंडली के बहाने गए थे महिला के घर में अभियुक्त
4 अप्रैल 2017 की रात को मुकेश थपलियाल व सत्येश सरोजनी देवी के घर लड़की की कुंडली लेने के बहाने लूटपाट के लिए गए थे। दोनों अभियुक्तों ने महिला की बर्बरता से हत्या कर उसके शव को मकान के पीछे खेत में दबा दिया और जेवर लेकर फरार हो गए। पांच अप्रैल को महिला का देर शाम तक पता नहीं चलने पर ग्रामीणों ने खोजबीन की। इस दौरान राजस्व पुलिस को सूचना दी गई। 6 अप्रैल की तड़के महिला का शव घर के पीछे खेत में मिला।
कॉल डिटेल से पकड़ा अभियुक्त
मृतका सरोजनी के बेटे विजय सिंह की ओर से अज्ञात के खिलाफ राजस्व पुलिस में मामला दर्ज कराया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम द्वारा केस को रेगुलर पुलिस को सौंपा गया। इसके बाद हुई जांच में एसपी पीएन मीणा के नेतृत्व में पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर अभियुक्तों को पकड़ा। विवेचना के तहत हत्या और लूट का सामान खरीदने वाले आरोपियों को जेल भेजा गया। मुकेश थपलियाल पहले ही जयंती गांव की विमला देवी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा भी काट रहा है।
फांसी सजा का पहला मामला
वर्ष 1997 में जनपद गठन के बाद किसी भी दर्ज आपराधिक मामले में अभियुक्त को फांसी का रुद्रप्रयाग में यह पहला मामला है। वरिष्ठ अधिवक्ता केपी खन्ना, अरुण वाजपेयी व सुदर्शन चौधरी ने बताया कि इस निर्णय ने न्यायालय के प्रति लोगों के विश्वास को और मजबूत करने का कार्य किया है।