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Dehradun News: दून पांवटा हाईवे के किनारे लगा दो किलोमीटर लंबा कूड़े का ढेर
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सेलाकुई। दून पांवटा हाईवे के किनारे शंकरपुर से रामपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र के बीच करीब दो किलोमीटर तक कूड़े का ढेर लगा है। दोनों ग्राम पंचायतों में कूड़ा उठान और निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। मजूबरी में स्थानीय ग्रामीण प्रतिदिन हाईवे के किनारे कूड़ा फेंक रहे हैं। कूड़ा सड़ने से हाईवे पर दिनभर दुर्गंध उठती रहती है। राहगीरों को नाक पर रुमाल गुजरना पड़ता है। अगर हाल ऐसा ही रहा तो हाईवे के किनारे ही ट्रंचिंग ग्राउंड बन जाएगा।
ग्राम पंचायतों में संसाधनों और निगरानी व्यवस्था की कमी के चलते स्वच्छता अभियान को पलीता लग रहा है। सहसपुर ब्लॉक की शंकरपुर और रामपुर ग्राम पंचायत में कूड़ा वाहन हैं, लेकिन घरों से कूड़ा उठान नहीं हो रहा है। ग्राम प्रधानों का कहना है कि क्षेत्र में ट्रंचिंग ग्राउंड नहीं है। पंचायतों को गांव में सफाई व्यवस्था के लिए अलग से बजट भी नहीं मिलता है। यदि कूड़ा उठा भी लें तो उसको एकत्र कहां करेंगे। कई बार जिला पंचायत से ट्रंचिंग ग्राउंड और बजट की मांग की गई, लेकिन उसने सफाई व्यवस्था बनाने की बजाय केवल हाईवे किनारे से कूड़ा उठवा दिया। इसके अलावा इधर-उधर कूड़ा फेंकने पर जुर्माना काटने का बोर्ड लगाकर इतिश्री कर दी। कुछ दिनों बाद हाईवे के किनारे फिर से कूड़े का बड़ा ढेर लग गया है। दोनों ग्राम पंचायतों में कूड़ा निस्तारण का संकट बना हुआ है।
शीशमबाड़ा में कूड़ा फेंकने पर रोक
ग्राम प्रधान शंकरपुर बेबी रानी ने बताया कि सफाई व्यवस्था के लिए अलग से बजट नहीं मिलता है। कूड़ा निस्तारण के लिए मेयर, एसडीएम और नगर स्वास्थ्य अधिकारी से शीशमबाड़ा ट्रंचिंग ग्राउंड में कूड़ा डालने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन उन्होंने साफ इन्कार कर दिया।
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कई बार समझाया पर नहीं मानते लोग
ग्राम प्रधान रामपुर शबनम शाहीन ने बताया कि कई बार लोगों को हाईवे के किनारे कूड़ा न डालने के लिए कहा गया है। बावजूद इसके लोग अब भी सड़क किनारे कूड़ा फेंक रहे हैं। जिला पंचायत ने कई बार कूड़ा उठाया। लेकिन लोग कूड़ा फेंकना बंद नहीं कर रहे हैं।
ग्रामीणों को सता रहा संक्रमण फैलने का डर
- हाईवे के किनारे कूड़े के ढेर से भयंकर दुर्गंध उठती है। इसके चलते आसपास के गांवों में रहने वाले ग्रामीणों को संक्रमण फैलने का डर सता रहा है। ग्रामीण संजय कुमार, अशोक कुमार, इरशाद, इस्लाम, शौकत अली का कहना है कि गर्मी का मौसम आ गया है। सर्दियों में कूड़े से दुर्गंध उठती थी। अब गर्मियों में हाल और बुरा होगा। कूड़ा सड़ेगा तो आसपास बीमारियां भी फैलेंगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने कहा कि जिला पंचायत के पास सफाई-व्यवस्था के लिए अलग से बजट नहीं आता है। 15वें वित्त का जो पैसा आता है वह 75 फीसदी ग्राम पंचायत और 15 फीसदी जिला पंचायत को मिलता है। गाइडलाइन के अनुसार 30 फीसदी बजट स्वास्थ्य के लिए होता है। ग्राम पंचायत सहयोग करे तो जल्द ही हाईवे किनारे से कूड़े का ढेर हटा दिया जाएगा।
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ग्राम पंचायतों में संसाधनों और निगरानी व्यवस्था की कमी के चलते स्वच्छता अभियान को पलीता लग रहा है। सहसपुर ब्लॉक की शंकरपुर और रामपुर ग्राम पंचायत में कूड़ा वाहन हैं, लेकिन घरों से कूड़ा उठान नहीं हो रहा है। ग्राम प्रधानों का कहना है कि क्षेत्र में ट्रंचिंग ग्राउंड नहीं है। पंचायतों को गांव में सफाई व्यवस्था के लिए अलग से बजट भी नहीं मिलता है। यदि कूड़ा उठा भी लें तो उसको एकत्र कहां करेंगे। कई बार जिला पंचायत से ट्रंचिंग ग्राउंड और बजट की मांग की गई, लेकिन उसने सफाई व्यवस्था बनाने की बजाय केवल हाईवे किनारे से कूड़ा उठवा दिया। इसके अलावा इधर-उधर कूड़ा फेंकने पर जुर्माना काटने का बोर्ड लगाकर इतिश्री कर दी। कुछ दिनों बाद हाईवे के किनारे फिर से कूड़े का बड़ा ढेर लग गया है। दोनों ग्राम पंचायतों में कूड़ा निस्तारण का संकट बना हुआ है।
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शीशमबाड़ा में कूड़ा फेंकने पर रोक
ग्राम प्रधान शंकरपुर बेबी रानी ने बताया कि सफाई व्यवस्था के लिए अलग से बजट नहीं मिलता है। कूड़ा निस्तारण के लिए मेयर, एसडीएम और नगर स्वास्थ्य अधिकारी से शीशमबाड़ा ट्रंचिंग ग्राउंड में कूड़ा डालने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन उन्होंने साफ इन्कार कर दिया।
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कई बार समझाया पर नहीं मानते लोग
ग्राम प्रधान रामपुर शबनम शाहीन ने बताया कि कई बार लोगों को हाईवे के किनारे कूड़ा न डालने के लिए कहा गया है। बावजूद इसके लोग अब भी सड़क किनारे कूड़ा फेंक रहे हैं। जिला पंचायत ने कई बार कूड़ा उठाया। लेकिन लोग कूड़ा फेंकना बंद नहीं कर रहे हैं।
ग्रामीणों को सता रहा संक्रमण फैलने का डर
- हाईवे के किनारे कूड़े के ढेर से भयंकर दुर्गंध उठती है। इसके चलते आसपास के गांवों में रहने वाले ग्रामीणों को संक्रमण फैलने का डर सता रहा है। ग्रामीण संजय कुमार, अशोक कुमार, इरशाद, इस्लाम, शौकत अली का कहना है कि गर्मी का मौसम आ गया है। सर्दियों में कूड़े से दुर्गंध उठती थी। अब गर्मियों में हाल और बुरा होगा। कूड़ा सड़ेगा तो आसपास बीमारियां भी फैलेंगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने कहा कि जिला पंचायत के पास सफाई-व्यवस्था के लिए अलग से बजट नहीं आता है। 15वें वित्त का जो पैसा आता है वह 75 फीसदी ग्राम पंचायत और 15 फीसदी जिला पंचायत को मिलता है। गाइडलाइन के अनुसार 30 फीसदी बजट स्वास्थ्य के लिए होता है। ग्राम पंचायत सहयोग करे तो जल्द ही हाईवे किनारे से कूड़े का ढेर हटा दिया जाएगा।