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विधानसभा चुनावः उड़न दस्ते में पुलिस भागेदारी बनी मुसीबत

Fri, 06 Jan 2017 11:27 AM IST
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 06 Jan 2017 11:27 AM IST
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trouble of police involvement in assembly election flying squad
पु‌लिस - फोटो : अमर उजाला

चुनावी दंगल के बीच आदर्श आचार संहिता का पालन कराने को गठित होने वाले उड़न दस्तों में दारोगा और सिपाही की भागेदारी सुनिश्चित करना अधिकारियों के मुसीबत का सबब बन गया है।

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उड़न दस्ते में शामिल होने वाले दारोगा और सिपाही पोस्टिंग वाली विधानसभा के नहीं होंगे। हर दस्ते में दूसरी विधानसभा के पुलिस कर्मियों को तैनाती करने में अधिकारियों को व्यवहारिक दिक्कतें आ रही है। पुलिस कप्तानों ने आदेश के अनुपालन में थोड़े बदलाव के लिए पुलिस मुख्यालय से लिखित में राय मांगी है। 
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प्रदेश में 15 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लागू हुई आदर्श आचार संहिता का अनुपालन कराने के लिए पुलिस-प्रशासन ने कमर कस ली है। आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतों पर कार्रवाई को हर विधानसभा में उड़न दस्तों के साथ सर्विलांस टीम, संवेदनशील चेक पोस्ट, मीडिया मॉनिटेरिंग टीम का गठन होना है।
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खासतौर से उड़न दस्ते और संवेदनशील चेक पोस्ट चेकिंग टीम में एक-एक दारोगा और दो सिपाहियों को शामिल किया जाएगा। यह उड़न दस्ते विधानसभाओं में निर्धारित समय के बाद सभा करने, शराब अथवा नगदी बांटे जाने जैसी शिकायतों पर मौके पर जाकर कार्रवाई करेंगे।

चुनाव आयोग के निर्देश के अनुपालन में पुलिस मुख्यालय ने कप्तानों को निर्देश दिए थे कि उड़न दस्ते में दारोगा और सिपाही को शामिल करते हुए यह ध्यान रखा जाए कि वह उस विधानसभा के उड़न दस्ते में शामिल न हो, जहां उनकी तैनाती है। पुलिस कर्मियों को दूसरी विधानसभा के उड़न दस्तों में शामिल किया जाए।

पोस्टिंग वाली विधानसभा में पुलिस कर्मियों द्वारा पक्षपात किए जाने की आशंका है। इस आदेश का अनुपालन कराने की स्थिति में दारोगाओं और सिपाहियों को कई थानों को पार करके जाना पड़ेगा। जिससे पुलिस का कामकाज प्रभावित होगा। इन तमाम तर्कों को देकर पुलिस अधिकारियों ने पीएचक्यू से पत्राचार कर इसमें कुछ बदलाव होने की संभावनाओं को लेकर राय मांगी है।


उड़न दस्ते में दारोगा और सिपाही को शामिल करने में कई तरह के व्यवहारिक दिक्कत है। पुलिस मुख्यालय से राय मांगी गई है कि क्या इसमें कुछ बदलाव किया जा सकता है या नहीं।
- स्वीटी अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक

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