ट्रिपल तलाक: आतिया बोलीं, जो बुरा वक्त हमने देखा है, अब वह आने वाली पीढ़ी को नहीं भुगतना पड़ेगा
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तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़कर जीतने वालीं आतिया साबरी बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि मुझे जब ये पता चला कि तीन तलाक बिल राज्यसभा में भी पास हो गया है तो बड़ी खुशी हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं की भावनाओं को समझा है। जो बुरा वक्त हमने देखा है, अब वह आने वाली पीढ़ी को नहीं भुगतना पड़ेगा। सबसे पहले मैं सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के विरोध में गई थी। वर्ष 2017 में मुझे न्याय भी मिला था।
आतिया कहती हैं कि तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं को समानता के अधिकार और सम्मान से जीने की राह में बाधक है। तीन तलाक से महिलाओं का शोषण हो रहा है। कानून बनने से अब हजारों मुस्लिम महिलाओं को समानता और सम्मान के साथ जीने का मौका मिल सकेगा।
नोटिस भेजकर दिया था तलाक
आतिया तब सुर्खियों में आईं जब वे तीन तलाक के विरोध में सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। उनका आरोप था कि उसके पति ने उनकी बिना जानकारी के एक कागज पर तीन तलाक लिखकर भेज दिया। उनके पति ने देवबंद दारुल उलूम की फतवा कमेटी को आधी अधूरी जानकारी देकर फतवा जारी करा लिया।
देवबंद दारुल उलूम ने भी उनसे पूछे और मामले की पूरी तहकीकात किए गए बगैर तलाक दिए जाने का फतवा जारी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में आतिया ने फतवा को लेकर देवबंद की कमेटी को भी प्रतिवादी बनाया था।
इसके अलावा आतिया ने ससुरालियों, कानून एवं न्याय मंत्रालय, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय, बाल कल्याण एवं महिला विकास मंत्रालय को भी प्रतिवादी बनाया था। आतिया की शादी 25 मार्च 2012 को जस्सोदरपुर निवासी वाजिद पुत्र सईद हसन के साथ हुई थी। सईद हसन सामाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। शादी के ढाई साल के अंदर आतिया साबरी नें दो बेटियों को जन्म दे दिया।
आतिया का आरोप था कि दो बेटियों के जन्म देने के बाद उसके पति ने तीन तलाक का एक नोटिस भेजाकर तलाक दे दिया। जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया था नोटिस
इसके बाद अतिया समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार समेत अन्य संस्थाओं को नोटिस जारी किया था। इसके बाद तीन तलाक पर देश भर में बहस शुरू हुई और कानून बनाने की कार्रवाई शुरू हुई।
वहीं, देहरादून निवासी तीन तलाक पीड़िता शगुफ्ता जमाल का कहना है कि, 'मैं केंद्र सरकार को धन्यवाद देती हूं कि वह मुस्लिम महिलाओं के हक के लिए यह कानून लेकर आ रही है। इस्लाम में भी तीन तलाक का समर्थन नहीं किया गया है। जो लोग इसका समर्थन करते हैं वे भी इस्लाम के गुनहगार हैं। इसका ठीक तरह से पालन होगा तो न जाने कितनी महिलाओं का घर बच सकेगा। मैं मानती हूं कि इससे यदि एक भी महिला का घर बसा तो केंद्र सरकार का यह प्रयास फलीभूत हो जाएगा।'
बता दें कि देहरादून डोईवाला कोतवाली में शगुफ्ता के पति के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज है।
मेयर ने की तीन तलाक बिल पास होने की सराहना
राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास होने पर मेयर अनीता ममगाईं ने सराहना की है। उन्होंने कहा कि इस बिल के पास होने से मुस्लिम महिलाओं के सम्मान की रक्षा हुई है। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो वादा किया था। उसे राज्यसभा में बिल पास कर पूरा किया है। तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं में जो प्रताड़ना की स्थिति बनी हुई थी। अब वह पूर्ण रूप से बंद हो जाएगी। अब इस बिल के पास होने पर कानून के सहयोग से उनकी रक्षा हो सकेगी।
सीएम ने भी की सराहना
उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी बिल के राज्यसभा सभा में पास होने की सराहना की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने लाखों मुस्लिम महिलाओं को ट्रिपल तलाक के चंगुल से मुक्त कराया है। बिल के पारित होने के बाद अब मुस्लिम महिलाओं को ट्रिपल तलाक के संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
Today is a great day for Indian democracy. Under PM @narendramodi ‘s leadership, India has freed millions of Muslim women from the clutches of regressive practice of triple talaq. With the passage of #TripleTalaqBill, Muslim women won’t have to face the scourge of triple talaq.— Trivendra Singh Rawat (@tsrawatbjp) July 30, 2019