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आपके सपनों का आशियाना रहेगा कूल-कूल

Mon, 11 Aug 2014 05:22 PM IST
अंकित कुमार गर्ग/ अमर उजाला, रुड़की
अंकित कुमार गर्ग/ अमर उजाला, रुड़की Updated Mon, 11 Aug 2014 05:22 PM IST
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thermal insulation in house at roorkee

मौजूदा दौर में हर कोई चाहता है कि उसके सपनों का आशियाना सुकूनभरा बने। कम स्थान और एयरटाइट माहौल में बने घरों के गर्म होने की शिकायत आम रहती है।

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घरों को कूल-कूल और आरामदेह बनाया जा सकता
रुड़की स्थित राष्ट्रीय भवन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने शोध के बाद थर्मल इंसुलेटिंग सामग्री बनाई है, जिसके इस्तेमाल से मामूली खर्चे और जतन से घरों को कूल-कूल और आरामदेह बनाया जा सकता है।
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दावा है कि इस सामग्री से निर्मित घर के भीतर का तापमान सामान्य स्थिति के मुकाबले तीन डिग्री सेल्सियस तक कम रहता है।

सीबीआरआई द्वारा निर्मित सामग्री भारत सरकार की ओर से भवनों में ऊर्जा संरक्षण आधारित मैटीरियल के प्रयोग के लिए तय किए मानक (एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड) पर भी खरी उतरी है।
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सीबीआरआई परिसर में मैटीरियल से संबंधित शोध के प्रयोग को जांचने और परखने के लिए ग्रामीण तकनीकी पार्क बनाया गया है। यही नहीं, ठंडे प्रदेशों में इसके इस्तेमाल के तरीके में बदलाव करके घर को गर्म भी बनाया जा सकता है।

अब पूरे देश में भी बढ़ गया है चलन
वैज्ञानिक बीएम सुमन ने बताया कि महानगरों में इसकी डिमांड काफी बढ़ गई है। हाल ही में महागुन नोएडा में कई मंजिला टॉवर के निर्माण में इसका प्रयोग किया जा रहा है। देश में कई कंपनियां इस तरह के मैटीरियल तैयार कर रही हैं।

20 से 50 रुपए प्रति वर्ग फीट का अतिरिक्त खर्च
सामान्य से कुछ ही ज्यादा खर्च कर हम भवनों को कूल और आरामदायक बना सकते हैं। इसके लिए शुरुआत में भले ही भवनों में 20 से 50 रुपए प्रति वर्ग फुट का अतिरिक्त खर्च करना पड़े, लेकिन ऊर्जा बचत कर यह खर्च भी करीब पांच साल में रिकवर हो जाएगा।


निर्माण सामग्री के आधार (थर्मल इंसुलेटिंग मैटीरियल)
परलाइट कंक्रीट, एक्पेंडिड पालीथिलीन, नियोपोर, पेरीपोर, आइसोबोर्ड, स्टायरोपोर, इलास्टोपोर, एक्सपेंडिड पालीस्टाइरीन (ईपीएस) और फाइबर ग्लास। मड फुस्का, ब्रिक टाइल, पालीयूरीथेन फोम, फोम कंक्रीट।

यह है खासियत
थर्मल इंसुलेटिंग मैटीरियल करेंगे भवनों को ठंडा
प्राकृतिक रूप से कम हो जाएगा तीन डिग्री तापमान
छत से भवनों के भीतर पहुंचती है 60% गरमी
ईसीबीसी के मानकों पर खरे, तीन डिग्री घटा तापमान

सामग्री निर्माण को लेकर किया गया शोध ‘डेवलपमेंट आफ ए फ्रेमवर्क टू रिड्यूस द कार्बन फुटप्रिंट एंड अनहेंस द एनर्जी एफीसेंसी इन बिल्डिंग’ अंतरराष्ट्रीय स्तर के एल्सीवीयर जनरल में प्रकाशित हो चुका है। साथ ही आर्किटेक्ट के क्षेत्र में प्रसिद्ध इंडियन इंस्टीट्यूट आफ आर्किटेक्ट के जनवरी 2013 के अंक में भी प्रकाशित हो चुका है।
- अशोक कुमार, (शोध से जुड़े वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक सीबीआरआई)

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