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आंचलिक भाषाओं को बचाने की है जरूरत: प्रसून जोशी
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प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी अपनी जन्मभूमि से बेहद प्यार करते हैं। यहां की संस्कृति, खानपान, बोली-भाषा सब कुछ उन्हें बेहद आकर्षित करता है। लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन आयोजित सत्र में उन्होंने कहा कि हमारी भाषा में बहुत ज्यादा शब्द हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्चुअल होने वाली मीटिंग में उन्हें बहुत मजा नहीं आ रहा है, क्योंकि एक्सप्रेशन पूरी तरह गायब है।
अद्वैता काला के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने अपनी जिंदगी और करियर से जुड़ी कई जानकारियां साझा की। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में हर भाषा में प्रयास किए जाते हैं। आंचलिक भाषाओं को बचाने की जरूरत है। यह अनुभव का एक कैप्सूल है, जो एक से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होता है। उन्होंने कहा कि मुझे उत्तराखंड से बेहद लगाव है और मैं अपने गीतों में धूप का इस्तेेमाल करता हूं। उत्तराखंड के लोगों को धूप से लगाव होता है। उन्होंने कहा कि मुझे कई साल मुंबई में रहते हुए हो गए हैं। वहां की बोली भाषा को हमने काफी हद तक अजमाया है।
दून इंटरनेशनल रिवर साइड कैंपस की पहचान बना डीएलएफ
देहरादून। देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल दून इंटरनेशनल रिवर साइड कैंपस की पहचान बन चुका है। दो दिन स्कूल परिसर में साहित्य, कला, सिनेमा के बौद्धिक लोगों और दिग्गजों का मेला लगा रहा। स्कूली छात्र-छात्राओं ने भी इस समारोह को बहुत अधिक पसंद किया। स्कूल के निदेशक हैरी मान ने बताया कि बच्चों को तमाम हस्तियों से मुलाकात करने का मौका मिलता है। उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर है, जिसका वो फायदा भी उठा रहे हैं।
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अद्वैता काला के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने अपनी जिंदगी और करियर से जुड़ी कई जानकारियां साझा की। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में हर भाषा में प्रयास किए जाते हैं। आंचलिक भाषाओं को बचाने की जरूरत है। यह अनुभव का एक कैप्सूल है, जो एक से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होता है। उन्होंने कहा कि मुझे उत्तराखंड से बेहद लगाव है और मैं अपने गीतों में धूप का इस्तेेमाल करता हूं। उत्तराखंड के लोगों को धूप से लगाव होता है। उन्होंने कहा कि मुझे कई साल मुंबई में रहते हुए हो गए हैं। वहां की बोली भाषा को हमने काफी हद तक अजमाया है।
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दून इंटरनेशनल रिवर साइड कैंपस की पहचान बना डीएलएफ
देहरादून। देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल दून इंटरनेशनल रिवर साइड कैंपस की पहचान बन चुका है। दो दिन स्कूल परिसर में साहित्य, कला, सिनेमा के बौद्धिक लोगों और दिग्गजों का मेला लगा रहा। स्कूली छात्र-छात्राओं ने भी इस समारोह को बहुत अधिक पसंद किया। स्कूल के निदेशक हैरी मान ने बताया कि बच्चों को तमाम हस्तियों से मुलाकात करने का मौका मिलता है। उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर है, जिसका वो फायदा भी उठा रहे हैं।
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