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Dehradun: प्रसव में 15 दिन शेष होने पर कंट्रोल रूम से होगी गर्भवतियों की मॉनिटरिंग, बैठक में ये भी फैसले
Thu, 15 Feb 2024 02:18 PM IST
देहरादून ब्यूरो
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 15 Feb 2024 02:18 PM IST
सार
मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयासों के क्रम में एक समीक्षा बैठक की गई। बताया गया कि कंट्रोल रूम हेल्पलाइन पर गर्भवतियां और उनके परिजन कॉल करके सुरक्षित प्रसव संबंधी व्यवस्थाओं सहित अन्य सहायता प्राप्त कर पाएंगे।
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pregnancy
विस्तार
ग्रामीण इलाकों में जहां गर्भवतियों के इलाज की पूरी सुविधा नहीं है वहां अब उनकी विशेष देखभाल की जाएगी। इनके प्रसव करवाने से लेकर अस्पताल ले जाने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की होगी। यही नहीं, प्रसव से 15 दिन पहले ही गर्भवती को अस्पताल के नजदीक लाकर रहने के लिए व्यवस्था की जाएगी।
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बुधवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयासों के क्रम में एक समीक्षा बैठक में इस विषय पर बात की गई। इस बैठक में सीएमओ डॉ. संजय जैन, एसीएमओ एनएचएम डॉ. निधि रावत उपस्थित रहीं। बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देशित किया गया कि आईटीडीए देहरादून में जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम में हेल्पलाइन नंबर 18001802525 शुरू किया गया है। जिले की जिन गर्भवतियों की संभावित प्रसव तिथि में 15 से 20 दिवस शेष हैं उन्हें कंट्रोल रूम से इनकी नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इनका कंट्रोल रूम से फॉलोअप किया जाएगा।
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प्रसव की संभावित तिथि से पूर्व नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया जाएगा। जिले के दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में निवासरत गर्भवतियों को एक सप्ताह पूर्व स्वास्थ्य केंद्रों के नजदीक रहने और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। कंट्रोल रूम हेल्पलाइन पर गर्भवतियां और उनके परिजन कॉल करके सुरक्षित प्रसव संबंधी व्यवस्थाओं सहित अन्य सहायता प्राप्त कर पाएंगे। इस सुविधा का उद्देश्य जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और सुरक्षित प्रसव को सुनिश्चित करना है।
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तारीख नजदीक आने पर अस्पताल के पास लाया जाएगा
सीएमओ डॉ. संजय जैन ने बताया कि देहरादून जिले के कुछ ऐसे ग्रामीण इलाके हैं जहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर नहीं हैं। इनमें चकराता, साहिया और त्यूणी शामिल हैं। इस तरह के अन्य क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के प्रसव संबंधी देखभाल कंट्रोल रूम के माध्यम से की जाएगी। प्रसव की तारीख नजदीक होने पर इन गर्भवतियों को अस्पताल के नजदीक रखा जाएगा या फिर अस्पताल में ही भर्ती करवाया जाएगा, ताकि सुरक्षित प्रसव हो सके।
सीएमओ डॉ. संजय जैन ने बताया कि देहरादून जिले के कुछ ऐसे ग्रामीण इलाके हैं जहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर नहीं हैं। इनमें चकराता, साहिया और त्यूणी शामिल हैं। इस तरह के अन्य क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के प्रसव संबंधी देखभाल कंट्रोल रूम के माध्यम से की जाएगी। प्रसव की तारीख नजदीक होने पर इन गर्भवतियों को अस्पताल के नजदीक रखा जाएगा या फिर अस्पताल में ही भर्ती करवाया जाएगा, ताकि सुरक्षित प्रसव हो सके।
कंट्रोल रूम से फोन कर हाल पूछा जाएगा
सीएमओ डॉ. संजय जैन ने बताया कि जिस तरह से डेंगू में कंट्रोल रूम से काम किया गया था वैसे ही अब किया जाएगा। स्मार्ट सिटी की ओर से बने इस कमांड कंट्रोल रूम से फोन कर गर्भवतियों का हाल पूछा जाएगा। इसके अलावा यहां के हेल्पलाइन नंबर पर परिवारजन फोन कर जानकारी दे सकते हैं।
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प्रसव से पहले होंगी जांचें
नौ महीने में एंटीनेटल चेकअप के तहत गर्भवतियों की चार बार जांचें की जाती हैं। कुछ गर्भवतियों की पूरी जांचें नहीं हो पाती हैं। वह हाई रिस्क में हैं या नहीं इसकी जानकारी भी नहीं मिल पाती है। ऐसे में प्रसव से एक महीने पहले पूरी जांच करवाई जाएंगी।
सीएमओ डॉ. संजय जैन ने बताया कि जिस तरह से डेंगू में कंट्रोल रूम से काम किया गया था वैसे ही अब किया जाएगा। स्मार्ट सिटी की ओर से बने इस कमांड कंट्रोल रूम से फोन कर गर्भवतियों का हाल पूछा जाएगा। इसके अलावा यहां के हेल्पलाइन नंबर पर परिवारजन फोन कर जानकारी दे सकते हैं।
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प्रसव से पहले होंगी जांचें
नौ महीने में एंटीनेटल चेकअप के तहत गर्भवतियों की चार बार जांचें की जाती हैं। कुछ गर्भवतियों की पूरी जांचें नहीं हो पाती हैं। वह हाई रिस्क में हैं या नहीं इसकी जानकारी भी नहीं मिल पाती है। ऐसे में प्रसव से एक महीने पहले पूरी जांच करवाई जाएंगी।