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Dehradun News: शिक्षक नहीं कर रहे मूल्यांकन, छात्रों का अटकेगा परिणाम
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वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) से संबद्ध संस्थानों के शिक्षक मूल्यांकन कार्य नहीं कर रहे हैं। ऐसे में परिणाम अटकने से छात्रों की परेशानी बढ़ सकती है। इस समस्या से निपटने के लिए विवि की ओर से सभी संबद्ध संस्थानों व परिसर संस्थान के निदेशक और प्राचार्याें को पत्र लिखा है।
दरअसल, विवि की ओर से सेमेस्टर परीक्षाएं आयोजित की गई थीं। इसकी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए शिक्षकों काे जिम्मा सौंपा गया था लेकिन शिक्षक यह कार्य ही नहीं कर रहे हैं। विवि की परीक्षा नियंत्रक डॉ. स्वाति सिंह राजपूत की ओर से संबद्ध संस्थानों को पत्र भेजा गया है। इस पर साफ लिखा गया है कि शिक्षक मूल्यांकन कार्य नहीं कर रहे हैं जिससे परिणाम कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अगर रिजल्ट में देरी हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित संस्थान की होगी।
Iसंस्थान नहीं लेते विवि के पत्रों का संज्ञान
I
यह पहला मौका नहीं है जब विवि से संबद्ध संस्थानों के शिक्षक अपने कार्याें से बच रहे हों। पहले भी कई बार संस्थानों की ओर से विवि के पत्रों का संज्ञान नहीं लिया गया। इस पर भी विवि प्रशासन की ओर से खूब नाराजगी जताते हुए संस्थानों को पत्र जारी किया जा चुका है। ऐसे में संस्थानों की यह मनमानी और लापरवाही का सीधा खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। जबकि इस संबंध में छात्र भी कई बार शिकायत कर चुके हैं।
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दरअसल, विवि की ओर से सेमेस्टर परीक्षाएं आयोजित की गई थीं। इसकी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए शिक्षकों काे जिम्मा सौंपा गया था लेकिन शिक्षक यह कार्य ही नहीं कर रहे हैं। विवि की परीक्षा नियंत्रक डॉ. स्वाति सिंह राजपूत की ओर से संबद्ध संस्थानों को पत्र भेजा गया है। इस पर साफ लिखा गया है कि शिक्षक मूल्यांकन कार्य नहीं कर रहे हैं जिससे परिणाम कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अगर रिजल्ट में देरी हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित संस्थान की होगी।
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Iसंस्थान नहीं लेते विवि के पत्रों का संज्ञान
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यह पहला मौका नहीं है जब विवि से संबद्ध संस्थानों के शिक्षक अपने कार्याें से बच रहे हों। पहले भी कई बार संस्थानों की ओर से विवि के पत्रों का संज्ञान नहीं लिया गया। इस पर भी विवि प्रशासन की ओर से खूब नाराजगी जताते हुए संस्थानों को पत्र जारी किया जा चुका है। ऐसे में संस्थानों की यह मनमानी और लापरवाही का सीधा खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। जबकि इस संबंध में छात्र भी कई बार शिकायत कर चुके हैं।
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