सबमर्सिबल से पानी का इस्तेमाल करने वालों के लिए बुरी खबर, अब करनी होगी जेब ढीली
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अब भूमिगत जल का अंधाधुंध इस्तेमाल करने वालों को जेब ढीली करनी पड़ सकती है। सबमर्सिबल पंप लगाकर पानी का दोहन करने वालों पर टैक्स लग सकता है। भूमिगत जल के अंधाधुंध दोहन पर रोक लगाने के लिए यह सुझाव नई जल नीति में दिए गए हैं। जल नीति का प्रारंभिक ड्राफ्ट सिंचाई विभाग ने तैयार कर लिया है। इसको अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही शासन स्तर पर बैठक होगी।
प्रदेश में भूमिगत जल का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जा रहा है। कई लोग भूमिगत जल का व्यावसायिक इस्तेमाल भी कर रहे हैं। लिहाजा, भूमिगत जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। हरिद्वार जनपद का भगवानपुर क्षेत्र तो डार्क जोन में पहुंच चुका है।
देहरादून के कई इलाकों में भूमिगत जल का स्तर काफी नीचे चला गया है। अगर भूमिगत जल का दोहन इसी तरह से होता रहा तो देहरादून भी डार्क जोन में पहुंच जाएगा। भूमिगत जल के अंधाधुंध दोहन पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को अपनी-अपनी जल नीति बनाने का निर्देश दिया था।
केंद्र के निर्देश पर कई राज्यों ने अपनी जल नीति तैयार कर ली है। उत्तराखंड में भी जल नीति बनाने को पिछले कई सालों से मंथन चल रहा है। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में इसकी प्रक्रिया शुरू की गई थी।
प्रदेश में सरकार बदलने के बाद जल नीति बनाने की रफ्तार सुस्त हो गई थी। शासन में एक बार फिर से जल नीति को अंतिम रूप देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। जल नीति का जो प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार किया गया है उसमें पानी पर अधिकार की व्यवस्था की गई है।
यानि की पानी के इस्तेमाल की प्राथमिकता क्या होगी। पहली प्राथमिकता पेयजल को दी गई है। जितना भी भूमिगत जल मौजूद है सबसे पहले उसका दोहन पेयजल की मांग को पूरा करने के लिए किया जाएगा। इसके बाद पानी का इस्तेमाल सिंचाई और कृषि पर आधारित उद्योग के लिए किया जाएगा।
जल नीति की मुख्य बातें
जल नीति की मुख्य बातें
-भूमिगत जल के अंधाधुंध दोहन रोकने को बनेगा कानून
-सबमर्सिबल पंप के इस्तेमाल पर लगाया जा सकता है टैक्स
-सिर्फ कृषि कार्य के लिए भूमिगत जल के इस्तेमाल पर नहीं लगेगा कोई टैक्स
-भूमिगत जल का पेयजल के रूप में इस्तेमाल करना होगी पहली प्राथमिकता
-नगर निकायों को भी पानी पर लगने वाले टैक्स को संशोधित करने का दिया गया है सुझाव
-नदियों और अन्य स्रोतों से प्राप्त होने वाले पानी को लेकर दिए गए हैं सुझाव
-भूमिगत जल के स्तर को बढ़ाने के लिए रिचार्जिंग पर दिया गया है जोर
-जल नीति का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसमें भूमिगत जल के इस्तेमाल के मानक निर्धारित किए गए हैं। संबंधित विभागों से सुझाव मांगा गया था, जो मिल गए हैं। इस आधार पर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव, सिंचाई