फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Dehradun Fraudsters tampered with deed between 1978 and 1990

Dehradun: 1978 से 1990 के बीच हुए बैनामों में जालसाजों ने की छेड़छाड़, अब सैकड़ों की होगी जांच

Mon, 17 Jul 2023 05:44 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Mon, 17 Jul 2023 05:44 PM IST
सार

पिछले दिनों जनसुनवाई कार्यक्रम में आए एक प्रकरण के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के सामने चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। पता चला था कि जिले में बहुत सी ऐसी जमीनें हैं जिनके मालिकों ने वर्षों से उनकी तरफ नहीं देखा है।

विज्ञापन
Dehradun Fraudsters tampered with deed between 1978 and 1990
- फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में जालसाजों के गिरोह ने 12 साल की अवधि में बैनामों और गिफ्ट डीड में छेड़छाड़ की है। वर्ष 1978 से 1990 के बीच इन बैनामों के दस्तावेज से कई पेपर फाड़कर उनके स्थान पर फर्जी दस्तावेज चिपका दिए गए। इस दरम्यान के सैकड़ों बैनामों की जांच की जानी है। पुलिस जल्द ही इसमें बड़ी कार्रवाई कर सकती है।

विज्ञापन


बता दें कि पिछले दिनों जनसुनवाई कार्यक्रम में आए एक प्रकरण के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के सामने चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। पता चला था कि जिले में बहुत सी ऐसी जमीनें हैं जिनके मालिकों ने वर्षों से उनकी तरफ नहीं देखा है। इसी का फायदा उठाकर भूमाफिया ने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ गठजोड़ कर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया है। यह मामला सामने आने के बाद चार पुराने बैनामों की जांच कराई गई तो सभी भौचक्के रह गए।
विज्ञापन


किसी ने किसी का मुख्तारेआम बताकर दूसरे को बैनामा कर दिया तो कई बैनामे ऐसे पाए गए कि मालिक विदेशों से बाहर नहीं आए और इस दरम्यान उन्होंने जमीनें बेच भी दीं। इस तरह कमेटी की जांच में आए तथ्य के आधार पर शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। इस जांच रिपोर्ट में एआईजी निबंधन की ओर से पुलिस को वर्ष 2000 से अब तक दोनों सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में तैनात रहे नौ सब रजिस्ट्रार और 28 लिपिकों के नाम भी सौंपे गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


Uttarakhand Sting Case: सीबीआई कोर्ट का फैसला, हरीश रावत और हरक सिंह को देने होंगे वॉयस सैंपल, नोटिस जारी


ऐसे में अब जांच इन अधिकारियों तक भी पहुंचेगी। इस बीच जांच में यह भी पाया गया है कि जिन बैनामों में छेड़छाड़ की गई है या किए जाने की आशंका है वह सब वर्ष 1978 से 1990 के बीच किए गए हैं। इस दरम्यान के सभी बैनामों की एक बार फिर से पुलिस भी जांच करेगी। जांच कमेटी ने माना है कि इस काम में इन अधिकारियों के अलावा रखरखाव करने वाले कर्मचारी, माफिया और कुछ सलाहकार भी शामिल हो सकते हैं।

राजस्व अधिकारियों के साथ टीम बनाने पर विचार
पुलिस सामान्य तौर पर इस तरह के फर्जीवाड़ों की जांच करती आई है। लेकिन, यहां एक साथ कई मामले हो सकते हैं।संख्या सैकड़ों तक पहुंचने की भी आशंका है। ऐसे में पुलिस अधिकारी इसकी जांच के लिए मुख्य विवेचना अधिकारी के साथ राजस्व अधिकारियों को मिलाकर टीम बनाने पर विचार कर रहे हैं। जल्द ही पुलिस की ओर से जिलाधिकारी को पत्र भी भेजा जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed