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स्वरूपानंद सरस्वती की बड़ी जीत, ज्योतिर्पीठ के भी शंकराचार्य

Wed, 06 May 2015 09:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Wed, 06 May 2015 09:11 PM IST
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swaroopanand saraswati won case on shankacharya peeth.

उच्चतम न्यायालय की ओर से स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को ज्योर्तिपीठ का शंकराचार्य मान लेने के बाद से उनका पलड़ा भारी हो गया है।

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अब शारदा और ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य पदों पर आसीन स्वरूपानंद अब एक पद त्याग कर उस पर किसी अपने समर्थक संत को आसीन कर सकते हैं। लेकिन दस नाम संन्यासियों के सबसे बड़े जूना अखाड़े को स्वामी वासुदेवानंद की हार से गहरा धक्का लगा है।

पहले सिविल कोर्ट और उच्च न्यायालय में वासुदेवानंद सरस्वती के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। इसके खिलाफ स्वरूपानंद सरस्वती उच्चतम न्यायालय गए तो न्यायालय ने पुन: वह मामला जिला कोर्ट को भेज दिया था। सुनवाई के बाद न्यायालय ने वासुदेवानंद को सिरे से खारिज कर स्वरूपानंद को ही ज्योर्तिपीठ का शंकराचार्य मान लिया।
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स्वरूपानंद लंबे अरसे से शारदा और ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य पदों पर आसीन हैं। उन्होंने कईं बार कोशिश की थी कि कोई एक पद छोड़ दिया जाए। लेकिन प्रकरण न्यायालय में होने के कारण वह कोई निर्णय नहीं ले पा रहे थे। अब उनके कृपा पात्र स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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...तो एक पद छोड़ सकते हैं स्वरूपानंद

swaroopanand saraswati won case on shankacharya peeth.

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती मई-जून में कुछ दिनों के लिए हरिद्वार आते हैं। संतों में चर्चा है कि उनकी इस बार की हरिद्वार यात्रा एक पद त्याग का माध्यम बन सकती है। न्यायालय के फैसले पर संत समाज पूरी तरह मौन है।

स्वामी अच्युतानंद तीर्थ, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी आदि कुछ संतों ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। हरिद्वार प्रवास रंग लाया तो ज्योर्तिपीठ को इन गर्मियों में नया शंकराचार्य मिल सकता है।

अधर में रह गए स्वामी माधवाश्रम
ज्योर्तिपीठ पर स्वामी स्वरूपानंद और वासुदेवानंद के अलावा स्वामी माधवाश्रम भी शंकराचार्य होने का दावा कर रहे थे। अलबत्ता अपना पक्ष रखने के लिए वह कभी न्यायालय नहीं गए। अब न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद माधवाश्रम का प्रकरण अधर में लटक गया है। ऐसी संभावना भी नहीं है कि उन्हें संत जगत के किसी पक्ष का समर्थन मिल पाएगा।

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