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गंगा में खनन के विरोध में बड़े संत ने मांगी इच्छा मृत्यु, 7 दिन का अल्टीमेटम

Fri, 18 Nov 2016 12:23 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 18 Nov 2016 12:23 AM IST
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swami shivanand demand Euthanasia oppose of mining in ganga.
स्वामी शिवानंद - फोटो : AmarUjala

रायवाला से भोगपुर तक गंगा में खनन पर लगी रोक को हटाने के विरोध में मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने इच्छा मृत्यु मांगी है। स्वामी शिवानंद ने राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस उत्तराखंड और राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर सात दिन का समय दिया है।

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पत्र में उन्होंने कहा कि इसके बाद वह आमरण अनशन (तपस्या) शुरू कर देंगे। स्वामी शिवानंद के इस फैसले से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मातृसदन पहुंचे एसडीएम और सीओ को स्वामी शिवानंद ने खनन बंद होने तक वार्ता न करने की बात कहकर लौटा दिया।
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गंगा में खनन बंद करने की मांग को लेकर मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद पिछले 13 दिन से अनशन पर हैं। इसी बीच प्रदेश सरकार ने रायवाला से भोगपुर के बीच खनन से रोक हटा दी है।

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राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश और प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

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प्रणब मुखर्जी को लिखा पत्र - फोटो : PTI

इस पर मातृसदन ने कड़ी आपत्ति जताई है। स्वामी शिवानंद ने बृहस्पतिवार को पत्रकार वार्ता कर बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, उत्तराखंड के चीफ जस्टिस और राज्यपाल को चिट्ठी भेजी है। जिसमें उनसे पूछा गया है कि राज्य में संविधान का शासन है या किसी व्यक्ति की मनमानी चलेगी।

यदि संविधान का शासन है तो सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, एनजीटी और वैज्ञानिक दल की रिपोर्ट में रोक लगाने के बावजूद गंगा में खनन किस आधार पर कराया जा रहा है। खनन पर रोक लगाने के लिए अनशन चल रहा है, उस पर ध्यान देने के बजाय पहले से लगी रोक हटाई जा रही है।

'यदि संविधान का शासन नहीं तो मुझे भी न रोंके'

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केंद्र की मंसा पर उठाये सवाल - फोटो : अमर उजाला

स्वामी शिवानंद ने कहा कि राज्य में यदि संविधान का शासन नहीं है तो उन्हें भी नहीं रोका जाए। एक साधु को अपनी तपस्या का अधिकार है। सात दिन में जवाब नहीं मिलता है तो सबकी मूक सहमति मान ली जाएगी और वह उच्च से उच्चतर तपस्या शुरू करेंगे। आत्मा की लय में विलीन होने तक तपस्या जारी रहेगी।

उन्होंने बताया कि चिट्ठी की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित काबीना मंत्रियों और सभी विधायकों को भेजी गई है। वहीं एलआईयू के माध्यम से स्वामी शिवानंद के इस फैसले की जानकारी प्रशासन के आला अधिकारियों तक पहुंची तो दोपहर बाद एसडीएम मनीष कुमार, सीओ कनखल मनीषा जोशी, कनखल थानाध्यक्ष जवाहरलाल मातृसदन पहुंचे। मगर स्वामी शिवानंद ने खनन बंद होने से पहले किसी भी वार्ता से इनकार कर दिया।

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