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खुलासा: आवंटित सरकारी भूमि का हैरान कर देने वाला सच आया सामने, समिति के पांव तले खिसक गई जमीन

Sat, 30 Apr 2022 12:18 PM IST
रेनू सकलानी राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 30 Apr 2022 12:18 PM IST
सार

भू कानून के अध्ययन और परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के जिलों से मांगे गए ब्योरे से बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट का गहराई से अध्ययन होना बाकी है, लेकिन जो तथ्य सामने आए हैं, वह चौंकाने वाले हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : i stock

विस्तार

राज्य गठन के बाद अब तक निवेश व अन्य उद्देश्यों के लिए दी गई सरकारी जमीन का सच सामने आया तो भू कानून के अध्ययन और परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के पांव तले जमीन खिसक गई। कई जिलों से मिली रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि कुछ मामलों में जमीन जिस मकसद के लिए आवंटित कराई गई, उस पर मुनाफा कमाने के लिए कुछ और ही बना दिया गया। इंडस्ट्री लगाने के नाम पर ली गई भूमि पर प्लाटिंग तक कर दी गई।

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यह खुलासा भू कानून के अध्ययन और परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के जिलों से मांगे गए ब्योरे से हुआ है। करीब पांच अहम बैठकें करने के बाद समिति ने वर्ष 2003-04 के बाद राज्य में विभिन्न उद्देश्यों के नाम पर मुफ्त, रियायती दरों व अन्य सर्किल दरों पर आवंटित भूमि के उपयोग के संबंध में सभी जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी।
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समिति यह पता लगाना चाहती थी कि निवेश और सामाजिक कार्यों के नाम पर आवंटित भूमि की वर्तमान स्थिति क्या है? क्या उस पर निवेश हुआ? जिस उद्देश्य से भूमि ली गई, क्या उसे पूरा किया गया? इंडस्ट्री लगी तो कितने लोगों को रोजगार दिया गया? कितने भूखंड हैं, जहां अब तक कुछ नहीं हुआ? ऐसे तमाम पहलुओं पर जिलाधिकारियों से सूचना मांगी गई थी।

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रिपोर्ट का गहराई से अध्ययन होना बाकी

समिति के अध्यक्ष पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार के मुताबिक, कुमाऊं के बाद गढ़वाल के सभी जिलों से रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। हालांकि अभी रिपोर्ट का गहराई से अध्ययन होना बाकी है, लेकिन जो तथ्य सामने आए हैं, उनके मुताबिक 2007 में ली गई भूमि जिस उद्देश्य से दी गई, उसपर वह नहीं हुआ। कुछ मामलों में भूमि इंडस्ट्री के लिए ली गई, लेकिन उस पर प्लाटिंग कर दी गई। समिति यह भी दिखेगी कि किन कारणों से भूमि का सही उपयोग नहीं हो पाया। यह भी देखा जाएगा कि ये कारण कितने व्यावहारिक और उचित हैं।

जमीन के दुरुपयोग पर उठते रहे हैं सवाल

पिछले कई वर्षों से सरकार से सस्ती दरों पर भूमि लेकर उसका दुरुपयोग करने की शिकायतें और सवाल उठते रहे हैं। पूर्व कांग्रेस सरकार में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने भी आवंटित भूमि को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग उठाई थी। भू कानून का मसला उठने के बाद इस मांग ने दोबारा से जोर पकड़ा है।

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भू कानून की रिपोर्ट अब मई आखिर तक 

समिति भू कानून के अध्ययन और समीक्षा को लेकर अब तक करीब पांच बैठकें कर चुकी है। समिति ने लोगों से भी सुझाव मांगे थे। अब तक समिति के पास 200 से अधिक सुझाव पहुंच चुके हैं, जिनका अध्ययन हो चुका है। अब जिलों से भूमि की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद समिति की मई के पहले हफ्ते में बैठक होगी। इस बैठक केे बाद समिति मई के अंतिम सप्ताह तक अपनी सिफारिशें तय कर देगी। इस अवधि में या जून के पहले हफ्ते में समिति सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

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