मानसून मैराथन में वापसी प्वाइंट पर गुमराह हुए धावन-धाविकाएं, प्रतिभागियों ने किया हंगामा
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मुख्यालय में आयोजित पहले मानसून मैराथन में अव्यवस्थाएं जमकर हावी रहीं। छात्र-छात्रा वर्ग के सीनियर व जूनियर वर्ग में धावक-धाविकाओं को वापसी प्वाइंट की सही जानकारी नहीं मिली।
आक्रोशित धावक-धाविकाओं ने रामलीला मैदान में जमकर हंगामा किया। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद प्रतियोगिता निरस्त किए जाने का निर्णय लिया गया। अब इस वर्ग की प्रतियोगिता 11 अगस्त को फिर से आयोजित होगी।
मानसून मैराथन के आयोजन में कई वर्ग ट्रैक पर एक के बाद एक रवाना किए गए, लेकिन वापसी प्वाइंट पर तैनात स्वयं सेवकों को रवाना किए गए वर्ग की जानकारी समय पर नहीं दी गई। इससे चार किमी से वापसी करने वाले सीनियर व जूनियर वर्ग के अधिकतर धावक-धाविकाएं आठ किमी दूर तक आगे दौड़ गए।
इससे उन्होंने आगे के स्वयं सेवकों द्वारा जानकारी मिलने पर वापसी की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। धाविका मनीषा रावत व प्रेरणा, धावक अमन नेगी, सूरज सिंह, अखिलेश व राहुल ने बताया कि उन्हें चार किमी से वापस लौट रामलीला मैदान पहुंचना था, लेकिन उन्हें ट्रैक, टर्निंग प्वाइंट को लेकर समय पर सही जानकारी नहीं दी गई।
पुलिस जवानों ने धाविका को किया गुमराह
कहा कि जब हम आठ किमी आगे दौड़ गए, तब हमें वापसी की जानकारी दी गई, जो पूरी तरह खेल, खेल भावना व खिलाड़ी के साथ अन्याय है। रामलीला मैदान में आयोजन में हावी रही अव्यवस्थाओं को लेकर धावक-धाविकाओं ने जमकर हंगामा किया। जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने छात्र-छात्राओं की बात सुनने के बाद प्रतियोगिता को निरस्त घोषित कर दिया गया।
धाविका निशा जोशी ने बताया कि वह मैराथन में दौड़ते समय एजेंसी चौक के पास पहुंचीं। ट्रैक को लेकर दुविधा होने पर तैनात पुलिस जवानों को पूछा कि इससे आगे कहां जाना है, तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बॉर्डर पर जाना है। धाविका निशा ने बताया स्थानीय लोगों ने बताया कि फिनिश प्वाइंट रामलीला मैदान है। पुलिस जवानों के व्यवहार से धाविका की आंखें आंसुओं से भर आईं।
विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही बनीं मातृशक्ति की ताकत
विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही शीतल मानसून मैराथन में मातृशक्ति की ताकत बनीं। शीतल ने इस दौरान बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दिया। शीतल पिथौरागढ़ के सल्मोड़ा गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता चालक और माता गृहणी है। शीतल के दो छोटे भाई हैं। स्कूली शिक्षा के दौरान एनसीसी का हिस्सा बनना शीतल के जीवन को दिशा दे गया।
दार्जिलिंग व जम्मू कश्मीर में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लेने के बाद शीतल ने वर्ष 2018 में कंचनजंघा पर्वत पर तिरंगा फहरा विश्व की सबसे युवा पर्वतारोही बनकर गिनीज बुक आफ वर्ड रिकार्ड में स्थान बनाया।
इसके बाद विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह करने वाली व सबसे कम उम्र की उत्तराखंड की पहली युवा बनी। उन्होंने इसकी शुरुआत उत्तरकाशी के रुद्र गैरा ट्रैक पर ट्रेकिंग से की। शीतल ने सतोपंथ, त्रिशूल सहित अन्य कई पर्वत चोटियों पर तिरंगा फहराया है।