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सामरिक पदों से मिल सकता है सियासी फायदा
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 18 Dec 2016 11:58 AM IST
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केंद्र सरकार के उत्तराखंड मूल के अफसरों को सामरिक महत्व के सैन्य एवं गैर सैन्य पदों पर आसीन करने के पीछे भले कारण प्रशासनिक हैं, लेकिन इसे विधानसभा चुनाव में सियासी मुद्दा बनाए जाने की संभावना भी दिख रही है।
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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से लेकर थलसेना अध्यक्ष, रॉ प्रमुख और डायरेक्टर जनरल मिलिट्री आपरेशन तक के पद पर उत्तराखंड के अफसर तैनात किये गए हैं। उत्तराखंड सैन्य बहुल प्रदेश होने के चलते सामरिक पदों पर प्रदेश के अफसरों को मिला महत्व 15 प्रतिशत फौजी वोट बैंक पर असर डाल सकता है। भले ही टॉप पदों पर पहुंचने वालों को उनकी योग्यता के आधार पर जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन प्रदेश में बने सियासी माहौल में इसका फायदा फौजी वोट बैंक के माध्यम से भाजपा को मिल सकता है।
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भाजपा ने केंद्र में सरकार बनाने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का पद अजित डोभाल को दिया। डोभाल पौड़ी जनपद के हैं, जिनके कार्यकाल में सेना ने म्यांमार और पीओके में कई अहम आपरेशन किये। इसके बाद डायरेक्टर जनरल मिलिट्री आपरेशन के पद पर मसूरी निवासी लेफ्टिनेंट जनरल एक भट्ट को जिम्मेदारी दी गई।
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पाकिस्तान के साथ चल रही प्रॉक्सी वॉर में यह पद बेहद अहम माना जाता है। अब केंद्र ने सीनियारटी लिस्ट को दरकिनार कर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बक्शी की जगह पौड़ी जनपद के लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत को थल सेना प्रमुख बना दिया है। विपिन रावत को सितंबर में वाइस चीफ के पद पर प्रोन्नत किया था।
इसी के साथ केंद्र ने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का चीफ अनिल कुमार धस्माना को बना दिया है। धस्माना की एनएसए डोभाल से निकटता रही है। केंद्र की बलूचिस्तान को लेकर पॉलिसी में भी वह फिट बैठते हैं। चार अहम पद उत्तराखंड मूल के आला अधिकारियों को मिलने से अब सियासी रणनीतिकार इसका चुनाव पर पड़ने वाला असर आंकने लगे हैं। उत्तराखंड के सैनिकों के लिए यह इसलिए भी अहम है कि रावत प्रदेश के दूसरे जनरल होंगे।
इससे पहले बिपिन चंद्र जोशी आर्मी चीफ बने थे। हालांकि उत्तराखंड से नौसेना प्रमख के पद पर डीके जोशी भी रह चुके हैं। इन पदों के अलावा इस समय तटरक्षक के प्रमुख भी उत्तराखंड से हैं। चकराता के राजेंद्र सिंह 2016 में ही तटरक्षक प्रमुख बने हैं। उत्तराखंड में सेना और अर्द्धसेना बलों में कार्यरत और रिटायर की संख्या आठ लाख है, जिनके लिए यह मौका गर्व का है। ऐसे में भाजपा को रणनीतिकार इसका सियासी फायदा ले सकते हैं।