टीएचडीसी में हिस्सेदारी: सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड की उम्मीद को लगे पंख, अब तेजी से होगी मामले की सुनवाई
वर्ष 2012 में टीएचडीसी में हिस्सेदारी के वाद में न्यायालय ने उत्तराखंड के पक्ष में एकपक्षीय आदेश दे दिया था। यूपी ने वाद के अध्ययन के लिए समय मांगा था। तब से इस मामले में बात आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
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लंबी सुस्ती के बाद अब टीएचडीसी में हिस्सेदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही जंग एक दिलचस्प मोड़ पर आती दिख रही है। उत्तराखंड की पहल पर सर्वोच्च अदालत ने इस वाद की सुनवाई में तेजी को लेकर राज्य सरकार की अपील को स्वीकार किया और बुधवार को वाद के बिंदू भी तय कर दिए। इससे उत्तराखंड सरकार की उम्मीदों को पंख लग गए हैं।
टीएचडीसी में हिस्सेदारी का फायदा ले रही उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता से भी वाद के बिंदू देने के लिए कहा गया था, लेकिन उनकी ओर से कोई बिंदू नहीं दिए गए, जबकि उत्तराखंड सरकार ने 13 बिंदू दिए थे। इन वाद बिंदुओं की समीक्षा करते हुए न्यायालय ने पांच वाद बिंदू निर्धारित कर दिए हैं।
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वर्ष 2012 में टीएचडीसी में हिस्सेदारी के वाद में न्यायालय ने उत्तराखंड के पक्ष में एकपक्षीय आदेश दे दिया था। यूपी ने वाद के अध्ययन के लिए समय मांगा था। तब से इस मामले में बात आगे नहीं बढ़ पा रही थी। न्यायालय में लंबित वाद में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने पहल की। न्यायालय ने राज्य सरकार की अपील को स्वीकार कर लिया। 12 सितंबर को इस मामले में न्यायधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और जस्टिस जेके माहेश्वरी की खंडपीठ के समक्ष यूपी के अधिवक्ता ने वाद के अध्ययन के लिए फिर समय मांगा। इस पर न्यायालय ने दो दिन का समय दिया।
उत्तराखंड सरकार के ऊर्जा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, बुधवार को न्यायालय ने दोनों राज्यों के अधिवक्ताओं से वाद के बिंदू प्रस्तुत करने को कहा। उत्तराखंड की ओर से वाद के 13 बिंदू दिए गए, जबकि यूपी की ओर से कोई बिंदू नहीं दिया गया। न्यायालय ने इन बिंदुओं की समीक्षा कर वाद के पांच बिंदू निर्धारित कर दिए हैं। बकौल सुंदरम, न्यायालय में वाद बिंदुओं का तय होना बहुत महत्वपूर्ण कदम है, न्यायालय ने वाद तय कर दिए हैं।
यूपी को पता है केस नहीं है मजबूत
टीएचडीसी में हिस्सेदारी की पैरवी करने वाले आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि चूंकि यूपी का दावा कमजोर है, इसलिए वह इस वाद को लंबा खींचना चाहता है, लेकिन अब वह इस मामले को बहुत ज्यादा समय तक नहीं खींच पाएगा।
अब आगे ये होगा
ऊर्जा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, वाद के बिंदू तय हो जाने के बाद अब कोर्ट सिलसिलेवार आगे की प्रक्रिया करेगी। इसमें गवाही होंगी। क्रास एग्जामिनेशन होगा और फिर बहस होगी। उसके बाद फैसला आएगा। इसमें दोनों राज्यों के ऊर्जा सचिवों की गवाही होनी है। साथ ही टीएचडीसी के व अन्य गवाह प्रस्तुत होने हैं। इस प्रक्रिया में करीब 12 हफ्तों का समय लग सकता है। इस बात की संभावना है कि गवाही नवंबर में शुरू हो जाएगी।
अब मुकुल रोहतगी नहीं लड़ेंगे केस
टीएचडीसी की हिस्सेदारी की जंग को सुप्रीम कोर्ट में मजबूती के साथ लड़ने के लिए राज्य सरकार ने देश के ख्यातिलब्ध अधिवक्ता मुकुल रोहतगी को नियुक्त किया था, लेकिन रोहतगी के केंद्र सरकार में दोबारा अटार्नी जनरल बनने की संभावना है। इसलिए उन्होंने किसी एक राज्य का अधिवक्ता बनने से इनकार कर दिया है। ऊर्जा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, नामी वकील मुकुल रोहतगी के साथ अधिवक्ताओं की जो टीम तैनात की गई है, वह इस वाद को आगे लड़ेगी और गवाही और क्रास एग्जामिनेशन के समय आवश्यकता के अनुसार, अनुभवी अधिवक्ता की सेवाएं ली जाएंगी।