उत्तराखंडः प्रदेश में रोजगार की धीमी रफ्तार, रोस्टर और आरक्षण में फंसी सरकार
- बेहद जरूरी पदों को भी इस वित्तीय वर्ष में भरा जाना मुश्किल
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इस वर्ष को रोजगार के रूप में मना रही सरकार की अपने ही घर में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की रफ्तार बेहद धीमी है। सरकार की कोशिश पर किसी न किसी वजह से अड़ंगा लग रहा है और इसकी वजह से अभी तक नई भर्तियां धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं।
प्रदेश में करीब 58 हजार पद खाली हैं। वित्तीय स्थिति को देखते हुए सरकार ने इनमें से बेहद जरूरी 18 हजार पद भरने का फैसला किया। हाल यह है कि इन पदों पर भी अभी तक नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं। यह तब है जबकि वित्तीय वर्ष का आधा समय गुजर चुका है। इस रफ्तार से कोर कंपीटेंसी के सभी पदों को इस वित्तीय वर्ष में भरा जाना संभव नहीं दिख रहा। वित्त विभाग बेहद जरूरी पदों को भरने पर तो सहमत है। खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को कहना पड़ रहा है कि बेहद जरूरी पद नहीं भरे गए तो बाद में खर्च जितना होना है, उससे अधिक हो जाएगा।
क्या करना है....
- प्रदेश में करीब 58000 पद रिक्त हैं। इतनी बड़ी संख्या में पदों को भरने पर वित्तीय स्थिति गड़बड़ाने की आशंका वित्त पहले ही जता चुका है। सातवें वेतन आयोग ने भी संस्तुति की थी कि जरूरत के हिसाब से पदों को भरा जाए। इसी के आधार पर सरकार ने कोर कंपीटेंसी के 18000 पदों को भरने का निर्णय लिया। इन 18000 रिक्त पदों पर नियुक्ति की जानी है।
क्या हुआ अब तक...
-समूह ग के पदों में सेवायोजन केंद्रों में पंजीकरण की अनिवार्यता को लेकर पेच फंसा रहा। इस दौरान भी भर्ती प्रक्रिया बाधित रही। बाद में शासन से स्थितियां साफ हुईं तो दस प्रतिशत आरक्षण का पेच फंस गया।
- पहले भेजे गए 3200 पदों के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजे गए अधियाचन का मामला दस प्रतिशत आरक्षण में उलझा। यह मामला सुलझ गया, लेकिन चयन प्रक्रिया कम से कम तीन माह पीछे खिसक गई। इसमें भी करीब 2000 प्रस्ताव में किसी न किसी तरह की आपत्तियां लगी हैं। करीब 1200 पद ही हैं, जिनमें भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ पाई है।
-अब सीधी भर्ती के करीब 3000 पदों पर रोस्टर का पेच फंस गया है। पहले रोस्टर में पहला पद अनुसूचित जाति के लिए था। नए रोस्टर में उसे छठे स्थान पर कर दिया गया है। हालांकि सरकार की ओर से शासनादेश कर दिया गया, लेकिन इस मामले में कमेटी भी बना दी गई। अब कमेटी की रिपोर्ट आने और समिति की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेने तक यह मामला आगे बढ़ेगा।
दस साल में बेरोजगारी की दर तीन गुना
हाल ही में जारी मानव विकास रिपोर्ट से भी सरकार के सामने नई चुनौती खुलकर सामने आई है। रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश में शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर पिछले दस सालों में करीब तीन गुना हो गई है। वर्ष 2004-05 में यह दर छह प्रतिशत थी। इस समय यह बढ़कर 17.4 प्रतिशत हो गई है। मुसीबत यह है कि औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार की दर 2011-12 के बाद से नौ प्रतिशत के आसपास ही बनी हुई है। कृषि क्षेत्र में रोजगार की दर 66 प्रतिशत के आसपास थी, जो अब घटकर 39 प्रतिशत ही रह गई है। सेवा क्षेत्र में रोजगार की दर 2004-05 की तुलना में 21 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत तक पहुंच पाई है।