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सायरा का पांच बार गर्भपात कराने के बाद भी नहीं पसीजा था रिजवान, पिता हुए भावुक तो कही दिल की बात
ब्यूरो/ अमर उजाला, काशीपुर
Updated Wed, 23 Aug 2017 12:44 AM IST
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तीन तलाक के खिलाफ महिलाओं के हक के लिए सबसे पहले याचिका दायर कर सामने आने वाली सायरा का दर्द आज भी कम नहीं हुआ है। पांच बार अबॉर्शन कराने के बाद भी सायरा के पति रिजवान का दिल नहीं पसीजा था। कोर्ट का फैसला आया तो पिता की आंखे भी नम हो गई।
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काशीपुर की सायरा बानो ने एक चिट्टी के जरिए पति के तीन तलाक के खिलाफ जब मोर्चा खोला था, तो एक बार को तो पूरा जमाना ही खिलाफ हो गया। लेकिन उसने हार नहीं मानी और मंगलवार को आए सुप्रीमकोर्ट के फैसले में इसे अमान्य करार दे दिया। फैसला आने के बाद भावुक हुए सायरा के पिता ने इसे एतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि बच्ची ने बहुत सहा है। इस फैसले से शायद उसके गम की भरपाई हो जाए।
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इलाहाबाद के मूल निवासी सायरा के पिता आरटीसी हेमपुर डिपों के लेखा विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत है। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी सायरा ने सोशल साइंस से एमए किया है। सायरा का विवाह 11 अप्रैल 2002 को इलाहाबाद के थाना करेली वीआईपी कालोनी निवासी रिजवान पुत्र इकबाल से हुआ था।
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मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर छोड़कर चला गया
सायरा के पिता इकबाल ने बताया कि विवाह के बाद से पति और ससुराल वाले बेटी का उत्पीड़न करने लगे। सायरा के दो बच्चे हुए। इसके बाद बीमारी की हालत में पति ने उसका पांच बार गर्भपात कराया फिर 10 अप्रैल 2015 को रिजवान उसे मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर छोड़कर चला गया।
बेटी का फोन आने पर वह उसे घर लेकर आए। कुछ दिनों बाद कई बार फोन पर दो मासूम बच्चों की खातिर रिजवान से सायरा को ले जाने की मिन्नतें की गई, लेकिन उसका दिल नहीं पसीजा।
उसी साल 10 अक्तूबर को स्पीड पोस्ट से एक चिठ्ठी मिली, जिसके खोलते ही सायरा के साथ पूरे घरवालों पर वज्रपात हो गया। इसमें तीन बार तलाक.. तलाक.. तलाक लिखा था और गवाह के तौर पर रिजवान के दोस्त मो. अयाज और मामा मो. यासीन के हस्ताक्षर थे। पति की बेरुखी और इस चिट्टी के बाद सायरा ने तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अंतत: जीत उसकी हुई।
बेटी का फोन आने पर वह उसे घर लेकर आए। कुछ दिनों बाद कई बार फोन पर दो मासूम बच्चों की खातिर रिजवान से सायरा को ले जाने की मिन्नतें की गई, लेकिन उसका दिल नहीं पसीजा।
उसी साल 10 अक्तूबर को स्पीड पोस्ट से एक चिठ्ठी मिली, जिसके खोलते ही सायरा के साथ पूरे घरवालों पर वज्रपात हो गया। इसमें तीन बार तलाक.. तलाक.. तलाक लिखा था और गवाह के तौर पर रिजवान के दोस्त मो. अयाज और मामा मो. यासीन के हस्ताक्षर थे। पति की बेरुखी और इस चिट्टी के बाद सायरा ने तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अंतत: जीत उसकी हुई।