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Amar Ujala Exclusive: बंदियों के साथ नहीं रखे जाएंगे कट्टरपंथी कैदी, उत्तराखंड की जेलों में बनेंगे अलग सेल

Mon, 10 Oct 2022 07:20 PM IST
रेनू सकलानी राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 10 Oct 2022 07:20 PM IST
सार

गृह विभाग की बैठक में तय हुआ है कि राज्य की जेलों के बंदियों के साथ कट्टरपंथियों को नहीं रखा जाएगा। ऐसे बंदियों के लिए जेलों में अलग सेल की व्यवस्था होगी। कट्टरपंथियों के लिए अलग सेल बनाए जाने से वे अन्य बंदियों के से दूर रहेंगे।

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Separate cells will be made in Uttarakhand jails for fundamentalists Uttarakhand news in hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

उत्तराखंड में बेशक कट्टरपंथियों की कोई गंभीर समस्या न हो, मगर एहतियात के तौर पर राज्य की जेलों में ऐसे कैदियों के अलग कक्ष (सेल) बनाए जाएंगे। गृह विभाग को इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं। अपर सचिव गृह रिद्धिम अग्रवाल ने इसकी पुष्टि की है।

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कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई गृह विभाग की बैठक में इस मसले पर मंथन हो चुका है। बैठक में तय हुआ है कि राज्य की जेलों के बंदियों के साथ कट्टरपंथियों को नहीं रखा जाएगा। ऐसे बंदियों के लिए जेलों में अलग सेल की व्यवस्था होगी। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से भी इस संबंध में राज्यों को दिशा-निर्देश जारी हुए हैं।
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अलग सेल बनाने की ये हैं कारण
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि कट्टरपंथियों के लिए अलग सेल बनाए जाने से वे अन्य बंदियों के से दूर रहेंगे। उनके जेल में पहले से कैद में रखे गए कैदियों के संपर्क में आने से दूसरे खतरे पैदा हो सकते हैं। ऐसे लोगों के संपर्क आने से कट्टरपंथी ताकतों की उन कथित गैर कानूनी और अनैतिक गतिविधियों में लिप्त होने का खतरा है। ऐसे खतरे से बचाव के लिए उन्हें कट्टरपंथियों से दूर रखा जाना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
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कट्टरपंथ की समस्या नहीं तो सेल क्यों?
लाजिमीतौर पर यह सवाल उठ रहा है कि उत्तराखंड में कट्टरपंथ की वैसी समस्या नहीं हैं। इसके बावजूद जेलों में अलग सेल बनाए जाने की जरूरत क्यों हैं? आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि कई बार कुछ कैदियों को दूसरे राज्यों की जेलों में बंद करने के भी निर्णय होते हैं। ऐसे कट्टरपंथी कैदी भी हो सकते हैं। इसलिए ऐहतिया के तौर पर सरकार जेलों में अलग सेल बनाने की तैयारी कर रही है।
 

राज्य में माओवाद की समस्या नहीं
राज्य की पुलिस का भी यह दावा है कि राज्य में नेपाल से सटे इलाकों में माओवाद की जो समस्या सिर उठा रही थी, उसे दबा दिया गया है। राज्य में माओवाद के आरोप में कुछ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, लेकिन बाद में उन्हें साक्ष्यों के अभाव में छोड़ना पड़ा। इसके अलावा राज्य में कट्टरपंथ जैसी समस्या तो नहीं है, लेकिन भविष्य में इस तरह के खतरे की संभावना को देखते हुए सरकार के स्तर पर एहतियात बरती जा रही है। 

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ये होता है कट्टरपंथ 
रूढ़िवादी ढंग से किसी मत को मानने वाला या बिना समझे-बूझे आंखें बंद करके किसी मत को मानने वाला। एक प्रकार पूर्ण व अंध समर्थक।

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