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ऐसे पूरी होगी दूसरी बार हज जाने की ख्वाहिश
चांद मोहम्मद/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 29 Jan 2016 05:04 PM IST
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एक बार हज का पाक सफर कर चुके हैं और दोबारा खान-ए-काबा की जियारत करना चाहते हैं, तो आपकी यह ख्वाहिश पूरी हो सकती है। हालांकि इसके लिए आपको बुजुर्गों और महिलाओं का सहारा बनना पड़ेगा। इस मदद की बदौलत दोबारा हज करने का मौका मिल जाएगा।
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तीन साल पहले तक अकीदतमंदों को दो बार हज करने की छूट थी। हाजी पांच साल बाद दोबारा आवेदन करते थे। कुर्रा में नाम शामिल होने पर उनको दूसरी बार हज करने का मौका मिल जाता था। लेकिन तीन साल पहले हजयात्रा के नियमों में कुछ फेरबदल किया गया।
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कमेटी ने दूसरे अकीदतमंदों को मौका देने के लिए दो बार हज करने पर पाबंदी लगा दी। अब आजमीनों को सिर्फ एक बार हज करने की इजाजत है। लेकिन कोई आजमीन चाहे तो वह दूसरी बार हज करने जा सकता है लेकिन इसके लिए उसे बुजुर्गों और महिलाओं को मददगार बनकर जाना होगा।
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पहली बार हज यात्री चुनेंगे पसंद की भाषा
हज यात्रियों को यात्रा के लिए दी जाने वाली गाइड (पुस्तिका) अब उनकी भाषा में मुहैया कराई जाएगी। हज कमेटी ने पहली बार आजमीनों (हज यात्रियों) को आवेदन फार्म में अपनी भाषा चुनने का विकल्प दिया है।
पहले यह किताब सिर्फ हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में थी, लेकिन अब यह तमिल, कन्नड़, तेलगू, बांग्ला, गुजराती, मणिपुरी, असमी, मलयालम में भी उपलब्ध है।
उत्तराखंड हज कमेटी के चेयरमैन हाजी राव शेर मोहम्मद ने बताया कि यात्रियों को आवेदन फार्म में गाइड की भाषा चुननी होगी। गाइड में मक्का, मदीना के मख्तब, पुलिस स्टेशन, अस्पताल समेत हज यात्रा से संबंधित जानकारियां मिलेंगी।
पासपोर्ट की समस्याओं का तत्काल समाधान
हज के लिए आवेदन करने वालों की पासपोर्ट से संबंधित समस्याओं का तत्काल समाधान कराने के लिए एमकेपी रोड स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में एक अलग काउंटर खोला गया है। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी विजय शंकर पांडे ने बताया कि हज यात्रा पर जाने वाले लोगों को पासपोर्ट संबंधी कोई समस्या हो तो कार्यालय में लगे काउंटर पर समाधान करा सकते हैं।
दूसरे अकीदतमंदों को मौका देने के लिए हज कमेटी की ओर से आवेदकों को सिर्फ एक बार हज करने का मौका दिया जाता है। लेकिन बुजुर्गों और महिलाओं के मददगार बनकर दोबारा हज कर सकते हैं। गाइड 11 भाषाओं में मिलने से आसानी होगी। हालांकि प्रदेश कमेटी की ओर से भी ट्रेनिंग के दौरान एक किताब मुहैया कराई जाती है।
- हाजी राव शेर मोहम्मद, चेयरमैन उत्तराखंड हज कमेटी