नैनी झील के सूखने को लेकर वैज्ञानिकों ने खोला राज, बतायी असली वजह
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नैनीताल झील के गिरते जल स्तर और नैनीझील के सूखने को लेकर वैज्ञानिकों ने एक राज खोला है। वैज्ञानिकों नेक जो इसका कारण बताया है उससे सरकार भी सकते में आ गई है।
नैनी झील के संरक्षण को लेकर राजभवन में राज्यपाल की पहल पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने झील संरक्षण को लेकर सुझाव दिए। राज्यपाल केके पॉल ने कुमाऊं कमिश्नर चंद्रशेखर भट्ट की अध्यक्षता में झील निगरानी समिति का गठन किये जाने का निर्देश दिया है।
सेमिनार में विशेषज्ञ ने एक मत से स्वीकारा कि मुख्य रूप से नैनीताल झील में जो भूमिगत जल स्रोतों से पानी का रिसाव झील में होता है वह स्रोत निर्माण कार्यों के कारण बंद हो गए हैं। विशेषज्ञों ने बंद जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही।
नैनीताल में ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव, सर्दी के मौसम में होने वाली वर्षा की मात्रा में कमी आना, समय-समय पर आने वाले भूकंप व भूस्खलन के प्रभाव से झील पर पड़ रहे प्रभावों तरफ भी विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया।
पर्यटकों का भी बढ़ रहा दबाव
पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा कि शहर की आबादी और पर्यटकों का बढ़ते दबाव के कारण झील से ज्यादा मात्रा में पानी की निकासी और उस अनुरूप में झील में बरसात आदि से पानी न पहुंच पाने से भी झील के जल स्तर पर प्रभाव पड़ा है।
झील के संरक्षण के लिए बरसात के पानी को समुचित मात्रा में झील में पहुंचने की व्यवस्था करना, वर्षा जल संरक्षण, यातायात को नियंत्रित करना, जल उपयोग की सीमा निर्धारित करना, पानी की लीकेज की समस्या को तत्काल दूर करने के सुझाव राज्यपाल के सम्मुख रखे गए।
विशेषज्ञों ने झीलों के जल संवर्धन व संरक्षण हेतु राज्य में सरोवर विज्ञान विभाग आवश्यकता की बात भी रखी। इस दौरान सचिव रविनाथ रमन, झील विकास प्राधिकरण अध्यक्ष इंदु कुमार पांडे, उत्तराखंड स्टेट कॉउंसिल फॅार साइंस एंड टेक्नॉलॉजी के महानिदेशक राजेंद्र डोभाल, डीएम नैनीताल दीपेंद्र चौधरी, वाडिया इंस्टीट्यूट समेत कई वैज्ञानिक संस्थानों के वैज्ञानिक व विशेषज्ञ मौजूद थे।