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केदारनाथ में मिला ऐसा रिकार्ड कि सकते में आ गए वैज्ञानिक

Thu, 09 Nov 2017 09:13 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 09 Nov 2017 09:13 AM IST
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scientist found 8000 year old record in kedarnath
kedarnath

केदारनाथ में आठ हजार साल के जलवायु परिवर्तन का रिकार्ड सख्त मिट्टी के टुकड़े से मिला है।

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सरस्वती नदी के पास हिमनद पर मिले ठोस मिट्टी (पीट) के पांच मीटर लंबे इस टुकड़े की जांच से पता चला है कि जब-जब मानसून मजबूत हुआ है भारत की सभ्यताएं समृद्ध हुई हैं।

वैदिक काल, सिंधू घाटी, गुप्त वंश की समृद्धता मजबूत मानसून से प्रभावित रही है। इसके साथ ही एक और नया राज खुला है कि भारतीय मानसून पर उत्तरी अक्षांश का असर आता है।
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हिमनद पर पड़े इस पीट के टुकड़े ने सबको चौंका दिया

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kedarnath
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान देहरादून की टीम वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव की अगुवाई में वैसे तो वर्ष 2013 में केदारनाथ में आई आपदा का प्रभाव देखने के लिए गई थी, लेकिन हिमनद पर पड़े इस पीट के टुकड़े ने सबको चौंका दिया।

इस मिट्टी में दबे पराग कणों की जांच की गई तो आठ हजार साल के जलवायु परिवर्तन और मानसून की स्थिति के रिकार्ड की परतें खुलने लगीं।

सैंपल की जांच पोलैंड में कार्बन-14 तकनीक से कराई गई। इसमें यह भी पता चला कि केदारनाथ में आठ हजार सालों के बीच किस-किस तरह की वनस्पतियां रही हैं।

इन रिकार्ड को जब इतिहास से जोड़कर देखा गया

scientist found 8000 year old record in kedarnath
kedarnath - फोटो : amarujala
साथ ही मानसून के बदले मिजाज की भी जानकारी हुई।शोध में यह भी पाया गया कि केदारनाथ के जलवायु परिवर्तन का रिकार्ड ग्रीन लैंड से मेल खाता है। हिमनद पर मिली मिट्टी से निकले रिकार्ड पेरू के समुद्री तलछट से भी मेल खाते हैं।

अटलांटा से भी हिमालय का ‘टेली कनेक्शन’ पाया गया। इन रिकार्ड को जब इतिहास से जोड़कर देखा गया तो पता चला कि स्वर्ण युग (वैदिक काल) में मानसून बहुत मजबूत रहा है। सिंधू घाटी की सभ्यता की विविधताएं जलवायु परिवर्तन की ही देन रही हैं। इस पूरे काल में मानसून कभी कम और कभी बहुत अधिक हुआ है। इससे यहां अनाज और वनस्पतियों की विभिन्न प्रजातियां पनपीं। जलवायु के बदलाव से जब भी मानसून मजबूत हुआ सभ्यताएं समृद्ध हुई हैं।

हिमनद पर मिले पीट से निकाले गए पराग कणों से आठ हजार साल के जलवायु परिवर्तन का रिकार्ड मिला है। इसमें बहुत सी नई चीजें पता चली हैं जो आने वाले समय में शोध में मदद करेंगी। लघु हिम काल (1500-1800 ईसा पश्चात) की निशानियां भी पाई गई हैं। जलवायु परिवर्तन का मानव सभ्यता के विकास पर प्रभाव पता चला।
- डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, वरिष्ठ विज्ञानी वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान
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