Dehradun News: राजधानी के मास्टर प्लान में सजरा शामिल, अब पता चल सकेगा भूमि का लैंडयूज
एमडीडीए ने राजधानी देहरादून का जीआईएस आधारित डिजिटल मास्टर प्लान तैयार कर उस पर आपत्तियां मांगी थीं। करीब 1200 लोगों ने मास्टर प्लान में संशोधन कराने के लिए अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
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राजधानी के डिजिटल मास्टर प्लान पर शहरवासियों की आपत्तियां प्राप्त करने के बाद अगले चरण में सजरे को भी शामिल कर लिया गया है। आर्किटेक्ट और शहरवासियों के साथ हुई पब्लिक मीटिंग में सजरे को मास्टर प्लान में शामिल करने का मुद्दा उठा था। जिसके बाद प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने इसके आदेश जारी किए थे।
रेवेन्यू रिकाॅर्ड के मास्टर प्लान में शामिल होने से शहरवासी अपनी जमीन और इलाके के लैंडयूज का पता आसानी से लगा सकेंगे। गौरतलब हो कि एमडीडीए ने राजधानी देहरादून का जीआईएस आधारित डिजिटल मास्टर प्लान तैयार कर उस पर आपत्तियां मांगी थीं। करीब 1200 लोगों ने मास्टर प्लान में संशोधन कराने के लिए अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
इसके बाद बुलाई गई पब्लिक मीटिंग में बड़ी संख्या में लोगों ने कहा कि मास्टर प्लान में सजरे को शामिल नहीं करने के कारण समस्या आ रही है। शहरवासी अपनी जमीनों का लैंडयूज पता नहीं कर पा रहे हैं। जिसे देखते हुए सजरे को मास्टर प्लान से कनेक्ट कर दिया गया है। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि आपत्तियों के निस्तारण का कार्य किया जा रहा है। आपत्तियों को निस्तारित कर मास्टर प्लान पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
पुराने मास्टर प्लान में लोगों को कई दिक्कतें
मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की तरफ से वर्ष 2041 तक के लिए यह डिजिटल मास्टर प्लान बनाया गया है। यह मास्टर प्लान सैटेलाइट के जरिए तैयार किया गया है। यह मास्टर प्लान साल 2018-19 से ज्योग्राफिक इनफॉरमेशन सिस्टम के जरिए तैयार किया जा रहा था। इससे पहले पुराने मास्टर प्लान में लोगों को कई तरह की दिक्कतें आ रही थीं।
मास्टर प्लान में जो स्थितियां दर्शायी गई थीं, उससे उलट धरातल पर निर्माण दिखाई दे रहे थे, अब सैटेलाइट मैपिंग के साथ ही धरातलीय सर्वे के बाद नया मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इससे पूर्व 2005-2025 तक का मास्टर प्लान प्रभावी रहा है, खामियों के चलते हाईकोर्ट इसे निरस्त कर चुका है और यह सुप्रीम कोर्ट के स्टे पर चल रहा है। वर्ष 2018-19 से जीआइएस (जियोग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम) आधारित जिस मास्टर प्लान पर एमडीडीए व मुख्य ग्राम एवं नगर नियोजक की टीम माथा-पच्ची कर रही थी, अब यह धरातल पर उतरेगा।
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सजरा क्या होता है?
सजरा किसी गांव के ऐसे नक्शे को कहते हैं, जिसका प्रयोग उस गांव के खेतों या अन्य जमीनों का कानूनी तौर पर स्वामित्व बताने और प्रशासनिक कार्यों के लिए होता है। गांव का सजरा पूरे गांव को जमीन के टुकडों में बांटता है। हर टुकड़े का अपना खसरा नंबर होता है, जिसमें लिखा होता है कि उस खसरे का मालिक कौन है। सजरा एक अरबी शब्द है।
मुख्य ग्राम एवं नगर नियोजक एसएम श्रीवास्तव के मुताबिक, नया मास्टर प्लान सेटेलाइट आधारित है और इसमें सेटेलाइट मैपिंग के साथ ही धरातलीय सर्वे कर सटीक जानकारी एकत्रित की गई है। एमडीडीए आपत्तियों के निस्तारण के बाद इसे लागू कर देगा।