गंगा रक्षा के लिए अब अनशन पर बैठेंगी साध्वी पद्मावती, दो संत पहले ही दे चुके प्राणों की आहुति
- दो संत गंगा की रक्षा के लिए अनशन करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे चुके हैं।
- यूएनओ ने भी कहा और बलिदान न हो
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गंगा रक्षा के लिए संघर्ष करने वाली संस्था मातृ सदन में एक बार फिर गंगा को बचाने के लिए संघर्ष की जमीन तैयार की जा रही है। इस बार साध्वी पद्मावती अनशन करेंगी। मातृसदन का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार गंगा को बचाने के लिए गंभीर नहीं हैं। मातृ सदन के साथ वादा खिलाफी की गई है इसलिए संघर्ष किया जाएगा।
मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि विगत मई माह में 194 दिनों तक मातृ सदन के ब्रह्मचारी स्वामी आत्मबोधानंद का अनशन केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के इस आश्वासन पर समाप्त कराया था कि हरिद्वार जनपद में गंगा और उसकी सहयोगी नदियों में खनन पूरी तरह बंद रहेगा। यह भी कहा गया था कि यह लिखित आश्वासन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के चलते दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने खुद मातृसदन पहुंचकर आश्वासन दिया था कि उनकी सभी मांगों को मान लिया जाएगा। जिसमें उत्तराखंड की प्रमुख विद्युत परियोजनाओं को बंद करना भी शामिल है। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि अभी तक इन मांगों को पूरा करने की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। हरिद्वार में भी रायवाला तथा श्यामपुर क्षेत्र की कोटावाली और पीली नदी में खनन शुरू कर दिया गया है।
दो संत दे चुके प्राणों की आहुति
मातृसदन में दो संत गंगा की रक्षा के लिए अनशन करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे चुके हैं। वर्ष 2011 में ब्रह्मचारी निगमांनद ने गंगा में अवैध खनन बंद करने की मांग को लेकर अनशन किया था। बाद में उनका देहावसान हो गया था।
इसी तरह वर्ष 2018 में जाने-माने वैज्ञानिक रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ जीडी अग्रवाल ने भी गंगा की रक्षा के लिए अनशन करते हुए अपने प्राणों का बलिदान किया था। गंगा रक्षा के लिए मातृसदन के संतो के बलिदान पर संयुक्त राष्ट्र संघ यूएनओ ने भी हस्तक्षेप किया।
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि यूएनओ की ओर से सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम कहा गया कि गंगा को लेकर अब और बलिदान नहीं। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि मातृसदन में हुए दोनों बलिदानों पर संज्ञान लेते हुए यूएनओ की तरफ से उनकी वेबसाइट पर टिप्पणी की गई है।